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Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में आज यानी गुरुवार, 8 अक्टूबर को बिकवाली का दबाव बढ़ गया। ये लगातार दूसरा दिन रहा जब बाजार की शुरुआत लाल निशान में हुई। शुरुआती कारोबार में मामूली गिरावट के साथ खुले घरेलू इंडेक्स कुछ ही देर में और नीचे चले गए। निवेशकों के बीच रिजर्व बैंक की सख्त मौद्रिक नीति, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली को लेकर चिंता बढ़ी है।

इसका असर व्यापक बाजार पर भी दिखा, जहां निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 0.8% तक टूट (Stock Market Falls) गए। इस गिरावट की वजह से बीएसई का मार्केट कैप एक दिन में 6.48 लाख करोड़ रुपये तक कम हो गया। आइए विस्तार से बताते हैं इस गिरावट की तमाम वजहों में से कुछ।

RBI का सख्त रुख बना पहली चिंता

बाजार में दबाव की सबसे बड़ी घरेलू वजह RBI की हालिया मौद्रिक नीति है। केंद्रीय बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया। करीब चार साल बाद हुई यह पहली दर बढ़ोतरी अपने आप में बाजार के लिए बड़ा संकेत थी। लेकिन निवेशकों की चिंता सिर्फ दर बढ़ने से नहीं बढ़ी। RBI ने अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया।

इससे बाजार में यह आशंका मजबूत हुई है कि ऊंची ब्याज दरों का दौर कुछ समय तक जारी रह सकता है और महंगाई पर दबाव बना रहने की स्थिति में आगे भी सख्ती देखने को मिल सकती है। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। ऊंची दरों का असर कंपनियों की फंडिंग लागत, निवेश और भविष्य की कमाई की उम्मीदों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि RBI के फैसले के बाद इक्विटी बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी।

100 डॉलर के पार क्रूड

दूसरा बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों से आया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुका है और शुरुआती कारोबार में यह 102 डॉलर के आसपास भी पहुंच गया। पश्चिम एशिया और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने तेल बाजार में चिंता बढ़ाई है। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल इसलिए अहम है क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है।

तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर भी दबाव आ सकता है। इसके अलावा महंगा ईंधन अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव बढ़ा सकता है। यानी एक तरफ RBI पहले ही महंगाई को लेकर सख्त रुख अपना चुका है और दूसरी तरफ Crude में तेजी महंगाई की चिंता को और बढ़ा रही है। बाजार के लिए यह संयोजन सकारात्मक नहीं माना जा रहा।

FII की लगातार बिकवाली ने बढ़ाई मुश्किल

बाजार पर तीसरा बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की लगातार बिकवाली का है। 7 अक्टूबर को शुरुआती एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 6,121.40 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की है। यह उनकी लगातार 9वीं बिकवाली रही।

इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने करीब 4,596.57 करोड़ रुपये की खरीदारी की। घरेलू निवेशकों का सपोर्ट जरूर मिला, लेकिन विदेशी पूंजी की लगातार निकासी बाजार के सेंटीमेंट पर भारी पड़ रही है। इसके साथ रुपये की कमजोरी ने भी चिंता बढ़ाई है।

IT शेयरों ने दी बाजार को थोड़ी राहत

हालांकि पूरे बाजार में बिकवाली देखने को मिली, लेकिन IT सेक्टर इस रुझान से अलग रहा। सेक्टर में करीब 1.8 फीसदी की तेजी रही। TCS का शेयर करीब 2.5 फीसदी चढ़ा। कंपनी के सितंबर तिमाही के नतीजे आने से पहले IT शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इसके बावजूद तस्वीर व्यापक रूप से कमजोर रही। 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में से 14 लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। यानी दबाव सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं था, बल्कि बाजार के बड़े हिस्से में बिकवाली देखने को मिली।

कितना हुआ निवेशकों का नुकसान?

आज भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,71,05,937 करोड़ से घटकर 4,64,58,422.16 करोड़ रुपये पर आ गया। इस बिकवाली की वजह से निवेशकों को एक ही दिन में 6,47,514.84 करोड़ (लगभग 6.48 लाख करोड़ रुपये) का भारी नुकसान उठाना पड़ा।

कितना नीचे गया निफ्टी-सेंसेक्स?

गुरुवार को निफ्टी 22,599 के आसपास गैप-डाउन खुला। कारोबार के दौरान यह 22,419 तक फिसला और 22,599 इसका शुरुआती कारोबारी हाई रहा। सेंसेक्स पिछली बार 72,638 पर बंद हुआ था और 72,668 पर खुलने के बाद 72,694 तक गया, लेकिन बाद में फिसलकर 72,113 के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। यानी इंट्राडे में निफ्टी तकरीबन 185 अंक टूटकर ट्रेड करने लगा था वहीं, सेंसेक्स तकरीबन 525 अंकों की गिरावट के साथ दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया था। यानी शुरुआती मजबूती टिक नहीं पाई और बिकवाली ने बाजार पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली।