उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के शंभुपुर गांव में हुए सनसनीखेज ट्रिपल मर्डर मामले के पीछे करीब सात साल पुराना एक खौफनाक इतिहास और पारिवारिक रंजिश जुड़ी हुई थी। इस घटना की नींव वर्ष 2019 में पड़ी थी, जब आरोपी अरविंद सिंह के सगे भाई सुनील सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सुनील सिंह मुंबई में बालासाहेब ठाकरे के पीआरओ रह चुके थे। उस हत्याकांड में अरविंद के चचेरे भाई मनीष का नाम सामने आया था और उसे जेल भी जाना पड़ा था।

सुनील सिंह की पत्नी के भाई सूरज सिंह के अनुसार, परिवार में विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब सुनील को अपनी पत्नी और आरोपी मनीष के बीच कथित प्रेम संबंध की जानकारी मिली थी। इसके बाद सुनील ने मनीष के खिलाफ चोरी, छिनैती और छेड़खानी जैसे कई मुकदमे दर्ज कराए थे। इन मामलों में अदालत से मनीष और अवनीश को सजा भी हुई थी। आगे चलकर वर्ष 2019 में जब वे जमानत पर बाहर आए, तब सुनील सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हत्या के बाद दोनों को दोबारा सलाखों के पीछे जाना पड़ा। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। परिवार के लोगों का कहना है कि मनीष और अवनीश घटना से करीब डेढ़ महीने पहले ही जेल से छूटकर बाहर आए थे, जिसके बाद से पुराने तनाव और रंजिश ने पूरे परिवार को मानसिक रूप से परेशान कर रखा था।

इसी मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह के बीच अरविंद की पत्नी बबिता और उसकी मां ने कुछ पंडितों से संपर्क किया। परिजनों के मुताबिक, पंडितों ने दावा किया कि मृत सुनील सिंह की आत्मा परिवार को परेशान कर रही है, जिसके निवारण के लिए घर में एक विशेष पूजापाठ कराने का निर्णय लिया गया। सोमवार से घर में अनुष्ठान चल रहा था, लेकिन अरविंद इस बात से खुश नहीं था और उसने पंडितों को अगले दिन घर न आने की सख्त चेतावनी भी दी थी। इसके बावजूद जब मंगलवार की शाम वह बाजार से अपने घर लौटा और वहां पूजापाठ होते देखा, तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

गुस्से में आकर अरविंद ने पूजा करा रहे पंडितों के साथ अभद्रता की और उनसे उनके पहचान पत्र की मांग करने लगा। जब उसकी पत्नी बबिता ने इस बात का विरोध किया, तो पतिपत्नी के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। परिजनों का आरोप है कि विवाद के दौरान अरविंद ने अपनी पत्नी से कहा कि उसी के चक्कर में उसके भाई सुनील की जान गई थी और अब वह यह सब ड्रामा कर रही है। देखते ही देखते यह घरेलू कलह और कहासुनी एक खूनी संघर्ष में बदल गई, और गुस्से में अंधे हुए अरविंद ने अपनी पत्नी और पूजा करा रहे पुजारियों पर गोलियां चलाकर उनकी हत्या कर दी। अंत में इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाला आरोपी अरविंद खुद भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। यह पूरी घटना पुराने विवाद और अंधविश्वास के मिलेजुले असर का एक डरावना परिणाम साबित हुई।