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Crime News: यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना साल 2011 की है, जब केरल में एक चलती ट्रेन के अंदर सौम्या नाम की 23 साल की लड़की के साथ जो हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. सौम्या कोच्चि में एक मॉल में काम करती थी और फरवरी के महीने में ट्रेन से अपने घर लौट रही थी. रास्ते में एक अपराधी गोविंदचामी ने सुनसान डिब्बे का फायदा उठाकर उस पर हमला कर दिया. जब सौम्या ने खुद को बचाने की पूरी कोशिश की, तो उस दरिंदे ने उसे चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया और खुद भी कूद गया. इसके बाद उसने गंभीर रूप से घायल और बेसुध पड़ी लड़की के साथ दरिंदगी की. कई दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद सौम्या ने दम तोड़ दिया. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। लेकिन इस घटना ने भारतीय न्याय व्यवस्था और कानूनी पेचीदगियों पर एक लंबी बहस छेड़ दी.

सौम्या की दुखद ट्रेन यात्रा और वहशी हमला

यह दर्दनाक घटना 1 फरवरी 2011 की है. सौम्या एर्नाकुलम से शोरनूर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन के महिलाओं के डिब्बे में अकेली यात्रा कर रही थी. रास्ते में एक शातिर अपराधी गोविंदचामी उस डिब्बे में घुस आया. जब उसने सौम्या के साथ बदसलूकी और लूटपाट की कोशिश की, तो इस बहादुर लड़की ने उसका जमकर मुकाबला किया. आरोपी ने उसके सिर को ट्रेन की दीवार पर बार-बार पटका, खुद को बचाने के संघर्ष के दौरान उस हैवान ने सौम्या को चलती ट्रेन से नीचे पटरी पर धकेल दिया. ट्रेन से नीचे गिरने के कारण सौम्या के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं और वह बुरी तरह लहूलुहान होकर बेहोश हो गई.

ट्रेन से कूदकर दरिंदगी, सामान लेकर भागा आरोपी

ट्रेन से नीचे कूदने के बाद वहशी दरिंदा ट्रैक के पास पहुंचा और बेसुध पड़ी सौम्या को उठाकर सूने इलाके में ले गया, जहां उसने उसके साथ दुष्कर्म किया. इसके बाद आरोपी उसका मोबाइल फोन और सामान लेकर फरार हो गया. गंभीर हालत में सौम्या को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां लगातार पांच दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 6 फरवरी को उसने दम तोड़ दिया. इस घटना के सामने आते ही पूरे देश में भारी गुस्सा फैल गया और लोगों ने आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग की.

अदालत ने किया सौम्या के साथ न्याय

इस मामले की सुनवाई करते हुए निचली अदालत और केरल हाईकोर्ट ने आरोपी गोविंदचामी को दुष्कर्म और हत्या का दोषी मानते हुए मौत की सजा (फांसी) सुनाई थी. लेकिन मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो एक नया कानूनी विवाद खड़ा हो गया. सुप्रीम कोर्ट ने यह माना कि इस बात पुख्ता सबूत नहीं हैं कि आरोपी ने सौम्या की हत्या करने के इरादे से ही उसे ट्रेन से धक्का दिया था, या फिर उसकी मौत सिर की चोट और अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के मिले-जुले असर से हुई. इस तकनीकी और कानूनी बहस के चलते अदालत ने आरोपी की हत्या की धारा (302) के तहत मिलने वाली मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया, हालांकि दुष्कर्म और अन्य जुर्म के लिए उसकी सजा बरकरार रखी गई. 

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