भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर से रौनक लौट आई है. पिछले कुछ समय से बाजार को लेकर सतर्क नजर आ रहे विदेशी निवेशकों ने अचानक अपना रुख बदल लिया है. महज एक हफ्ते के भीतर विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 1 अरब डॉलर से ज्यादा का भारीभरकम निवेश किया है. ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 के बाद से यह किसी भी एक हफ्ते में विदेशी निवेशकों द्वारा की गई सबसे बड़ी खरीदारी है. निवेशक के लिए यह एक बड़ी राहत की खबर है, क्योंकि जब विदेशी निवेशक बाजार में पैसा लगाते हैं, तो छोटे निवेशकों के पोर्टफोलियो को भी इसका सीधा फायदा मिलता है और बाजार में एक नई जान आ जाती है.

आंकड़ों में छुपी है तेजी की कहानी
विदेशी निवेशकों की यह शानदार वापसी केवल एक दिन का रुझान नहीं है. 9 जुलाई तक के महज चार दिनों में ही ग्लोबल फंड्स ने 1.3 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय शेयर खरीदे हैं. इसके अलावा, शुक्रवार को आए शुरुआती प्रोविजनल आंकड़ों से पता चला है कि इन निवेशकों ने 272 मिलियन डॉलर के शेयर और खरीदे. यह लगातार चौथा हफ्ता है जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में शुद्ध खरीदार बने हुए हैं. आम आदमी के नजरिए से देखें तो बाजार में इस बड़े पैसे के आने से कंपनियों के शेयरों को एक मजबूत सहारा मिलता है, जिससे रिटेल निवेशकों की बचत और म्यूचुअल फंड्स का रिटर्न सुधरने की संभावना मजबूत हो जाती है.
ब्रोकरेज फर्म्स का बदला नजरिया
दुनिया की जानीमानी ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स के रणनीतिकारों ने 11 जुलाई को जारी अपने एक नोट में इस निवेश के पीछे की ठोस वजहें बताई हैं. उनके अनुसार, हाल के हफ्तों में भारत की आर्थिक तस्वीर में काफी सुधार देखने को मिला है. कमोडिटी की कीमतों में गिरावट आई है और रुपये की स्थिति डॉलर के मुकाबले स्थिर हुई है. इसके साथ ही, मजबूत घरेलू विकास दर और दूसरी तिमाही में कंपनियों की कमाई बेहतर रहने की उम्मीदों ने विदेशी निवेशकों का भरोसा वापस जीता है. सिटीग्रुप ने भी भारतीय बाजार को लेकर सकारात्मक राय जाहिर करते हुए कहा है कि यहां जोखिम के मुकाबले मुनाफे की संभावना काफी अनुकूल है. कंपनियों की कमाई के अनुमानों को देखते हुए बाजार का मौजूदा वैल्युएशन बिल्कुल जायज लग रहा है.
निफ्टी की शानदार रिकवरी
विदेशी फंड्स की इस वापसी से शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों को सीधे तौर पर ऊर्जा मिल रही है. इसी साल अप्रैल में अपने एक साल के निचले स्तर पर जाने के बाद से निफ्टी 50 इंडेक्स में अब तक लगभग 8 प्रतिशत का शानदार उछाल आ चुका है. कच्चे तेल की गिरती कीमतें और स्थिर होता रुपया कॉरपोरेट जगत की कमाई के आउटलुक को लगातार बेहतर बना रहे हैं. जब कंपनियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, तो उसका सीधा लाभ आम शेयरधारकों को उनके निवेश की बढ़ती वैल्यू के रूप में मिलता है.
तस्वीर का दूसरा पहलू भी समझ लें
आंकड़ों के मुताबिक, लगातार चार हफ्तों की इस बंपर खरीदारी के बावजूद, इस पूरे साल में विदेशी निवेशक अभी भी लगभग 27 अरब डॉलर मूल्य के शेयरों के शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि बाजार में विदेशी निवेश का आना शुरू तो हुआ है, लेकिन पहले जो बड़ी मात्रा में पैसा निकाला गया था, उसकी पूरी भरपाई और एक लंबी स्थायी तेजी के लिए अभी बाजार को थोड़ा और इंतजार करना होगा.



