प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं. इस दौरान अगर कमर या पेट के एक तरफ तेज दर्द होने लगे, पेशाब करते समय जलन हो या पेशाब में खून दिखाई दे तो इसे सिर्फ प्रेगनेंसी की सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसकी एक वजह किडनी स्टोन यानी पथरी भी हो सकती है.

राजीव गांधी हॉस्पिटल में असिस्टेंट प्रो. डॉ अजीत कुमार बताते हैं कि गर्भावस्था में पथरी का इलाज थोड़ा अलग तरीके से किया जाता है, क्योंकि डॉक्टर को मां के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होता है.
सबसे पहले कौन सी जांच होती है?
अगर डॉक्टर को किडनी स्टोन का शक होता है तो आमतौर पर पहले अल्ट्रासाउंड कराया जाता है. गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि इसमें एक्सरे रेडिएशन नहीं होता. हर पथरी में तुरंत ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। अगर दर्द नियंत्रित है, पेशाब का रास्ता बंद नहीं है और संक्रमण नहीं है, तो डॉक्टर निगरानी के साथ इलाज कर सकते हैं.
पेनकिलर ले सकते हैं?
प्रेगनेंसी में खुद से कोई पेनकिलर या पथरी की दवा लेना ठीक नहीं है. कुछ दर्द की दवाएं गर्भावस्था के खास समय में नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसलिए डॉक्टर मरीज की प्रेगनेंसी के कितने सप्ताह चल रहे हैं और उसकी स्थिति कैसी है, इसके हिसाब से सुरक्षित दवा चुनते हैं.
कब सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है?
अगर पथरी की वजह से पेशाब का रास्ता गंभीर रूप से ब्लॉक हो जाए, तेज दर्द लगातार बना रहे, किडनी पर असर पड़ रहा हो या पेशाब में संक्रमण हो जाए और दवाओं से स्थिति ठीक न हो, तो प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है. ऐसी स्थिति में यूरेटरिक स्टेंट या नेफ्रोस्टॉमी जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जा सकते हैं. कुछ मरीजों में विशेषज्ञ डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान ही यूरेटेरोस्कोपी करके पथरी निकालने पर भी विचार कर सकते हैं.
किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
तेज या लगातार कमरपेट का दर्द, बुखार या ठंड लगना, पेशाब में खून, पेशाब कम आना या पेशाब करते समय तेज जलन जैसे लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. खासकर बुखार के साथ पथरी का शक हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि संक्रमण किडनी और गर्भवती महिला दोनों के लिए गंभीर हो सकता है.



