देश में टैक्स देने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. आयकर विभाग के ताजा आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं. भारत में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया ने अब तक के सभी पुराने रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए हैं. मंगलवार को आयकर विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बहुत ही सकारात्मक जानकारी शेयर की. विभाग के मुताबिक असेसमेंट ईयर 202627 के लिए 31 अगस्त 2026 तक 7.8 करोड़ से ज्यादा लोगों ने अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर दिया है. ये आंकड़ा बताता है कि देश के नागरिक अपनी जिम्मेदारी को लेकर कितने सजग हो चुके हैं.

पिछले साल के मुकाबले बड़ा उछाल
अगर हम पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर ज्यादा साफ हो जाती है. असेसमेंट ईयर 202526 के लिए गैरऑडिट मामलों में रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर 2025 थी. उस समय तक कुल 7.3 करोड़ से ज्यादा आईटीआर दाखिल किए गए थे. लेकिन इस बार 31 अगस्त तक ही ये संख्या 7.8 करोड़ के पार पहुंच गई है. इससे साफ पता चलता है कि टैक्सपेयर्स अब आखिरी तारीख का इंतजार करने के बजाय समय से अपना काम पूरा कर रहे हैं.
जुलाई में ही जमा हुए करोड़ों फॉर्म
आयकर विभाग की तरफ से जारी किए गए इन शानदार आंकड़ों में एक खास बात छिपी है. कुल 7.8 करोड़ आईटीआर में से 5.9 करोड़ से ज्यादा आयकर रिटर्न1 से लेकर आयकर रिटर्न2 तो 31 जुलाई की निर्धारित अंतिम तारीख तक ही भरे जा चुके थे. इसके अलावा 31 अगस्त 2026 उन लोगों के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख थी, जिनकी आमदनी किसी कारोबार या पेशे से होती है. ये तारीख उनके लिए थी जिनके खातों का ऑडिट नहीं होता है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। अगर कोई टैक्सपेयर गैरऑडिट श्रेणी में आता है, तो वो अपने हिसाब से आईटीआर3, आईटीआर4, आईटीआर5 या आईटीआर7 दाखिल कर सकता है.
जानिए कौन सा फॉर्म किसके लिए है
इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए विभाग ने अलगअलग फॉर्म तय किए हुए हैं. हर फॉर्म का अपना एक खास इस्तेमाल है. उदाहरण के लिए आईटीआर3 का इस्तेमाल ऐसे लोग करते हैं जिनकी कमाई अपने किसी मालिकाना हक वाले कारोबार या पेशे से होती है. इसमें हिंदू अविभाजित परिवार भी शामिल होते हैं. वहीं छोटे कारोबारियों के लिए आईटीआर4 सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है. ये एक बहुत ही आसान रिटर्न फॉर्म है जिसे छोटे से लेकर मध्यम स्तर के टैक्सपेयर्स इस्तेमाल करते हैं.
कंपनियों से जुड़े मामलों के लिए अलग व्यवस्था की गई है. आईटीआर5 विशेष रूप से लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप से जुड़ी सहकारी समितियों जैसी संस्थाओं के लिए बनाया गया है. कंपनी कानून के तहत रजिस्टर्ड कंपनियों को आईटीआर6 का इस्तेमाल करना होता है. इसके अलावा अगर कोई ट्रस्ट, धार्मिक संस्थान या परमार्थ का काम करने वाली संस्था है, तो उनके लिए आईटीआर7 दाखिल करने का नियम तय किया गया है.



