इन दिनों चीन के सस्ते माल की डंपिंग से कई भारतीय कंपनियों का खेल बिगड़ रहा है. खासतौर पर एग्रोकेमिकल्स और फ्लोरोकेमिकल्स जैसे सेक्टर की कंपनियों के मुनाफे और ऑर्डर बुक पर भारी दबाव साफ देखा जा सकता है. लेकिन, इस मुश्किल दौर में भी दो घरेलू कंपनियां मजबूती से खड़ी हैं. निट्टा जिलेटिन इंडिया और नर्मदा जिलेटिन्स चीन की इस चुनौती को मात देते हुए न सिर्फ अपना दबदबा बनाए हुए हैं, बल्कि इनकी बैलेंस शीट भी बेहद शानदार नजर आ रही है. जिलेटिन मैन्युफैक्चरिंग जैसे खास सेक्टर में काम करने वाली इन कंपनियों का रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉयड इंडस्ट्री के औसत से काफी ज्यादा है.

ड्रैगन की डंपिंग इस कारोबार में बेअसर

फार्मा और फूड सप्लाई चेन में सस्ते चीनी माल का दखल आम बात है. मगर जिलेटिन कारोबार की कहानी बिल्कुल अलग है. इस इंडस्ट्री में उतरना किसी नई कंपनी के लिए इतना आसान नहीं है. कड़े क्वालिटी सर्टिफिकेशन, मुश्किल रेगुलेटरी अप्रूवल के साथसाथ कच्चे माल की सीमित उपलब्धता इसे एक सुरक्षित किला बनाते हैं. यही वजह है कि चीन की सस्ती सप्लाई भी इस किले को भेद नहीं पा रही है और भारतीय कंपनियां बिना किसी बड़े विदेशी खतरे के अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने में कामयाब हो रही हैं.

निट्टा जिलेटिन के मुनाफे का गणित

साल 1975 में शुरू हुई निट्टा जिलेटिन आज देश में जिलेटिन, ओसिन और कोलेजन पेप्टाइड बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है. फार्मा और फूड इंडस्ट्री के अलावा यह कंपनी पोल्ट्री फीड के लिए डाईकैल्शियम फॉस्फेट बनाती है. कंज्यूमर मार्केट में इनका ‘वेलनैक्स’ ब्रांड भी मौजूद है. केरल सरकार और जापान की निट्टा जिलेटिन इंक की 75 फीसदी संयुक्त हिस्सेदारी वाली इस कंपनी ने पिछले पांच सालों में मुनाफे का शानदार रिकॉर्ड बनाया है. भले ही इसकी सेल्स ग्रोथ सालाना 8 फीसदी की रफ्तार से बढ़कर 588 करोड़ रुपये तक पहुंची हो, लेकिन इसका नेट प्रॉफिट तेजी से भागा है. 18 करोड़ का मुनाफा 41 फीसदी की सालाना दर से उछलकर 97 करोड़ रुपये हो गया है. ऑपरेटिंग मार्जिन 11 फीसदी से बढ़कर 23 फीसदी हो चुका है. कर्ज के नाम पर महज 4 करोड़ रुपये हैं, जिससे यह लगभग डेटफ्री है. 27 फीसदी का शानदार ROCE इसे इंडस्ट्री में सबसे अलग बनाता है.

नर्मदा जिलेटिन्स की दमदार बैलेंस शीट

मध्य प्रदेश के जबलपुर से ऑपरेट करने वाली नर्मदा जिलेटिन्स की शुरुआत 1969 में हुई थी. महज 286 करोड़ रुपये के मार्केट कैप और 75 फीसदी प्रमोटर होल्डिंग वाली यह कंपनी भी अपने सेक्टर में मजबूत पकड़ रखती है. पिछले पांच सालों में इसकी बिक्री 135 करोड़ से बढ़कर 215 करोड़ रुपये हो गई है. वहीं, नेट प्रॉफिट 8 करोड़ रुपये से छलांग लगाकर 28 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. 28 फीसदी का दमदार ROCE और 41 करोड़ रुपये का तगड़ा इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो इसकी वित्तीय सेहत को बयां करता है. कंपनी के ऊपर सिर्फ 8 करोड़ रुपये का कर्ज है. साथ ही, इंडस्ट्री औसत को पछाड़ते हुए यह 2.2 फीसदी का डिविडेंड यील्ड भी दे रही है. मुनाफे में उछाल के चलते कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन भी 6 फीसदी से सुधरकर 19 फीसदी पर आ गया है.

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