सरकार ने रक्षा सामान के एक्सपोर्ट से जुड़े नियमों को आसान कर दिया है. रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने डिफेंस एक्सपोर्ट SOP और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस के नियमों में कई बड़े बदलाव किए हैं. इनका मकसद भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए ग्लोबल मार्केट में एंट्री आसान करना और एक्सपोर्ट की प्रोसेस को तेज करना है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में किए गए इन बदलावों से कंपनियों की पेपरवर्क और बारबार अप्रूवल लेने की जरूरत कम होगी. OGEL की वैलिडिटी भी 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी गई है, जबकि इसका दायरा 41 देशों से बढ़ाकर लगभग सभी देशों तक कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि इससे भारतीय डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स, खासकर MSME, को इंटरनेशनल टेंडर, एग्ज़िबिशन और ग्लोबल बिजनेस के मौकों का फायदा उठाने में आसानी होगी.
रक्षा निर्यात SOP
ज्यादातर मामलों में नॉनलीथल डिफेंस आइटम्स के एक्सपोर्ट के लिए स्टेकहोल्डर्स से कंसल्टेशन की जरूरत खत्म कर दी गई है. हालांकि, सेंसिटिव देशों के लिए जरूरी सेफ्टी मेजर्स बनाए रखे गए हैं. इंटरनेशनल टेंडर्स और एग्ज़िबिशन के लिए सभी आइटम्स के एक्सपोर्ट के मामले में भी स्टेकहोल्डर्स से कंसल्टेशन की जरूरत हटा दी गई है. इससे भारतीय कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स को ग्लोबल मार्केट में तेजी से दिखा सकेंगी और इंटरनेशनल बिजनेस के मौकों का फायदा उठा सकेंगी.
OGEL फ्रेमवर्क
OGEL एक परमानेंट वनटाइम एक्सपोर्ट ऑथराइजेशन है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। इसके तहत पात्र एक्सपोर्टर्स को हर शिपमेंट के लिए अलग से परमिशन लेने की जरूरत नहीं होती. वे तय डिफेंस आइटम्स की कई शिपमेंट्स के लिए खुद एक्सपोर्ट ऑथराइजेशन जारी कर सकते हैं. इससे बारबार होने वाली पेपरवर्क और दूसरी प्रोसीजरल जरूरतें कम होती हैं.
प्रमुख प्लेटफॉर्म और इक्विपमेंट, पार्ट्स और कंपोनेंट्स और कंपनी के अंदर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से जुड़े तीन मौजूदा OGEL SOP को एक सिंगल OGEL SOP में मिला दिया गया है. इससे एक्सपोर्टर्स को एक कॉमन और आसान फ्रेमवर्क मिलेगा. OGEL की वैलिडिटी 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी गई है. इससे रिन्यूअल और उससे जुड़ी कंप्लायंस जरूरतों की फ्रीक्वेंसी कम होगी. OGEL का दायरा 41 देशों से बढ़ाकर सभी देशों तक कर दिया गया है. हालांकि, सेंसिटिव कैटेगरी वाले देशों और उन देशों को इससे बाहर रखा गया है, जिन पर UN सिक्योरिटी काउंसिल के सैंक्शंस या आर्म्स एम्बार्गो लागू हैं.
इन कंपनियों को भी होगा फायदा
एक नया प्रोविजन उन भारतीय कंपनियों को भी सुविधा देगा, जिनका विदेशी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स के साथ लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट या एग्रीमेंट है. तय शर्तों के तहत, पात्र आइटम्स और खास FOEM के लिए OGEL दिया जा सकता है. इसकी वैलिडिटी संबंधित कॉन्ट्रैक्ट या एग्रीमेंट की अवधि के हिसाब से होगी. OGEL के तहत आने वाले आइटम्स का दायरा भी बढ़ाया गया है. इससे पात्र एक्सपोर्टर्स को ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी. संशोधित फ्रेमवर्क छोटे कैलिबर के हथियारों और प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट के कुछ खास पार्ट्स और कंपोनेंट्स के सिविलएंडयूज एक्सपोर्ट की भी अनुमति देता है. इससे वैध इंटरनेशनल बिजनेस के मौकों का दायरा और बढ़ेगा.
डिफेंस एक्सपोर्ट में तेजी की उम्मीद
ये बदलाव भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट सिस्टम को ज्यादा व्यापक और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं. इससे रोजमर्रा की पेपरवर्क कम होगी, जबकि सेंसिटिव आइटम्स, टेक्नोलॉजी और डेस्टिनेशन के लिए जरूरी सेफ्टी मेजर्स बने रहेंगे. उम्मीद है कि इन बदलावों से भारतीय डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स, खासकर MSME, को फायदा होगा. कंपनियां इंटरनेशनल टेंडर्स और एग्ज़िबिशन में तेजी से हिस्सा ले पाएंगी, बड़े ग्लोबल मार्केट तक पहुंच बना पाएंगी और बारबार अलगअलग अप्रूवल लेने की जरूरत कम होगी. डिफेंस प्रोडक्शन के 1.78 लाख करोड़ रुपये के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने और FY 202526 में डिफेंस एक्सपोर्ट के 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े को छूने के साथ, ये बदलाव भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट इकोसिस्टम की ग्रोथ को और तेज कर सकते हैं.



