इस्लामाबाद: पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख्तर के बड़े भाई शाहिद अख्तर के नमाजएजनाजा का नजारा देखकर दुनिया की सुरक्षा एजेंसियों की भौंहे तन गई हैं. इस्लामाबाद के एच8 कब्रिस्तान में उनका नमाजएजनाजा हुआ जिसमें में खेल जगत, राजनीति के कई बड़े चेहरे शामिल हुए. इस बीच समंदर पार तक हलचल तब मच गई जब इसमें पाकिस्तान के बैन आतंकी संगठन लश्करएतैयबा और उससे जुड़े राजनीतिक मुखौटे ‘पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग’ के नेताओं को देखा गया. ये सिर्फ कहीसुनी बात नहीं है बल्कि इसका सबूत बाकायदा वीडियो में दिखाई दिया है. अब सवाल उठ रहे हैं कि शोएब अख्तर के भाई के जनाजे में आतंकवाद से जुड़े चेहरों की मौजूदगी के क्या मायने हैं?

LeT के PMML से जुड़े नेताओं ने दिखाई शक्ल
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि इन नेताओं की मौजूदगी कोई छिपी हुई बात नहीं थी. आतंकवाद और उग्रवादी संगठनों पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स के मुताबिक, खुद लश्करएतैयबा और पीएमएमएल से जुड़े आधिकारिक मीडिया विंग ने इस जनाजे के वीडियो और तस्वीरें जारी की हैं.
वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि पीएमएमएल इस्लामाबाद का अध्यक्ष इनाम उर रहमान काम्बोह अपने कई वरिष्ठ सहयोगियों और लश्करएतैयबा से जुड़े प्रमुख चेहरों के साथ वहां मौजूद था. वो न सिर्फ नमाजएजनाजा में शामिल हुआ, बल्कि शोएब अख्तर के परिवार के करीब भी नजर आए. सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों के आते ही रक्षा विश्लेषकों और खेल प्रेमियों के बीच बहस छिड़ गई है.

कौन हैं शोएब अख्तर के भाई के जनाजे में पहुंचे ये चेहरे?

पीएमएमएल असल में आतंकी हाफिज सईद के दिमाग की उपज है. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिबंधित और भारत समेत पूरी दुनिया के लिए मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद के संगठन ‘जमातउददावा’ और लश्करएतैयबा ने जब देखा कि उन पर चौतरफा पाबंदियां लग चुकी हैं तो उसने मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखने के लिए इस नई पार्टी का गठन किया था.

जनाजे में पहुंचा इनाम उर रहमान काम्बोह इसी संगठन का इस्लामाबाद में चेहरा है. उसके साथ आए कई अन्य बुजुर्ग और युवा चेहरे सीधे तौर पर लश्कर के पुराने नेटवर्क से जुड़े रहे हैं. ऐसे में एक वैश्विक स्तर के स्टार क्रिकेटर के पारिवारिक कार्यक्रम में इन लोगों का खुलेआम पहुंचना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की साख और वहां के सेलिब्रिटीज के सामाजिक संपर्कों पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

क्यों पहुंचे थे ये नेता?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा और सीधा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर लश्कर से जुड़े इन वरिष्ठ नेताओं का शोएब अख्तर के परिवार से क्या संबंध है? एक खेल हस्ती के भाई के अंतिम संस्कार में जहां देश के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शोक संदेश भेजा और पूर्व कप्तान राशिद लतीफ जैसे क्रिकेटर्स ने दुआएं कीं, वहां इन कट्टरपंथी तत्वों की मौजूदगी क्या महज एक इत्तेफाक थी या इसके पीछे गहरे संबंध हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में कई बार बड़े सेलिब्रिटीज और क्रिकेटर्स अनजाने में या सामाजिक दबाव के कारण स्थानीय धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के कार्यक्रमों में शामिल होते हैं या उन्हें अपने निजी कार्यक्रमों में आने से रोक नहीं पाते लेकिन जब मामला लश्करएतैयबा जैसे खूंखार नेटवर्क से जुड़े लोगों का हो तो बात सिर्फ स्थानीय भाईचारे का नहीं रह जाती.