भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है. सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 202526 में देश का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट बढ़कर ₹4.24 लाख करोड़ हो गया है. यह आंकड़ा 201415 के मुकाबले करीब 11 गुना ज्यादा है. इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है.

सरकार के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े पूरे इकोसिस्टम में महिलाओं की हिस्सेदारी अब करीब 30% हो गई है. वहीं मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 70% बताई गई है.
भारत की डिजिटल इकोनॉमी भी लगातार बड़ी हो रही है. अब इसका देश की GDP में योगदान करीब 14% तक पहुंच गया है. सरकार का कहना है कि PLI यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और मॉडिफाइड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स जैसी योजनाओं से देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को बढ़ावा मिला है.
इलेक्ट्रॉनिक्स बना भारत का बड़ा एक्सपोर्ट सेक्टर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कैटेगरी बन गया है. वित्त वर्ष 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 47.96 अरब डॉलर तक पहुंच गया था. 201415 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट करीब ₹38,000 करोड़ था.। अब यह बढ़कर ₹4.24 लाख करोड़ हो गया है. यानी करीब 11 साल में इसमें कई गुना बढ़ोतरी हुई है. मोबाइल फोन ने इस ग्रोथ में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है. भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर बन चुका है.
मोबाइल फोन बना भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट प्रोडक्ट
मोबाइल फोन एक्सपोर्ट में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. 201415 में मोबाइल फोन भारत का 153वां सबसे बड़ा एक्सपोर्ट आइटम था. अब यह देश का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट प्रोडक्ट बन गया है. मोबाइल फोन का उत्पादन भी 201415 के ₹18,000 करोड़ से बढ़कर 202526 में ₹6.27 लाख करोड़ हो गया. इसी समय में मोबाइल फोन का एक्सपोर्ट करीब 165 गुना बढ़कर ₹2.59 लाख करोड़ हो गया. 201415 में यह सिर्फ ₹1,500 करोड़ था. मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने करीब 12 लाख नौकरियां भी पैदा की हैं. खास बात यह है कि मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में करीब 70% कर्मचारी महिलाएं हैं. इससे देश में महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बढ़े हैं.
इंटरनेट यूजर्स की संख्या भी तेजी से बढ़ी
भारत में सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग ही नहीं, बल्कि डिजिटल कनेक्टिविटी में भी बड़ा बदलाव आया है. मार्च 2026 तक देश में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 109.2 करोड़ से ज्यादा हो गई. 2014 में यह करीब 25.15 करोड़ थी. यानी करीब चार गुना से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है. इंटरनेट डेटा की कीमत में भी बड़ी गिरावट आई है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। 2014 में एक GB वायरलेस डेटा की औसत कीमत करीब ₹308 थी. 2026 में यह घटकर सिर्फ ₹7.51 प्रति GB रह गई है. इससे आम लोगों के लिए इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल काफी सस्ता हुआ है.



