
आयुर्वेद हमें सही खान-पान और लाइफस्टाइल जीने के बारे में बेहतर तरीका बताता है। आयुर्वेद के अनुसार अगर व्यक्ति सही से आहार ले और प्रकृति के नियमों के अनुसार चले तो तमाम बीमारियों से बच सकता है। आयुर्वेद में ज्यादातर बीमारियों के उपचार के लिए औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियां का उपयोग किया जाता है। कई ऐसे पौधें हैं जिन्हें आयुर्वेद में चमत्कारिक बताया गया है। इन्हीं में से एक पत्थरचट्टा भी है, जिसे आयुर्वेद औषधीय पौधा बताता है। आयुर्वेद इस पौधे का उपयोग पारंपरिक रूप से किडनी की पथरी, सूजन और पेट की समस्याओं के इलाज में करता है। हालांकि, डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के बीना इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
पत्थरचट्टा का पौधा आप घर पर भी लगा सकते हैं। इसके लिए सबसे उपयुक्त मौसम बरसात का है और इस वक्त मानसून चल भी रहा है। ऐसे में आप इसे अपनी बालकनी से लेकर छत तक पर गमले में आसानी से उगा सकते हैं। हालांकि, इसे थोड़ी सी देखभाल की जरूरत होती है। आइए जानते हैं घर पर पत्थरचट्टा का पौधा लगाने का सही तरीका और कैसे देखभाल करें।
1- गमले का चुनाव
पत्थरचट्टा को लगाने के लिए सही गमले का होना बेहद जरूरी है। इसके लिए 8-10 इंच का गमला लिया जा सकता है। गमले में पानी निकाले के लिए ड्रेनेज होल जरूर होना चाहिए।
2- कैसी होनी चाहिए मिट्टी
पत्थरचट्टा एक सक्युलेंट पौधा है, इसलिए इसके लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। इसके लिए 40% गार्डन मिट्टी, 30% रेत, 30% कम्पोस्ट या वर्मीकम्पोस्ट बेहतर माना जाता है।
3- पत्थरचट्टा का पौधा लगाने का सही तरीका
पत्थरचट्टा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी पत्तियों और छोटी शाखाओं से भी पौधा उगाया जा सकता है। इसके लिए शाखा या पत्ती को 1-2 दिन छाया में हल्का सूखने दें। इसके बाद मिट्टी में हल्का दबाकर लगा दें। कुछ दिनों में जड़े बनने लगती हैं। पत्तियों के किनारों से छोटे-छोटे नए पौधे निकल आते हैं।
4- देखभाल का तरीका
पत्थरचट्टा के पौधे को धूप काफी पसंद है। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। इसे रोजाना 4-6 घंटे हल्की या सुबह की धूप सबसे बेहतर मानी जाती है। वहीं, तेज दोपहर की धूप में लंबे समय तक रहने से इसकी पत्तियां झुलस सकती हैं और पौधा सूख सकता है।
5- पानी देना का सही समय
पत्थरचट्टा को पानी की ज्यादा जरूरत नहीं होती है। जब गमले की ऊपरी मिट्टी पूरी तरह सूख जाए तब पानी डाल सकते हैं। सर्दियों में इस कम पानी की जरूरत होती है वहीं गर्मियों में सप्ताह में 1-2 बार पानी दे सकते हैं। बरसात के मौसम में गमले को ऐसी जगह रखें, जहां लगातार बारिश का पानी जमा न हो। जरूरत से ज्यादा नमी पौधे की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है।
6- खाद देने का समय
पत्थरचट्टा के गमले में महीने में एक बार जैविक खाद या वर्मीकम्पोस्ट डाल सकते हैं। इससे पौधे की ग्रोथ बेहतर तरीके से हो सकती है।
7- छंटाई
कई बार पौधे को सूखने और खराब करने में पत्तियां और शाखाएं अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में जब पत्थरचट्टा के पौधे की पत्तियां पिली या सूखी नजर आएं तो उन्हें पौधे से अलग कर दें।
डिस्क्लेमर: आर्टिकल में लिखी गई सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी है। किसी भी प्रकार की समस्या या सवाल के लिए विशेषज्ञ से जरूर परामर्श करें।



