Ayodhya News: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि के गबन और अनियमितताओं के मामले में बड़ा कानूनी कदम उठाया गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से रामजन्मभूमि कोतवाली में FIR दर्ज कराई गई है. इस मामले में टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा समेत आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है. आरोपियों के खिलाफ गबन, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार से जुड़ी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है.

जानकारी के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया. सूत्रों का दावा है कि जांच के दौरान मिले सीसीटीवी फुटेज में कुछ आरोपी चढ़ावे की राशि से संबंधित संदिग्ध गतिविधियों में शामिल दिखाई दिए हैं. आरोप है कि कुछ लोगों ने न केवल कथित रूप से धन के गबन में भूमिका निभाई, बल्कि अन्य आरोपियों की मदद भी की. इसी आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. आइए जानते हैं आखिर इन 8 लोगों पर BNS की किन धाराओं में केस दर्ज हुआ है. इन धाराओं में क्या सजा मिलती है?…
बताया जा रहा है कि सीएम योगी के निर्देश पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दान चोरी के आरोपियों पर FIR दर्ज की गई है. FIR में BNS की धारा 306, 316 , 317 , 317 , 61 और 3 शामिल की गई हैं.
- धारा 316 यह धारा आपराधिक न्यासभंग से जुड़ी है. यह उन मामलों में लगाई जाती है, जहां किसी व्यक्ति को सौंपे गए धन या संपत्ति का दुरुपयोग या गबन किया जाता है. इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है.
- धारा 317 यह धारा चोरी की संपत्ति को जानबूझकर रखने, खरीदने या उसके कारोबार से संबंधित है. इस अपराध में भी आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है.
- धारा 317 यह धारा चोरी की संपत्ति को छिपाने, बेचने या ठिकाने लगाने में मदद करने वालों पर लगाई जाती है, जिसमें तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है.
- धारा 61 यह धारा आपराधिक साजिश से संबंधित है, जिसके तहत दो या अधिक लोगों द्वारा किसी अवैध कार्य को अंजाम देने के लिए बनाई गई योजना को अपराध माना जाता है.
- धारा 3 यह धारा सामूहिक उद्देश्य से किए गए अपराधों में सभी आरोपियों की समान जिम्मेदारी तय करती है.
सूत्रों के अनुसार, मामले में दर्ज FIR में ट्रस्ट के किसी बड़े पदाधिकारी या शीर्ष अधिकारी का नाम शामिल नहीं है. मुकदमा मुख्य रूप से उन लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है, जिनकी भूमिका सीसीटीवी फुटेज और प्रारंभिक जांच में संदिग्ध पाई गई है.
गौरतलब है कि चढ़ावा गबन का मामला सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट ने दान राशि की गिनती और बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया में कई बड़े बदलाव किए हैं. काउंटिंग रूम में सख्त निगरानी, फ्रिस्किंग, बिना जेब वाले कपड़ों की अनिवार्यता, डबल लॉक सिस्टम और 180 दिन तक सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने जैसी नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं.


