UP Gen Alpha protest : दिल्ली के जंतरमंतर पर GenZ के आंदोलन के बाद अब उत्तर प्रदेश में स्कूली छात्रछात्राएं भी अपनी समस्याओं को लेकर खुलकर आवाज उठा रहे हैं। मंगलवार को हमीरपुर में 9वीं से 12वीं तक पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चों ने खराब सड़क के विरोध में कलेक्ट्रेट का रुख किया। हाथों में तिरंगा लेकर पहुंचे बच्चों ने डीएम कार्यालय में जाने की कोशिश की। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद छात्र कलेक्ट्रेट गेट पर ही धरने पर बैठ गए।

मामला कुरारा ब्लॉक की ग्राम पंचायत चंदूपुर और उससे जुड़े करीब आधा दर्जन डेरों की सड़क से जुड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी यह सड़क बारिश के बाद पूरी तरह कीचड़ और दलदल में बदल गई है। इससे बच्चों का स्कूल जाना और ग्रामीणों का रोजमर्रा का आवागमन मुश्किल हो गया है।

रास्ते में रोकने पहुंची पुलिस, लेकिन कलेक्ट्रेट तक पहुंच गए बच्चे

मंगलवार सुबह चंदूपुर और आसपास के डेरों से बड़ी संख्या में छात्रछात्राएं और ग्रामीण सड़क निर्माण की मांग को लेकर निकल पड़े। सभी हाथों में तिरंगा लिए कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ रहे थे। प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही एसडीएम सदर अभिषेक कुमार और सीओ यशपाल सिंह पुलिस बल के साथ प्रदर्शनकारियों को रोकने पहुंचे। हालांकि, प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते हुए कलेक्ट्रेट पहुंच गए। यहां बच्चों ने डीएम कार्यालय में जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस और अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद छात्रछात्राएं कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर ही बैठ गए और सड़क निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

बारिश में सड़क बनी मुसीबत, स्कूल जाना भी मुश्किल

कुरारा ब्लॉक की ग्राम पंचायत चंदूपुर यमुना पट्टी में स्थित है। यहां चंदूपुर के साथ कई डेरों में करीब 3 हजार लोगों की आबादी रहती है। इन इलाकों को जोड़ने वाली सड़क अभी भी कच्ची है। बारिश शुरू होते ही इस रास्ते पर कीचड़ और पानी भर जाता है। ऐसे में बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक, पहले लोग सिटी फॉरेस्ट से होकर एक वैकल्पिक रास्ते का इस्तेमाल करते थे, लेकिन वन विभाग ने उस रास्ते को भी बंद कर दिया। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।

3 जुलाई को भी हुआ था प्रदर्शन

सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीण और स्कूली बच्चे इससे पहले 3 जुलाई को भी कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उस समय प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने सड़क पर जलभराव की सफाई कराकर मिट्टी डलवाई थी। हालांकि, बारिश के बाद मिट्टी बह गई और सड़क एक बार फिर कीचड़ में बदल गई। ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी मरम्मत से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। अब उन्हें पक्की सड़क की जरूरत है।

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इन डेरों के लोग प्रभावित

इस सड़क से ब्रह्मा का डेरा, बनवासी का डेरा, अठभइयन का डेरा, बच्ची का डेरा, भिखुआ का डेरा, गुसाई बाबा का डेरा और गंगवा का डेरा जुड़े हैं। इन डेरों में अलगअलग संख्या में लोग रहते हैं। ग्रामीणों के लिए यही रास्ता मुख्य आवागमन का जरिया है। बारिश के दौरान सड़क की हालत खराब होने से सिर्फ बच्चों की पढ़ाई ही प्रभावित नहीं हो रही, बल्कि मरीजों को अस्पताल ले जाने और रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। अब बच्चों और ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन इस बार अस्थायी मिट्टी भराई के बजाय सड़क का स्थायी निर्माण कराए, ताकि हर बारिश में उन्हें इसी समस्या का सामना न करना पड़े।

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