
चीन के सिचुआन में एक शख्स ने घर बनाने का ऐसा तरीका चुना, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए. उसने पहाड़ के बाहर घर खड़ा करने के बजाय सीधे पहाड़ के अंदर ही दो मंजिला फैमिली होम बना डाला. 2019 में शुरू हुआ यह काम करीब सात साल तक चला. इस दौरान पानी का रिसाव, नमी, चट्टानों की दरारें और मौसम जैसी कई मुश्किलें आईं, लेकिन आखिरकार पहाड़ के अंदर बना यह घर रहने लायक हो गया.
सिचुआन के पहाड़ी इलाके में रहने वाले इस शख्स को Hu Ge यानी मिस्टर हू के नाम से जाना जाता है. उन्हें पास की कोयला खदान और कंस्ट्रक्शन के काम का अनुभव होने की वजह से चट्टानों के साथ काम करने की कुछ समझ थी. फिर भी हजारों टन वजन वाली चट्टान के अंदर घर बनाना कोई आसान काम नहीं था. लेकिन उन्होंने पहाड़ के अंदर मौजूद सैंडस्टोन चट्टान को ही काटकर घर बनाने की ठानी और 7 साल की मशक्कत के बाद उसे पूरा कर लिया.
पहले बनाया सपोर्ट, फिर काटी चट्टान
घर की खुदाई शुरू करते समय हू ने एक बड़ी सावधानी बरती. उन्होंने कमरे की छत को तुरंत पूरी तरह खाली नहीं किया, बल्कि बीच में चट्टान का एक बड़ा हिस्सा छोड़ दिया. यह हिस्सा एक सपोर्ट पिलर की तरह काम कर रहा था. इसके साथ ही उन्होंने छत को आर्च शेप में काटा, जिससे ऊपर की चट्टान का वजन सीधे एक जगह न पड़े और आसपास की दीवारों की तरफ ट्रांसफर हो सके. जब उन्हें भरोसा हो गया कि स्ट्रक्चर मजबूत है, तब उन्होंने बीच के बड़े पिलर को हटा दिया. खुदाई से निकली चट्टान को भी बेकार नहीं जाने दिया. कुछ पत्थरों से बाद में गार्डन टेबल जैसी चीजें बनाई गईं.
पानी ने सबसे ज्यादा परेशान किया
पहाड़ के अंदर घर बनाने में सबसे बड़ी दिक्कतों में से एक पानी बनी. खुदाई के दौरान हू को चट्टान के अंदर से हवा आती महसूस हुई. इससे उन्हें अंदाजा हुआ कि कहीं न कहीं दरारें मौजूद हैं. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। उन्होंने पानी को बाहर निकालने के लिए ड्रेनेज ट्रेंच बनाई और दरारों को सीमेंट से सील किया. लेकिन सिचुआन में हुई तेज बारिश ने पूरा सिस्टम टेस्ट कर दिया. भारी बारिश के दौरान चट्टानों से पानी अंदर आने लगा और ड्रेनेज सिस्टम पर दबाव बढ़ गया. इसके बाद उन्होंने सीमेंट के साथ एक्सपैंडिंग फोम का इस्तेमाल करके कई हिस्सों को मजबूत किया. फिर भी उन्होंने चट्टान को पूरी तरह बंद नहीं किया. घर में वेंटिलेशन के लिए कुछ रास्ते छोड़े, जिससे अंदर नमी जमा न हो.
जंगल के बीच खुद पहुंचाई बिजली और पानी
घर को सिर्फ कमरों में बदल देना काफी नहीं था. उसे रहने लायक बनाने के लिए बिजली और पानी भी चाहिए था. हू ने खुद जंगल के रास्ते बिजली की केबल घर तक पहुंचाई. पानी के लिए उन्हें करीब एक मील दूर प्राकृतिक स्प्रिंग मिली. उन्होंने वहां से पानी को पाइप के जरिए घर के पास बने स्टोरेज टैंक तक पहुंचाने का सिस्टम तैयार किया. शुरुआत में शॉवर के लिए पानी का प्रेशर कम था. इसके बाद उन्होंने टैंक को जंगल में और ऊंचाई पर शिफ्ट कर दिया. इससे ग्रेविटी की मदद से पानी का प्रेशर बढ़ गया और घर में नल और शॉवर चलाना आसान हो गया.
