Delhi Police CJP Protest Violence: दिल्ली पुलिस सीजेपी (CJP) के विरोध मार्च के दौरान हुई हिंसा में कथित तौर पर शामिल लोगों की पहचान करने के लिए अपने AI-इनेबल्ड कैमरों के नेटवर्क से फुटेज का इस्तेमाल कर रही है. जांचकर्ताओं का कहना है कि पुलिसकर्मियों और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों पर हमला करने के लिए जिम्मेदार पाए गए कई लोगों की पहचान की जा चुकी है. पुलिस सूत्रों ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित सर्विलांस सिस्टम, नई दिल्ली जिले में लगे CCTV कैमरों के बड़े नेटवर्क से मिले फुटेज का बारीकी से विश्लेषण कर रहा है.

जी न्यूज को एक सूत्र ने बताया, “ये AI कैमरे पुलिस को उन लोगों की पहचान करने में मदद करेंगे जो पुलिस के साथ झड़प, सरकारी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों पर हमले में शामिल थे. पुलिस डेटाबेस का इस्तेमाल करके उनके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जाएगी और फिर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा.”

“प्रदर्शन को उग्र बनाने की साजिश”
सूत्रों ने बताया कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों ने किसी भी तरह की हिंसा में हिस्सा नहीं लिया था, उनमें से कुछ लोगों ने पुलिस को अहम जानकारियां और वीडियो फुटेज मुहैया कराए हैं. सूत्रों के अनुसार, इन लोगों से कुछ ऐसी जानकारियां और सबूत मिले हैं जिनसे यह साफ जाहिर होता है कि हिंसा फैलाने वाले लोग प्रदर्शन को उग्र बनाने और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के उद्देश्य से ही योजनाबद्ध तरीके से इकट्ठा हुए थे. जिन लोगों से ये जानकारियां मिली हैं, उन्हें पूरा भरोसा दिलाया गया है कि उनकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इंटेलिजेंस एजेंसियों की रिपोर्ट्स से पता चला है कि युवा संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में हुआ यह विरोध-प्रदर्शन काफी सुनियोजित था और इसे कुछ नेताओं व राजनीतिक दलों का समर्थन भी हासिल था.

क्या ये छात्रों का आंदोलन नहीं था?
सूत्रों के मुताबिक, सरकारी और खुफिया आकलन से मिली जानकारियों में कुछ मुख्य बातें स्पष्ट हुई हैं. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। एजेंसियों का कहना है कि यह आंदोलन एक बेहद व्यवस्थित डिजिटल ढांचे पर टिका था, जिसमें टेलीग्राम नेटवर्क, व्हाट्सएप चैनल और QR कोड रजिस्ट्रेशन का इस्तेमाल किया जा रहा था. खुफिया सूत्रों का मानना है कि यह विरोध-प्रदर्शन सिर्फ छात्रों का आंदोलन नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत राजनीतिक तंत्र का समर्थन काम कर रहा था.

क्या कुछ दिन पहले ही हो गई थी प्लानिंग?
सूत्रों के अनुसार, यहां पर कुछ राजनीतिक पार्टियों द्वारा कुछ ऐसे लोगों को प्लांट किया गया जो कि हिंसक घटनाओं को अंजाम देने में माहिर है. इसकी पूरी प्लानिंग से कुछ दिन पहले ही दिल्ली व आसपास के इलाकों में यह लोग अलग-अलग ग्रुप में इकट्ठे हो गए थे. इन्होंने प्रदर्शन के दौरान चारों तरफ से हिंसक घटनाएं अंजाम देकर सुरक्षा व्यवस्था को बिगाड़ने की पूरी योजना बना रखी थी.

क्या नेपाल जैसी अराजक स्थिति करना चाहते थे?
सूत्रों का कहना है कि ये लोग आपस में जुड़े रहने के लिए कुछ खास सोशल मीडिया ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले थे. हिंसा को अंजाम देने के लिए इन्होंने ऐसे मोबाइलों का इस्तेमाल किया जो या तो चोरी के थे, या फिर जिनके सिम कार्ड और हैंडसेट किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड थे. इनका मुख्य मकसद हिंसा के दौरान सुरक्षा बलों को उलझाकर संसद में घुसना और नेपाल जैसी अराजक स्थिति पैदा करना था. फिलहाल पुलिस उन सभी मोबाइल नंबरों की मैपिंग कर रही है जो घटना के दौरान वहां मौजूद थे. इसके साथ ही, अलग-अलग टाइम जोन में संसद और प्रोटेस्ट साइट के आसपास सक्रिय रहे अन्य नंबरों की भी जांच की जा रही है. एजेंसियों के मुताबिक, यह कोई स्वाभाविक (ऑर्गेनिक) प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक लंबी-चौड़ी साजिश रची गई थी जिसका जल्द ही खुलासा हो जाएगा.