अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट ने CEO नियुक्त करने का फैसला किया था. कई दिनों की जद्दोजहद के बाद नए CEO की तलाश अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है. राम मंदिर के CEO पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आने के बाद चयन प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है. जानकारी के मुताबिक, इस पद के लिए 5300 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे और उन आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद 54 आवेदकों का चयन किया गया. इनमें से फाइनल 18 आवेदकों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है.

इसी कड़ी में मंगलवार को चयन समिति ने इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू कर दी. पहले दिन 8 आवेदकों का इंटरव्यू हुआ. बाकी आवेदकों का इंटरव्यू अगले चरण में किया जाएगा. चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद समिति तीन नामों का पैनल तैयार कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपेगी. इन्हीं तीन नामों में से एक पर ट्रस्ट अंतिम फैसला लेगा.

इंटरव्यू से पहले चयन समिति ने किए रामलला के दर्शन

राम मंदिर CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय चयन समिति ने मंगलवार सुबह इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू करने से पहले रामलला के दर्शन किए. इसके बाद चयन प्रक्रिया शुरू हुई. जानकारी के अनुसार, पहले दिन इंटरव्यू में तीन IAS अधिकारियों और सेना से जुड़े अधिकारियों समेत करीब आठ आवेदक शामिल हुए. एक अन्य आवेदक के भी चयन प्रक्रिया में शामिल होने की जानकारी सामने आई है.

सूत्रों के मुताबिक, रिटायर IAS अधिकारियों में दिनेश चंद्र और महाराष्ट्र कैडर के एक अधिकारी इंटरव्यू प्रक्रिया में शामिल हुए. अयोध्या के डीएम रहे योगेश्वर राम मिश्र का नाम भी आवेदकों में बताया जा रहा था, लेकिन वह मंगलवार को इंटरव्यू में शामिल नहीं हुए. योगेश्वर राम मिश्र कोर्ट के किसी काम में व्यस्त थे, इसलिए इंटरव्यू देने नहीं गए थे. वहीं, IAS अधिकारी संदीप पंडिया भी इंटरव्यू प्रक्रिया में शामिल रहे.

इसके अलावा रिटायर IPS अधिकारी राजेश पांडेय भी CEO पद के लिए चयन प्रक्रिया का हिस्सा हैं. बताया जा रहा है कि वह अयोध्या पहुंचे थे और रजिस्ट्रेशन कराने के बाद लौट गए. उनका इंटरव्यू बुधवार को होने की बात सामने आ रही है.

18 आवेदकों का होगा इंटरव्यू

सीईओ पद के लिए चयन प्रक्रिया में कुल 18 आवेदकों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है. मंगलवार को इनमें से करीब आठ आवेदकों का इंटरव्यू हुआ. बाकी आवेदकों का इंटरव्यू भी चयन समिति द्वारा किया जाएगा. आवेदकों की प्रशासनिक क्षमता, अनुभव, प्रबंधन कौशल और मंदिर जैसी बड़ी धार्मिक संस्था की व्यवस्थाओं को संभालने की क्षमता का आकलन करेगी. इंटरव्यू के साथ ही आवेदकों के पूर्व अनुभव और जिम्मेदारियों को भी चयन प्रक्रिया में महत्व दिया जाएगा.

तीन नामों की लिस्ट ट्रस्ट को सौंपेगी समिति

राम मंदिर CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति सभी आवेदकों के इंटरव्यू और उनके अनुभव का मूल्यांकन करने के बाद तीन नामों की लिस्ट तैयार करेगी. यह लिस्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपी जाएगी. इसके बाद ट्रस्ट इन तीन नामों में से किसी एक अधिकारी के नाम पर अंतिम फैसला लेगा. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। इस तरह चयन समिति की भूमिका उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग और तीन नामों के पैनल को अंतिम रूप देने तक रहेगी, जबकि CEO की नियुक्ति पर अंतिम फैसला ट्रस्ट की ओर से लिया जाएगा.

2 सितंबर को हो सकता है अंतिम फैसला

नए CEO के नाम पर अंतिम फैसला 2 सितंबर को होने वाली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में होने की संभावना है. चयन समिति द्वारा तैयार किए गए तीन नामों के पैनल पर बैठक में विचार किया जाएगा. ट्रस्ट की बैठक के बाद नए CEO के नाम की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है. हालांकि अंतिम नियुक्ति और घोषणा ट्रस्ट के औपचारिक फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी.

कौनकौन हैं चयन समिति में?

राम मंदिर CEO के चयन के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति का गठन किया गया है. इसमें रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और पूर्व परमाणु वैज्ञानिक सुरेश हावड़े शामिल हैं. यही समिति CEO पद के लिए आए आवेदनों और इंटरव्यू प्रक्रिया का मूल्यांकन कर तीन नामों का पैनल तैयार करेगी.

क्यों महत्वपूर्ण है राम मंदिर CEO का पद?

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. आने वाले समय में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना को देखते हुए मंदिर की व्यवस्थाओं को पेशेवर तरीके से संचालित करना बड़ी चुनौती है. सीईओ की जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं होगी बल्कि मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधाएं, दान और चढ़ावे की व्यवस्था, कर्मचारियों का प्रबंधन, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और मंदिर से जुड़े दूसरे संचालन को प्रभावी तरीके से संभालना भी महत्वपूर्ण होगा.

राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ा है. चढ़ावा चोरी की घटना सामने आने के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और पेशेवर प्रबंधन पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है. फिलहाल अगले कुछ हफ्ते राम मंदिर के नए CEO की नियुक्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है.