किसी भी दुकान में बीयर या शराब की बोतलों पर नजर डालेंगे तो पाएंगे ये ज्यादातर भूरी या हरी मिलेंगी. वाइन की बोतलें अक्सर गहरे हरे रंग की होती हैं, जबकि वोदका और जिन पारदर्शी बोतलों में बिकती हैं. यह सिर्फ डिजाइन और पैकिंग का मामला नहीं है. इसके पीछे विज्ञान, इतिहास और कारोबार, तीनों की भूमिका है. जाने, क्या है इसकी सही कारण.

रोशनी बीयर की दुश्मन… बीयर का सबसे बड़ा दुश्मन सूरज या तेज कृत्रिम रोशनी है. बीयर में हॉप्स से आने वाले कुछ रासायनिक यौगिक और विटामिन B2 होते हैं. रोशनी, खासकर अल्ट्रावायलेट और नीलीबैंगनी किरणों के संपर्क में आने पर ये आपस में प्रतिक्रिया करते हैं. इससे एक सल्फर यौगिक बनता है, जिसकी गंध तीखी होती है. इसे “लाइटस्ट्रक” या “स्कंक्ड” बीयर कहा जाता है. तेज धूप में यह बदलाव बहुत कम समय में शुरू हो सकता है.
भूरी बोतल क्यों… वाइन में भी रोशनी से स्वाद बिगड़ सकता है. खासकर हल्की और स्पार्कलिंग वाइन में इसका असर ज्यादा देखा जाता है. कांच का रंग उसमें मिलाए गए खनिजों से तय होता है. भूरे कांच में आयरन, सल्फर और कार्बन जैसे तत्वों का इस्तेमाल होता है. यह कांच नुकसानदेह यूवी किरणों और नीलीबैंगनी रोशनी के बड़े हिस्से को रोक लेता है. इसलिए बीयर के लिए भूरी बोतल सबसे भरोसेमंद विकल्प मानी जाती है.
हरी बोतल क्यों… इसकी जड़ें इतिहास में हैं. पुराने समय में कांच की रेत में प्राकृतिक रूप से लोहे की अशुद्धियां होती थीं, इसलिए कांच अक्सर हल्का हरा बनता था. आयरन ऑक्साइड और क्रोमियम जैसे तत्वों से इसे गहरा हरा रंग दिया जा सकता है. हरा कांच कुछ हद तक यूवी किरणों को रोकता है, लेकिन भूरे जितना असरदार नहीं होता. इसलिए हरी बोतल में रखी बीयर में स्कंक जैसी गंध का खतरा ज्यादा रहता है. फिर भी कई ब्रांड हरी बोतल को अपनी पहचान बना चुके हैं और इसे बदलना नहीं चाहते.
वोदका पारदर्शी सामान्य बोतलोंं में क्यों… बोतलों के पारदर्शी या रंगीन होने का कारण उनके अंदर के तरल पदार्थ की संवेदनशीलता है. वोदका रंगहीन पेय है और प्रकाश से जल्दी खराब नहीं होता. पारदर्शी बोतल इनकी शुद्धता और साफसुथरे रूप को दर्शाती है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। यही वजह है कि इन्हें आमतौर पर ट्रांसपेरेंट या सामान्य रंग की बोतलों में पैक किया जाता है.



