हाल ही में सरकार ने वित्त वर्ष 202526 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि पर 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दी है. यह लगातार तीसरा साल है जब ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है. 7.8 करोड़ से ज्यादा EPF खाताधारकों के लिए यह दर फिक्स्ड इनकम और टैक्स बचाने वाले कई दूसरे निवेश विकल्पों की तुलना में बेहतर मानी जा रही है.

EPF की ब्याज दर कैसे तय होती है?
EPF पर मिलने वाली ब्याज दर का फैसला कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज करती है.बोर्ड यह देखता है कि EPFO को सरकारी बॉन्ड, कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियों और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड जैसे निवेशों से कितना रिटर्न मिला है.
इसके बाद ब्याज दर का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा जाता है. सरकार की मंजूरी मिलने के बाद यह ब्याज खाताधारकों के EPF खाते में जमा कर दिया जाता है.हालांकि ब्याज साल में एक बार खाते में जोड़ा जाता है, लेकिन इसकी गणना हर महीने खाते में मौजूद बैलेंस के आधार पर की जाती है.
EPFO के पास निवेश के लिए पैसा कहां से आता है?
प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाला हर कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 12% EPF में जमा करता है. नियोक्ता भी उतनी ही राशि जमा करता है. इसके अलावा कंपनी को प्रशासनिक शुल्क और कर्मचारी जमालिंक्ड बीमा योजना में भी योगदान देना होता है.
EPFO को मिलने वाले योगदान, ब्याज, डिविडेंड, कमीशन और पुराने निवेशों की मैच्योरिटी से प्राप्त रकम को निवेश किया जाता है. वित्त वर्ष 202425 में EPFO को कुल 3.35 लाख करोड़ रुपये मिले, जिनमें से 2.58 लाख करोड़ रुपये कर्मचारियों और नियोक्ताओं के EPF योगदान से आए.
EPFO पैसा कहां निवेश करता है?
EPFO श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा तय निवेश नियमों के अनुसार पैसा निवेश करता है.
वर्तमान नियमों के मुताबिक नई जमा राशि का:
- 45% से 65% सरकारी प्रतिभूतियों में,
- 20% से 45% डेट और उससे जुड़े निवेशों में,
- 5% तक शॉर्ट टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स में,
- 5% से 15% इक्विटी और ETF में,
- तथा 5% तक अन्य निवेश विकल्पों में लगाया जा सकता है.
मार्च 2025 तक EPFO का कुल निवेश कोष 28.37 लाख करोड़ रुपये था. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राज्य सरकारों के विकास ऋण , सरकारी बॉन्ड, कॉरपोरेट बॉन्ड और ETF में निवेश किया गया है.
इन निवेशों का प्रबंधन कौन करता है?
EPFO का डेट पोर्टफोलियो एसबीआई फंड मैनेजमेंट और यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी संभालती हैं. वहीं इक्विटी निवेश का प्रबंधन SBI फंड मैनेजमेंट, UTI AMC, निप्पॉन लाइफ इंडिया AMC और ICICI प्रूडेंशियल एएमसी करती हैं.
साल 2015 में EPFO ने पहली बार ETF में निवेश शुरू किया था. शुरुआत में सिर्फ 5% निवेश किया गया था, जिसे 2017 में बढ़ाकर 15% तक करने की अनुमति दी गई.
क्या आगे निवेश का तरीका बदल सकता है?
हां, EPFO समयसमय पर अपनी निवेश नीति में बदलाव करता रहा है. जरूरत के हिसाब से निवेश की सीमा बढ़ाई या घटाई जा सकती है और नए निवेश विकल्प भी जोड़े जा सकते हैं.
मार्च 2025 तक EPFO का ETF में वास्तविक निवेश करीब 10% था, जबकि अधिकतम सीमा 15% है. अच्छे रिटर्न को देखते हुए भविष्य में ETF में निवेश बढ़ाया जा सकता है. हालांकि EPFO का कहना है कि खाताधारकों को बेहतर ब्याज देना जरूरी है, लेकिन इसके साथ संगठन के पास पर्याप्त अधिशेष बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.