पहाड़ में ही बना डाली किचन और टैरेस
घर का किचन भी किसी सामान्य घर जैसा नहीं है. इसे भी पहाड़ की चट्टान को काटकर तैयार किया गया है. रॉक से ही काउंटर बनाए गए. किचन के ऊपर का हिस्सा टैरेस की तरह इस्तेमाल किया गया, जहां से दूसरी मंजिल पर काम किया जा सकता था. हू ने साइट से हटाए गए पेड़ों का इस्तेमाल पोर्च के लिए किया. चट्टान में छेद करके लकड़ी के बीम को फिट किया गया. कुकिंग और पानी गर्म करने के लिए अलग-अलग जगह बनाई गई. चट्टान में मौजूद एक प्राकृतिक दरार को चिमनी के तौर पर इस्तेमाल किया गया. बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहाड़ में ही बाहरी सीढ़ियां काटी गईं और उनके साथ रेलिंग लगाई गई.
दो मंजिलों को जोड़ना था सबसे बड़ा चैलेंज
घर का सबसे मुश्किल हिस्सा दोनों फ्लोर को आपस में जोड़ना था. इसके लिए सैंडस्टोन के अंदर ही सीढ़ियां बनानी थीं. हू ने पहले नीचे की तरफ से सीढ़ियों का एक हिस्सा काटा. बाद में उन्होंने ऊपर की तरफ से खुदाई शुरू की और दोनों हिस्सों को बीच में मिलाने का प्लान बनाया. इस काम में थोड़ी सी भी गलती बड़ी समस्या पैदा कर सकती थी. दोनों तरफ से की जा रही खुदाई बिल्कुल सही जगह मिलना जरूरी था. कई साल की मेहनत के बाद उनकी कैलकुलेशन सही निकली और दोनों हिस्से आपस में जुड़ गए. इस तरह पहाड़ के अंदर अलग-अलग जगहों के बजाय एक पूरा दो मंजिला घर तैयार हो गया.
चट्टान में मिली बड़ी दरार से बढ़ी चिंता
दूसरी मंजिल पर काम के दौरान हू को एक बड़ी दरार दिखाई दी. उन्हें डर था कि यह दरार कहीं पानी के रास्ते से जुड़ी न हो या इससे घर का स्ट्रक्चर कमजोर न हो जाए. दरार को समझने के लिए उन्होंने एक तरह का स्मोक टेस्ट किया. अंदर लकड़ी जलाकर देखा गया कि धुआं किस रास्ते से बाहर निकलता है. धुआं एक पहले से मौजूद आउटलेट से बाहर निकला. इससे उन्हें तत्काल किसी बड़े खतरे का संकेत नहीं मिला. हालांकि इस टेस्ट के बाद कमरे की दीवारें और छत कालिख से भर गईं. उन्होंने खतरनाक हिस्से में आगे खुदाई करने के बजाय अपना प्लान बदल दिया.
फर्नीचर भी पहाड़ से ही तैयार किया
इस घर की खास बात सिर्फ इसकी दीवारें नहीं हैं. हू ने कई चीजों को चट्टान के साथ ही डिजाइन किया. ऊपरी मंजिल पर उन्होंने चट्टान काटकर वर्कस्पेस तैयार किया. एक हिस्से को डेस्क की तरह इस्तेमाल किया गया. वेंटिलेशन और रोशनी के लिए जगह छोड़ी गई. बारिश के पानी को बाहर निकालने के लिए चट्टान में हल्के ढलान वाले ड्रेनेज रास्ते भी बनाए गए. इसका मतलब घर बनाते समय वह सिर्फ चट्टान काट नहीं रहे थे, बल्कि उसी चट्टान को घर के डिजाइन का हिस्सा भी बना रहे थे.
