दिल्ली के मयूर विहार में एक 9 साल की बच्ची की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि उसे कार्डियक अरेस्ट आया था और समय रहते सीपीआर मिलता तो उसकी जान बच सकती थी. ज्यादातर लोगों को एंबुलेंस के आने तक ऐसी सिचुएशन में क्या करना चाहिए ये पता नहीं होता. चलिए आपको बताते हैं…

हार्ट अटैक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें शुरुआती कुछ मिनट मरीज की जान बचाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. ऐसे में घबराने के बजाय सही कदम उठाना जरूरी है. जानें कुछ जरूरी बातें…
डॉक्टर अंकेश अग्रवाल का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को अचानक सीने में तेज दर्द, दबाव या भारीपन महसूस हो, दर्द बाएं हाथ, कंधे, पीठ या जबड़े तक पहुंचे, सांस लेने में परेशानी हो, ठंडा पसीना आए या बेचैनी महसूस हो तो इसे हार्ट अटैक के संभावित लक्षण मानते हुए तुरंत एंबुलेंस को कॉल करें.
भारत में इसके लिए 112 या 108 पर संपर्क किया जा सकता है. एंबुलेंस आने तक मरीज को आरामदायक स्थिति में बैठाएं या आधा लेटा कर रखें और उसे चलनेफिरने या खुद वाहन चलाकर अस्पताल जाने से रोकें.
मरीज के कपड़े ढीले कर दें और आसपास पर्याप्त हवा आने दें. यदि मरीज होश में है और उसे एस्पिरिन से एलर्जी, सक्रिय ब्लीडिंग या डॉक्टर की ओर से इसे न लेने की सलाह नहीं है, तो आपातकालीन चिकित्सा सेवा के निर्देश पर 150 से 300 मिलीग्राम एस्पिरिन चबाने के लिए दी जा सकती है.
हालांकि, बिना चिकित्सीय सलाह के कोई अन्य दवा न दें. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीज की सांस और होश पर लगातार नजर रखें. यदि वह बेहोश हो जाता है और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है, तो तुरंत सीपीआर शुरू करें. इसके लिए छाती के बीचोंबीच दोनों हाथों से 100 से 120 बार प्रति मिनट की गति से दबाव दें.
यदि एईडी मशीन उपलब्ध है तो उसके निर्देशों का पालन करें. मरीज को पानी, खाना या घरेलू नुस्खे देने में समय बर्बाद न करें. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। कई बार लोग दर्द कम होने का इंतजार करते रहते हैं, जो खतरनाक हो सकता है.
याद रखें, हार्ट अटैक में शुरुआती पांच मिनट के दौरान उठाए गए सही कदम मरीज की जान बचाने और दिल को होने वाले नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.



