अगर आपकी आय का एकमात्र स्रोत मकान या दुकान का किराया है, तो यह मान लेना सही नहीं होगा कि आपको इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की जरूरत नहीं है. कई मामलों में केवल किराये की आय होने पर भी ITR भरना अनिवार्य हो सकता है.

दरअसल, ITR दाखिल करने की जिम्मेदारी इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी कुल कर योग्य आय कितनी है, न कि आपकी आय के स्रोत कितने हैं. यदि आपकी कुल आय निर्धारित छूट सीमा से अधिक है या आपने कुछ विशेष उच्चमूल्य वाले वित्तीय लेनदेन किए हैं, तो आपको ITR दाखिल करना होगा.

किराये की आय पर कैसे लगता है टैक्स?

रिहायशी या व्यावसायिक संपत्ति से मिलने वाला किराया “हाउस प्रॉपर्टी से आय” की श्रेणी में आता है. मकान मालिक को वित्त वर्ष के दौरान प्राप्त या प्राप्त होने वाले किराये की जानकारी ITR में देनी होती है.

यदि आपकी आय केवल किराये से है, तब भी आपको ITR दाखिल करना होगा, अगर आपकी कर योग्य आय नई कर व्यवस्था में 3 लाख रुपये और पुरानी कर व्यवस्था में 2.5 लाख रुपये की मूल छूट सीमा से अधिक हो जाती है. यह सीमा 60 वर्ष से कम उम्र के सामान्य करदाताओं के लिए लागू है.

किराये की आय पर कौनकौन सी छूट मिलती है?

ITR दाखिल करने से पहले आयकर विभाग कुछ खर्चों की कटौती की अनुमति देता है, जिससे आपकी कर योग्य आय कम हो जाती है. इनमें शामिल हैं.

  • नगर निगम या नगरपालिका कर
  • संपत्ति के रखरखाव और मरम्मत के लिए 30% का स्टैंडर्ड डिडक्शन
  • होम लोन पर चुकाया गया ब्याज के तहत), यदि संपत्ति ऋण लेकर खरीदी गई हो

इन कटौतियों के बाद बची हुई राशि पर टैक्स की गणना की जाती है.

नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में क्या अंतर है?

बीडीओ इंडिया की टैक्स विशेषज्ञ दीपाश्री शेट्टी के अनुसार, किराये की आय दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में कर योग्य है. हालांकि, नई व्यवस्था में यदि हाउस प्रॉपर्टी से नुकसान होता है तो उसे अन्य आय के साथ समायोजित नहीं किया जा सकता, जबकि पुरानी व्यवस्था में यह सुविधा उपलब्ध है.

30% स्टैंडर्ड डिडक्शन कैसे काम करता है?

आयकर कानून के तहत मकान मालिक को संपत्ति के शुद्ध वार्षिक मूल्य पर 30% की निश्चित कटौती मिलती है. इसके लिए वास्तविक खर्च का प्रमाण देना जरूरी नहीं होता. चाहे मरम्मत पर खर्च कम हुआ हो या ज्यादा, कटौती हमेशा 30% ही रहेगी.

कौनसा ITR फॉर्म भरें?

अगर आपकी आय केवल एक मकान से मिलने वाले किराये तक सीमित है और कुल आय 50 लाख रुपये तक है, तो आप ITR1 भर सकते हैं. लेकिन यदि आपकी स्थिति अधिक जटिल है या ITR1 की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तो ITR2 दाखिल करना होगा.

किराये की आय छिपाने पर क्या होगा?

यदि आप किराये की आय होने के बावजूद ITR दाखिल नहीं करते या आय की सही जानकारी नहीं देते, तो आयकर विभाग जुर्माना, ब्याज और जांच की कार्रवाई कर सकता है. इसलिए समय पर और सही जानकारी के साथ ITR दाखिल करना बेहद जरूरी है.

वित्त वर्ष 202526 के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है. समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करने पर आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत जुर्माना भी लग सकता है.