भर-भराकर गिरेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम! जुलाई के बाद बस इतनी रह जाएगी तेल की कीमत….

Fitch on Crude Oil: बीते 100 दिनों से अगर किसी चीज की सबसे ज्यादा तर्चा हो रही है, तो वो कच्चा तेल है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद से विश्व के अधिकांश देश तेल संकट का सामना कर रहे हैं. ग्लोबल मार्केट में जो कच्चा तेल 70-75 डॉलर प्रति बैरल के बिक रहा था, आज वो 100-120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुका है. तेल की कीमत और उसकी सप्लाई दोनों संकट में हैं. ऐसे में ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग ( Fitch Rating) ने तेल की कीमतों को लेकर नया अनुमान लगाया है. कच्चे तेल की कीमतों को लेकर फिच की चेतावनी के बारे में समझते हैं……

फिच ने कच्चे तेल की कीमत को लेकर नया अनुमान जारी किया है. फिच के मुताबिक साल 2026 में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत में बहुत बड़ी राहत नहीं मिलने वाली है. ऑयल के दाम औसत तौर पर 87 डॉलर प्रति बैरल पर रह सकता है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। वहीं मई से जुलाई के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से क्या होगा तेल पर असर
ईरान अगर होर्मुज को खोलने के लिए तैयार हो जाता है और वहां से जहाजों की आवाजाही शुरू हो जाती है, तो तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है.होर्मुज खुलने की स्थिति में अगस्त और सितंबर से कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है.

साल 2026 में क्या रह सकती है तेल की कीमत
Fitch के मुताबिक साल 2026 में कच्चे तेल की कीमत औसत तौर पर 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने का अनुमान है. अगस्त के बाद तेल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती हैं. वहीं सितंबर के बाद कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आने का अनुमान है. तेल की कीमतों में गिरावट का अनुमान इस आधार पर लगाया जा रहा है कि जुलाई में होर्मुज खुल जाए. रेटिंग एजेंसी ने माना है कि मौजूदा तेजी उत्पादन की वजह से नहीं बल्कि सप्लाई की वजह से आई है. रिफाइनरियों और तेल उत्पादन को स्थायी नुकसान नहीं हुआ है. फिच ने माना है कि होर्मुज खुलने के बाद सितंबर से कच्चे तेल की ओवरसप्लाई होने लगेगी. ओपेक, ओपेक प्लस देशों ने भी उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है.

होर्मुज बना तेल का सबसे बड़ा विलेन
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से तेल पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. होर्मुज की वजह से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल के सप्लाई पर सर पड़ा है, दुनिया के तेल सप्लाई का पांचवां हिस्सा इस रास्ते से गुजरता है. युद्ध की वजह से होर्मुज बंद है, लेकिन तेल के भंडारों को नुकसान नहीं हुआ है, ऐसे में सप्लाई शुरू होने के बाद साल 2026 के अंत तक तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है.

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