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बरनाला: पंजाब के बरनाला जिले के विधानसभा हलका भदौड़ के गांव कालेके में रविवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया। गांव के तालाब में डूबने से 30 वर्षीय युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान हरदीप सिंह पुत्र काला सिंह के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि हरदीप एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखता था और दिहाड़ी मजदूरी करके अपने परिवार का गुजर-बसर करता था।

हादसे की वजह भी बेहद चौंकाने वाली बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक हरदीप अपने चाचा के साथ काम पर जा रहा था। इसी दौरान उसकी नजर गांव के तालाब में तैरते हुए एक गैस सिलेंडर पर पड़ी। सिलेंडर को तालाब से बाहर निकालने के इरादे से वह पानी में उतर गया। लेकिन कुछ ही देर बाद वह तालाब के अंदर मौजूद दलदल में फंस गया और देखते ही देखते पानी में डूब गया।

हरदीप के चाचा ने उसे बचाने के लिए काफी आवाजें लगाईं और अपने स्तर पर उसे निकालने का प्रयास भी किया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण तालाब के पास पहुंच गए। लोगों ने काफी देर तक युवक की तलाश और उसे बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तालाब की गहराई और दलदली जमीन के कारण रेस्क्यू में मुश्किल आती रही।

एक सिलेंडर के लिए तालाब में उतरा था हरदीप

बताया जा रहा है कि हरदीप सिंह रोज की तरह काम पर जाने के लिए अपने चाचा के साथ निकला था। रास्ते में गांव के तालाब के पास उसे पानी में कुछ तैरता हुआ दिखाई दिया। पास जाकर देखने पर वह गैस सिलेंडर जैसा नजर आया।

ग्रामीणों के मुताबिक हरदीप ने सिलेंडर को बाहर निकालने के लिए तालाब में उतरने का फैसला किया। शायद उसे अंदाजा नहीं था कि तालाब के अंदर जमीन इतनी दलदली हो सकती है। जैसे ही वह आगे बढ़ा, उसका पैर दलदल में फंस गया।

हरदीप ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन दलदल ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया। उसके चाचा ने शोर मचाया और आसपास के लोगों से मदद मांगी। कुछ ही देर में वहां ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई, लेकिन पानी के अंदर उतरकर युवक को बचाने की कोशिश करना जोखिम भरा था।

देखते ही देखते हरदीप पानी में डूब गया।

चाचा ने बचाने की भरपूर कोशिश की

हादसे के दौरान हरदीप के चाचा ने उसे बाहर आने के लिए आवाज लगाई। उन्होंने अपनी तरफ से बचाने की कोशिश भी की, लेकिन तालाब की स्थिति ऐसी थी कि तत्काल उसे बाहर निकालना संभव नहीं हो सका।

ग्रामीणों ने भी रस्सियों और दूसरे साधनों की मदद से युवक को तलाशने की कोशिश की। पंचायत और गांव के युवाओं ने ट्रैक्टरों तथा रस्सियों का इस्तेमाल करते हुए तालाब से शव बाहर निकालने का प्रयास किया।

लेकिन काफी कोशिशों के बावजूद सफलता नहीं मिली। तालाब में दलदल होने के कारण रेस्क्यू अभियान और मुश्किल हो गया।

घटना के बाद तालाब के आसपास बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव में मातम का माहौल बन गया।

सुबह 8:30 बजे हादसा, तीन घंटे तक प्रशासन का इंतजार

इस हादसे को लेकर मृतक के परिवार और ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि हादसा सुबह करीब 8:30 बजे हुआ था, लेकिन इसके बाद भी तीन घंटे से ज्यादा समय तक कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

परिजनों का कहना है कि हादसे के तुरंत बाद प्रशासन और संबंधित बचाव दल को सूचना दी गई थी। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। इसके बावजूद काफी देर तक उन्हें सरकारी मदद का इंतजार करना पड़ा।

इस दौरान ग्रामीण अपने स्तर पर युवक को तालाब से बाहर निकालने की कोशिश करते रहे। लोगों ने रस्सियों और ट्रैक्टरों की मदद ली, लेकिन तालाब की गहराई और दलदल के कारण रेस्क्यू सफल नहीं हो सका।

परिवार का कहना है कि अगर प्रशासनिक या रेस्क्यू टीम समय रहते मौके पर पहुंचती तो युवक को बचाने की कोशिश और बेहतर तरीके से की जा सकती थी। हालांकि यह निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है कि समय पर टीम पहुंचने से हरदीप की जान बच जाती। इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

निजी रेस्क्यू टीम को बुलाना पड़ा

जब काफी समय बीत गया और सरकारी स्तर पर मदद नहीं पहुंची, तो ग्रामीणों ने अपने स्तर पर निजी रेस्क्यू टीम से संपर्क किया।

