भारतीय शेयर बाजार के सबसे मजबूत स्तंभ माने जाने वाले बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर इस समय एक बड़े संकट से गुजर रहे हैं. विदेशी निवेशकों यानी FIIs ने भारतीय बैंक शेयरों में ऐसी आक्रामक और बेरहम बिकवाली शुरू की है, जिसे बाजार के विशेषज्ञ एक “नाईटमेयर” करार दे रहे हैं. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी फंड्स भारतीय बैंकिंग और वित्तीय शेयरों से औसतन 1,100 करोड़ प्रतिदिन की रफ्तार से पैसा बाहर निकाल रहे हैं.

इस भारी बिकवाली ने न केवल निफ्टी बैंक को दबाव में ला दिया है, बल्कि बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी की बढ़त पर भी ब्रेक लगा दिया है. बाजार विश्लेषकों और ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस बेरहम बिकवाली के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं. आइए आपको भी इसके बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं…

विदेशी निवेशकों का सबसे पसंदीदा सेक्टर होना

भारतीय शेयर बाजार में FIIs का सबसे ज्यादा पैसा और होल्डिंग हमेशा से बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में रही है. एचडीएफसी बैंक , आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे दिग्गजों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी बहुत अधिक है. ऐसे में जब भी वैश्विक अनिश्चितता या जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण विदेशी निवेशकों को ‘प्रॉफिट बुकिंग’ या कैश की जरूरत होती है, तो वे सबसे पहले बैंकिंग शेयरों को ही बेचते हैं क्योंकि ये बेहद लिक्विड होते हैं.

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर का असर

ग्लोबल लेवल पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसीज और मजबूत होता डॉलर इंडेक्स भारतीय बाजारों के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है. जब अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी निवेशकों के लिए बिना किसी जोखिम के अपने देश में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद हो जाता है. इसी वजह से वे भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड्स की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं.

वैल्युएशन की चिंता और क्रेडिटडिपॉजिट रेशियो का दबाव

भारतीय बैंकिंग सेक्टर वर्तमान में एक अनोखी चुनौती का सामना कर रहा है. बैंकों की लोन वृद्धि तो मजबूत है, लेकिन उसकी तुलना में जमा राशि काफी धीमी गति से बढ़ रही है. इस गैप के कारण बैंकों का क्रेडिटडिपॉजिट रेशियो रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे उनके नेट इंटरेस्ट मार्जिन यानी मुनाफे पर दबाव आने की आशंका है. विदेशी निवेशकों को डर है कि आने वाली तिमाहियों में बैंकों की अर्निंग ग्रोथ धीमी हो सकती है.

बाजार पर क्या हो रहा है असर?

एफआईआई की इस बिकवाली के कारण बैंकिंग इंडेक्स में लगातार ऊपरी स्तरों से सुधार देखा जा रहा है. हालांकि, भारतीय घरेलू संस्थागत निवेशक जैसे म्यूचुअल फंड और एलआईसी इस गिरावट को थामने के लिए आक्रामक रूप से खरीदारी कर रहे हैं. घरेलू निवेशकों के इसी सपोर्ट की वजह से बाजार में बहुत बड़ा क्रैश होने से बच गया है, लेकिन जब तक FIIs की यह रोजाना ₹1,100 करोड़ की बिकवाली नहीं थमती, तब तक बैंक शेयरों में बड़ी तेजी की उम्मीद कम है.