9 सितंबर 2026 को भारतीय मुद्रा करेंसी मार्केट में अभूतपूर्व दबाव के चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 34 पैसे टूटकर 95.08 पर बंद हुई. कारोबार के दौरान रुपया फिसलकर 95.22 के निचले स्तर भी छू चुका था. भारतीय करेंसी में इस तेज गिरावट के पीछे मुख्य उत्प्रेरक ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलना रहा, जो मध्य पूर्व में जारी अमेरिकाईरान सैन्य टकराव और ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था में आए व्यवधान का सीधा नतीजा है. कच्चे तेल में उफान के कारण भारत के आयात बिल में अप्रत्याशित बढ़ोतरी की आशंका ने व्यापार घाटे को चौड़ा कर दिया है, जिससे घरेलू फॉरेक्स बाजार में डॉलर की आक्रामक मांग दर्ज की गई.

करेंसी मार्केट पर इस चौतरफा दबाव को भारतीय इक्विटी बाजारों में आई भीषण बिकवाली और विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार पूंजी निकासी से और हवा मिली. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। दलाल स्ट्रीट पर सेंसेक्स 813 अंक टूटकर 74,764 पर और निफ्टी 204 अंक गिरकर 23,431 के स्तर पर बंद हुआ. भारतीय रिजर्व बैंक के सतर्क हस्तक्षेप के बावजूद, कच्चे तेल की उच्च दरों और वैश्विक ‘रिस्कऑफ’ माहौल ने रुपए के एक्सचेंज रेट को नीचे की ओर धकेल दिया. विश्लेषकों का मानना है कि इंपोर्टेड महंगाई के खतरे से देश में खुदरा महंगाई दर फिर से भड़क सकती है, जिससे केंद्रीय बैंक द्वारा आगामी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को बड़ा झटका लगा है.
रुपए में आई भारी गिरावट
बुधवार को अमेरिकी करेंसी के मुकाबले रुपया 34 पैसे गिरकर 95.08 पर बंद हुआ. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं, जिससे महंगाई और विदेशी मुद्रा के भारी आउटफ्लो को लेकर चिंता बढ़ गई. फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि कमजोर इक्विटी मार्केट और FII आउटफ्लो ने भी रुपये पर दबाव डाला.
वेस्ट एशिया में तेल सुविधाओं और जहाजों पर हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स लगभग छह हफ्तों में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. इन हमलों से पहले से ही तनावपूर्ण सप्लाई चेन के और कमजोर होने का खतरा पैदा हो गया था, खासकर अमेरिकाईरान तनाव के बीच. ब्रेंट क्रूड 2.94 प्रतिशत बढ़कर 100.73 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था.
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.80 पर खुला, जो दिन का उसका उच्चतम स्तर भी था. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण रुपया गिरकर दिन के निचले स्तर 95.22 पर आ गया. रुपया 95.08 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव 94.74 से 34 पैसे कम था. इस बीच, डॉलर इंडेक्स, जो छह करेंसी की बास्केट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 98.84 पर ट्रेड कर रहा था, जो 0.05 प्रतिशत अधिक था.
क्यों आई रुपए में गिरावट
मिरे एसेट शेरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ग्लोबल मार्केट में रिस्क से बचने की प्रवृत्ति के कारण आज रुपए में गिरावट आई. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के स्तर को पार कर गया. FII आउटफ्लो ने भी रुपये पर दबाव डाला. हालांकि, कमजोर डॉलर के कारण रुपए ने शुरुआती नुकसान की भरपाई कर ली.
उन्होंने कहा कि ग्लोबल मार्केट में रिस्क से बचने की प्रवृत्ति और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंताओं के कारण लोकल करेंसी के नकारात्मक रुख के साथ ट्रेड करने की उम्मीद है. अमेरिका और ईरान के बीच जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने से भी रुपये पर दबाव पड़ सकता है.
अमेरिकी सेना ने मंगलवार को अपने युद्धपोतों पर हालिया हमलों के जवाब में ईरान के पांच तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया, और ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला किया. घरेलू शेयर बाज़ार में, सेंसेक्स 813.35 अंक गिरकर 74,764.23 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 203.60 अंक गिरकर 23,431.50 पर आ गया. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को नेट आधार पर 123.19 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.