इसके बाद बंटी सिंह की रेस्क्यू टीम को गांव बुलाया गया। बताया जा रहा है कि टीम करीब 11 बजे कालेके गांव पहुंची। इसके बाद टीम ने तालाब में रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

करीब आधे घंटे की कोशिश के बाद रेस्क्यू टीम ने हरदीप सिंह के शव को तालाब से बाहर निकाल लिया।

शव बाहर निकलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। जिस युवक के साथ कुछ देर पहले तक काम पर जाने की बात हो रही थी, उसकी मौत की खबर ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया।

गरीब परिवार का सहारा था हरदीप

हरदीप सिंह का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर बताया जा रहा है। उसकी मां का पहले ही निधन हो चुका था। वह अपने पिता काला सिंह और भाई कुलदीप सिंह के साथ रहता था।

हरदीप दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार के खर्च में मदद करता था। परिवार के लिए उसकी मौत सिर्फ एक बेटे या भाई को खोना नहीं है, बल्कि घर के एक महत्वपूर्ण सहारे का चले जाना भी है।

हादसे के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर भी चिंता पैदा हो गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से परिवार की मदद करने की मांग की है।

तालाब की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद गांव के तालाब की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब के आसपास चारदीवारी या पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं है

लोगों का आरोप है कि तालाब खुला होने के कारण कभी भी कोई व्यक्ति या बच्चा इसके पास पहुंच सकता है। अगर तालाब में गहराई और दलदल जैसी स्थिति है तो वहां चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या अन्य सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को हादसे के बाद सिर्फ रेस्क्यू तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए भी ठोस कदम उठाने चाहिए।

खास तौर पर गांव के तालाबों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। तालाब में दलदल होने की स्थिति में लोगों को उसके आसपास जाने से रोकने के लिए चेतावनी और घेराबंदी की व्यवस्था की जा सकती है।

सुखविंदर सिंह कालेके ने भी उठाए सवाल

लोक जनशक्ति पार्टी के एससी मोर्चा पंजाब के प्रधान सुखविंदर सिंह कालेके ने भी हादसे के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे के कई घंटे बाद तक प्रशासनिक अधिकारियों का मौके पर नहीं पहुंचना गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना है कि ग्रामीणों को अपने स्तर पर रेस्क्यू टीम बुलानी पड़ी।

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की जांच की जाए और यह देखा जाए कि सूचना मिलने के बाद संबंधित अधिकारी या रेस्क्यू व्यवस्था मौके पर समय पर क्यों नहीं पहुंच सकी।

साथ ही उन्होंने तालाब के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई।

एक हादसे ने कई सवाल छोड़ दिए

कालेके गांव की यह घटना कई सवाल छोड़ गई है। पहला सवाल यह है कि तालाब में गैस सिलेंडर कैसे पहुंचा और वह वहां क्यों तैर रहा था। दूसरा सवाल यह है कि तालाब के अंदर दलदल की स्थिति कितनी गंभीर थी। तीसरा और सबसे बड़ा सवाल तालाब के आसपास सुरक्षा इंतजामों को लेकर है।

अगर ग्रामीणों के आरोप सही हैं कि तालाब के चारों तरफ पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं है, तो प्रशासन को इसकी समीक्षा करनी चाहिए। गांवों में खुले तालाब अक्सर बच्चों, पशुओं और ग्रामीणों के लिए खतरा बन सकते हैं।

इस हादसे में भी एक छोटी सी घटना—तालाब में तैरता दिखाई दिया गैस सिलेंडर—ने एक परिवार का जवान बेटा छीन लिया।

परिवार को अब मदद का इंतजार

हरदीप सिंह की मौत के बाद उसके परिवार के सामने आर्थिक और भावनात्मक दोनों तरह का संकट खड़ा हो गया है। पिता काला सिंह और भाई कुलदीप सिंह के लिए यह बेहद मुश्किल समय है।

ग्रामीणों की मांग है कि सरकार और प्रशासन परिवार की आर्थिक मदद करे। साथ ही गांव के तालाब की सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल बेहतर बनाया जाए ताकि भविष्य में कोई और व्यक्ति ऐसी दुर्घटना का शिकार न हो।

फिलहाल हरदीप की मौत ने पूरे गांव को गम में डुबो दिया है। जिस तालाब के किनारे रविवार सुबह तक ग्रामीण सामान्य रूप से आते-जाते थे, वहीं कुछ घंटों बाद रेस्क्यू अभियान चल रहा था और एक परिवार अपने जवान बेटे की मौत पर विलाप कर रहा था।

एक तैरते हुए गैस सिलेंडर को बाहर निकालने की कोशिश से शुरू हुई यह घटना आखिरकार 30 साल के हरदीप सिंह की जिंदगी पर भारी पड़ गई। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस हादसे से सबक लेकर तालाब की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाता है।