दो साल छोड़ना पड़ा प्रोजेक्ट, लौटकर बदला नजारा
जब घर लगभग तैयार होने लगा था, तब हू को करीब दो साल के लिए प्रोजेक्ट छोड़ना पड़ा. जब वह वापस लौटे तो नेचर ने उनके बनाए घर को काफी हद तक अपने कब्जे में ले लिया था. सिचुआन की नमी से कई हिस्सों में फफूंद लग गई थी. लकड़ी का बेड खराब हो चुका था. बाहर की दीवारों पर बेलें और जड़ें फैल गई थीं. कुछ जगहों पर ऐसा लग रहा था जैसे घर पहाड़ में बना है या पहाड़ ने घर को अपने अंदर वापस समेट लिया है. लेकिन हू ने हार नहीं मानी. उन्होंने दोबारा सफाई, रिपेयर और अपग्रेड का काम शुरू कर दिया.
सेप्टिक टैंक से लेकर नई चिमनी तक किया काम
वापसी के बाद सबसे पहले उन्होंने पुराने वेस्ट सिस्टम को हटाकर परिवार के हिसाब से नया सेप्टिक टैंक लगाया. सीढ़ियों की मरम्मत की गई और आउटडोर किचन को फिर से तैयार किया गया. पहले चिमनी से धुआं और चिंगारी आसपास के बांस के जंगल की तरफ जाने की समस्या सामने आई थी. इसलिए चिमनी की ऊंचाई करीब 13 फीट तक बढ़ाई गई. ऊपर बारिश का पानी रोकने के लिए कवर भी लगाया गया. घर में पानी की सप्लाई को बेहतर करने के लिए शट-ऑफ वाल्व लगाया गया और कई छोटे-छोटे बदलाव किए गए.
अब पहाड़ के अंदर रहने लायक हो गया घर
करीब सात साल बाद हू की मेहनत रंग लाई. पहाड़ के अंदर बने इस घर में अब बिजली, रनिंग वाटर, किचन, बाथरूम, हीटिंग, Wi-Fi और सोने की जगह जैसी कई जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं. पुराना लकड़ी का बेड खराब होने के बाद उसकी जगह आयरन बेड लगाया गया, जो नमी वाले माहौल में ज्यादा टिकाऊ है. गर्मी के लिए स्टील स्टोव लगाया गया. घर के बाहर सोलर लाइट्स लगाई गई हैं. बच्चों के लिए एक छोटा पूल भी तैयार किया गया है. हालांकि घर का काम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. बच्चों के लिए बनाई जा रही ऊपरी मंजिल में अभी भी कुछ खुदाई और एक्सटेंशन का काम बाकी है.
सात साल की मेहनत ने पहाड़ को बना दिया घर
मिस्टर हू की कहानी सिर्फ एक अनोखे घर की कहानी नहीं है. यह इस बात का उदाहरण भी है कि किसी मुश्किल आइडिया को जमीन पर उतारने के लिए कितनी लंबी मेहनत करनी पड़ सकती है. 2019 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट बारिश, पानी, नमी, चट्टानों की दरारों और दो साल के ब्रेक के बावजूद चलता रहा. सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने पहाड़ को हटाकर जगह नहीं बनाई, बल्कि पहाड़ को ही धीरे-धीरे घर का हिस्सा बना दिया. आज उसी चट्टान के अंदर उनका परिवार एक ऐसे घर में रह सकता है, जिसकी दीवारें सीमेंट और ईंट से नहीं, बल्कि उसी पहाड़ से निकली हैं. यही इस सात साल लंबे प्रोजेक्ट को इतना अलग और हैरान करने वाला बनाता है.



