सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की उपासना का सबसे सुंदर समय माना जाता है। श्रावण मास में विशेष रूप से रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है। वैदिक परंपरा में रुद्राभिषेक केवल शिव लिंग का स्नान नहीं, बल्कि हमारे मन,बुद्धि और आत्मा के शुद्धिकरण का अनुष्ठान भी माना गया है। रुद्राभिषेक की हर सामग्री में हमारे किसी न किसी सद्गुण को जागृत करने की शक्ति छिपी होती है। आइए जानते हैं
1) जल रुद्राभिषेक की शुरुआत जल से होती है। जल ही जीवन है यह पवित्रता और स्वच्छता का प्रतीक है। मनुष्य का स्वभाव भी जल की तरह शीतल और निर्मल होना चाहिए । जलाभिषेक करने से क्रोध, अहंकार और कटुता के भाव शांत हो जाते हैं।

2) दूध शुद्धता, मातृत्व और सात्विकता का प्रतीक है। शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का भाव है कि हमारे जीवन में भी करुणा, दया और शुद्धता बनी रहे।
3) दही परिवर्तन और परिपक्वता का प्रतीक है। यह सिखाता है कि जीवन में परिस्थितियाँ बदलती रहेंगी लेकिन मन का संतुलन नहीं बिगड़ना चाहिए। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। धैर्य से काम लेना चाहिए।
4) घी घी अग्नि को प्रज्वलित करता है। यह ज्ञान और ऊर्जा का प्रतीक है। इसका संदेश है कि हमारे जीवन में सत्कर्मों की ज्योति सदा जलती रहे।
5) शहद शहद को मिठास का प्रतीक माना जाता है। शिव भक्ति तभी पूर्ण मानी जाती है, जब हमारे व्यवहार में मिठास, विनम्रता और प्रेम नजर आए।
6) शक्कर और मिश्री शक्कर और मिश्री का स्वाद मीठा होता है और स्वभाव भी पारदर्शी होता है। हमारा चरित्र भी सरल पारदर्शी और मिठास से भरा होना चाहिए।
7) बिल्वपत्र त्रि गुणों पर विजय प्राप्त करने का प्रतीक है। शिवजी को तीन पत्तों वाला विल्वपत्र अति प्रिय है। विल्वपत्र चढ़ाने का अर्थ है कि मनुष्य अपने भीतर के काम, क्रोध और लोभ पर विजय प्राप्त करे।
8) धतूरा और भस्म धतूरा विषैला फल है जो संदेश देता है कि जीवन की कटुता को भी साधना के जरिए मधुरता में बदला जा सकता है वहीं भस्म याद दिलाती है कि यह देह नश्वर है अंत में जलकर भस्म हो जाएगी। इसलिए हमारे जीवन में अहंकार का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
आरएन तिवारी



