UP Electricity Load Increase: उत्तर प्रदेश में लगातार सातवें साल बिजली दरें न बढ़ाने के बाद अब पावर कॉरपोरेशन ने पिछले दरवाजे से उपभोक्ताओं की जेब पर हमला किया है। बिना किसी पूर्व सूचना के प्रदेश भर में करीब 47 लाख उपभोक्ताओं का विद्युत भार बढ़ा दिया गया है। अब उपभोक्ताओं को बढ़े हुए लोड के मुताबिक बिजली का ज्यादा बिल अदा करना पड़ेगा।

यूपी के 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर हमला, बिना बताए बढ़ा दिया गया लोड, अब देना होगा इतना ज्यादा बिल​
यूपी के 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर हमला, बिना बताए बढ़ा दिया गया लोड, अब देना होगा इतना ज्यादा बिल​

उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने जुलाई के महीने की शुरूआत से ही उपभोक्ताओं को एसएमएस व वाट्सअप के जरिए से लोड बढ़ाए जाने की जानकारी देना शुरू कर दिया है। अब तक 46.94 लाख उपभोक्ताओं को लोड बढ़ाए जाने का संदेश दिया जा चुका है। यहां तक कि गरीबी रेखा के नीचे श्रेणी के लाइफलाइन कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को भी इस कवायद में बख्शा नहीं गया है।

क्यों बढ़ाया गया लोड?

अपने संदेश में उपभोक्ताओं से लोड बढ़ाने के पीछे यूपीपीसीएल ने वित्त वर्ष 202526 में ज्यादा बिजली के उपभोग का तर्क दिया है। हालांकि हजारों की तादाद में उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उनके बंद घरों, प्रतिष्ठानों या उपयोग में न चल रहे कनेक्शनों पर भी गुपचुप लोड बढ़ा दिया गया है।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने यूपीपीसीएल द्वारा बिना पूर्व सूचना लगभग 46.79 लाख विद्युत उपभोक्ताओं का स्वीकृत विद्युत भार बढ़ाए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है। परिषद का कहना है कि अब पूरे प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं को संदेश भेजकर यह बताया जा रहा है कि उन्होंने वित्तीय वर्ष 202526 के दौरान अपने स्वीकृत लोड से अधिक भार का उपयोग किया, इसलिए उनका स्वीकृत लोड 1 किलोवाट से 2 किलोवाट अथवा अन्य श्रेणी में बढ़ा दिया गया है।

फैसला टैरिफ आदेश की भावना के खिलाफ

के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह कार्रवाई विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ आदेश की भावना के विपरीत है। टैरिफ आदेश में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी उपभोक्ता का लोड निर्धारित अवधि तक अधिक पाया जाता है तो उसे नियमानुसार पूर्व सूचना देकर स्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए। यदि लगातार तीन माह तक अधिक भार का उपयोग हुआ, तो उसकी जानकारी समय रहते उपभोक्ता को दी जानी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिन लगभग 46.79 लाख उपभोक्ताओं का भार बढ़ाया गया है, उनमें लगभग 50 प्रतिशत स्मार्ट मीटर उपभोक्ता हैं तथा लगभग 25 प्रतिशत ऐसे उपभोक्ता हैं, जिन्हें सरकार की सब्सिडी योजना के अंतर्गत लाइफलाइन विद्युत उपभोक्ता के नाते रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध होती है। ऐसे लाखों गरीब उपभोक्ताओं का भार 1 किलोवाट से 2 किलोवाट किए जाने के कारण उन्हें मिलने वाली सब्सिडी का लाभ स्वतः समाप्त हो रहा है।

कितना बढ़ेगा बिल?

परिषद के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र का गरीब घरेलू उपभोक्ता, जो पहले 1 किलोवाट पर ₹50 फिक्स्ड चार्ज तथा निर्धारित खपत पर लगभग ₹300 का भुगतान करता था, अब 2 किलोवाट होने पर उसे ₹180 फिक्स्ड चार्ज के साथ अधिक ऊर्जा शुल्क देना पड़ेगा। इससे ऐसे उपभोक्ताओं पर औसतन लगभग ₹165 प्रतिमाह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसी प्रकार शहरी गरीब घरेलू उपभोक्ताओं पर भी भारी वित्तीय भार पड़ेगा। जो उपभोक्ता पहले 1 किलोवाट श्रेणी में कम फिक्स्ड चार्ज और रियायती दरों का लाभ प्राप्त कर रहे थे, उनका भार 2 किलोवाट होने पर फिक्स्ड चार्ज एवं ऊर्जा शुल्क दोनों में वृद्धि होगी, जिससे उन पर लगभग ₹435 प्रतिमाह का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

पेनाल्टी वसूलने पर उठ रहे सवाल

परिषद का आरोप है कि देश के ऊर्जा मंत्री ने लोकसभा में अपने लिखित उत्तर में स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं से अधिकतम मांग के आधार पर किसी प्रकार की पेनाल्टी नहीं वसूली जाएगी। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में पहले स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं से पेनाल्टी वसूली गई और अब उसी आधार पर उनका स्वीकृत भार भी बढ़ा दिया गया है। यदि किसी उपभोक्ता से एमडी पेनाल्टी वसूल की गई है, तो उसी आधार पर उसका स्वीकृत भार बढ़ाना पूरी तरह अनुचित एवं दोहरी कार्रवाई है।

परिषद ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए बिना पूर्व सूचना बढ़ाए गए सभी स्वीकृत भारों की समीक्षा कराई जाए, गरीब एवं पात्र उपभोक्ताओं की सब्सिडी यथावत बहाल की जाए तथा जिन उपभोक्ताओं का भार बढ़ाया गया है उन्हें अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर प्रदान किया जाए।