भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें महिला पहलवानों की अपील पर जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया है. अदालत ने इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इसके बाद जवाब दाखिल करने के लिए कोई और मोहलत नहीं दी जाएगी.

इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश दिग्विजय सिंह की अदालत में हुई. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। चार महिला पहलवानों ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें बृजभूषण शरण सिंह और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को बरी कर दिया गया था. अब अदालत इस अपील पर दोनों पक्षों की दलीलें सुन रही है और बृजभूषण सिंह को जवाब दाखिल करने का अंतिम मौका दिया है.
बरी किए जाने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती
दरअसल, निचली अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और सहआरोपी विनोद तोमर को मामले में 3 अगस्त 2026 को बरी कर दिया था. कोर्ट ने सबूतों के अभाव का हवाला दिया था. इसके बाद महिला पहलवानों ने इ25 सितंबर 2026 को बृजभूषण शरण सिंह को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी. अपील मेंनिचली अदालत के फैसले को त्रुटिपूर्ण आकलन पर आधारित बताया गया है.
इससे पहले भी जवाब देने के लिए मिला था मोहलत
विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह की अदालत ने इससे पहले 9 अक्टूबर को मामले में सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह को जबाव दाखिल करने को कहा था. कोर्ट ने 28 अक्टूबर की तारीख भी तय की थी, लेकिन बृजभूषण शरण सिंह ने जवाब नहीं दाखिल किया. इसपर नाराजगी जताते हुए अदालत ने 28 सितंबर को बृजभूषण सिंह, सचिव विनोद तोमर और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया था.
आज कोर्ट में बृजभूषण शरण सिंह वीडियो कॉल पर मौजूद थे. उनके वकील नेजवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का अंतिम समय दिया है. वहीं, अदालत ने जबाव दाखिल करने के मांगे गए समय पर हामी भरी और कहा कि इसके बाद उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए कोई और मोहलत नहीं दी जाएगी. अब मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर 2026 को होगी.



