जो रिटायर होने वाले कर्मचारी 2023 से पहले लीव एनकैशमेंट पर टैक्स छूट के तौर पर सिर्फ 3 लाख रुपए पाते थे, उन्हें अब राहत मिल सकती है. चेन्नई में इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल ने हाल ही में एक आदेश में कहा है कि 24 मई 2023 को लागू की गई 25 लाख रुपए की बढ़ी हुई छूट सीमा को पिछली तारीख से लागू किया जा सकता है.

ITAT ने 12 जून 2026 के अपने आदेश में कहा कि PSU और प्राइवेट सेक्टर, दोनों ही सेक्टर्स के रिटायर हो चुके कर्मचारियों को छूट की इस बढ़ी हुई सीमा का फायदा मिल सकता है. इसमें वे कर्मचारी भी शामिल हैं जिन्होंने 3 लाख रुपए से ज्यादा के लीव एनकैशमेंट पर पहले ही टैक्स चुका दिया था.

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस ने 2023 के अपने नोटिफिकेशन में साफ किया है कि यह बढ़ी हुई छूट रिटायरमेंट के समय जमा ‘अर्न्ड लीव’ पर लागू होती है, चाहे रिटायरमेंट सुपरएनुएशन पर हुआ हो या किसी और वजह से. आइए इसे विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं…

लीव एनकैशमेंट पर ITAT का फैसला कैसे आया?

ITAT का यह फैसला ONGC के रिटायर्ड कर्मचारी वट्टिकुंडाला प्रभाकर राव के मामले से जुड़ा है. उन्हें वित्त वर्ष 201920 में रिटायरमेंट के समय लीव एनकैशमेंट के तौर पर 19.05 लाख रुपए मिले थे. असेसमेंट ईयर 202021 के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय, राव ने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 10 के तहत पूरी रकम पर छूट का दावा किया. हालांकि, बेंगलुरु में सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर ने छूट को 3 लाख रुपए तक सीमित कर दिया और बाकी रकम पर टैक्स लगा दिया.

राव ने अपील की, लेकिन कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स ने उनका दावा खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि असेसी को केवल 3,00,000 रुपए तक की छूट मिलती है, जब तक कि केंद्र सरकार किसी नोटिफिकेशन के जरिए इस सीमा को बढ़ा न दे, जो अभी तक नहीं किया गया है.

ITAT के सामने असेसी की अपील में 1,023 दिनों की देरी हुई. हालांकि, ट्रिब्यूनल ने देरी को माफ कर दिया. ट्रिब्यूनल ने माना कि असेसी ईमानदारी और नियम का पालन करते हुए किसी कोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार कर रहा था. यह इंतजार दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 8 नवंबर 2019 को कमल कुमार कालिया मामले में सरकार को नोटिस जारी करने के बाद से हो रहा था, जिसमें 3 लाख रुपए की छूट की सीमा को चुनौती दी गई थी.

अपस्टॉक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, रेवेन्यू के वकील ने तर्क दिया कि बढ़ी हुई छूट की सीमा केवल 1 अप्रैल 2023 से लागू हुई थी. इसलिए असेसमेंट ईयर 202021 के लिए असेसी को इसका फायदा नहीं मिल सकता था. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। हालांकि, असेसी के वकील ने तर्क दिया कि नोटिफिकेशन “फायदेमंद और सुधार लाने वाला” था. वकील ने स्पष्टीकरण मेमोरैंडम की ओर भी इशारा किया, जिसमें कहा गया था कि इस बदलाव से किसी भी व्यक्ति पर बुरा असर नहीं पड़ेगा.

ITAT ने टैक्सपेयर के पक्ष में फैसला सुनाया

राव के पक्ष में फैसला सुनाते हुए, ITAT ने कहा कि छूट की सीमा को 3 लाख रुपए से बढ़ाकर 25 लाख रुपए करना लगभग दो दशकों के बाद एक “बड़ी बढ़ोतरी” थी. इस बदलाव का मकसद गैरसरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले फायदे को सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले फायदे के बराबर लाना और दोनों के बीच के अंतर को खत्म करना था.

ITAT ने आगे कहा कि यह एक स्थापित सिद्धांत है कि जो प्रावधान फायदेमंद होते हैं और जिनका मकसद मुश्किलों को दूर करना होता है, उनकी व्याख्या उदारतापूर्वक की जानी चाहिए और उचित मामलों में उन्हें पिछली तारीख से लागू किया जाना चाहिए, खासकर तब जब इससे रेवेन्यू के किसी पक्के अधिकार पर बुरा असर न पड़ रहा हो.

ट्रिब्यूनल ने गौर किया कि नोटिफिकेशन के साथ दिए गए स्पष्टीकरण मेमोरेंडम में कहा गया था कि इसके द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि इस नोटिफिकेशन को पिछली तारीख से लागू करने से किसी भी व्यक्ति पर बुरा असर नहीं पड़ रहा है.

ITAT को टैक्सपेयर की इस दलील में “काफी दम” लगा कि नोटिफिकेशन की तारीख से पहले रिटायर होने वाले कर्मचारियों को बढ़ी हुई छूट न देने से “एक ही स्थिति वाले कर्मचारियों के बीच जो नोटिफिकेशन की तारीख से पहले और बाद में रिटायर हुए एक अनुचित और बनावटी अंतर पैदा होगा, जिससे संशोधन का मूल मकसद ही खत्म हो जाएगा.