गर्दन चटकाने की आदत कई लोगों में आम है. थकान होने पर लोग तुरंत अपनी गर्दन या हाथों की उंगलियों को चटकाते हैं. पर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ये आवाज क्यों आती है? अगर कोई ऐसा अक्सर करता है तो क्या इससे शरीर को कोई नुकसान है? आजकल की लाइफ बिजी होने के साथसाथ हद से ज्यादा थकान भरी भी होती है. मेट्रो या दूसरे तरीकों से ट्रैवल करना, ऑफिस में घंटों सीट पर बैठने के अलावा दूसरे कामों से थकान का होना स्वाभाविक है.

जो लोग गर्दन को समयसमय पर चटकाते हैं उनमें खासकर लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या डेस्क पर काम करने वाले शामिल हैं. चलिए आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों होता है? और जानें क्या इसके कोई नुकसान हैं.

क्यों आती है चटकने की आवाज

डॉ. लेफ्टिनेंट कर्नल रूपेश प्रसाद का कहना है कि गर्दन से आने वाली चटकने की आवाज अक्सर जोड़ों के अंदर दबाव में बदलाव या गैस के छोटे बुलबुले बनने के कारण होती है. अगर गर्दन कभीकभार सामान्य रूप से चटकती है और इसके साथ दर्द, सूजन, सुन्नपन या कमजोरी जैसी कोई समस्या नहीं है, तो आमतौर पर यह चिंता का विषय नहीं होती.

कब होता है नुकसान

हालांकि, जानबूझकर बारबार गर्दन को मोड़कर या तेज झटके से चटकाने की आदत से बचना चाहिए. लगातार ऐसा करने से गर्दन के आसपास की मांसपेशियों, लिगामेंट्स और जोड़ों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है और दर्द या जकड़न की समस्या बढ़ सकती है. बहुत जोर से गर्दन घुमाना विशेष रूप से जोखिमपूर्ण हो सकता है.

गर्दन चटकाने की लगातार जरूरत महसूस होना कभीकभी गलत पोश्चर, लंबे समय तक स्क्रीन देखने या मांसपेशियों में खिंचाव का संकेत भी हो सकता है.

कब डॉक्टर के पास जाएं

अगर गर्दन में लगातार दर्द, हाथों में झनझनाहट या सुन्नपन, कमजोरी, चक्कर, तेज सिरदर्द या चोट के बाद परेशानी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. गर्दन चटकाने के बजाय सही पोश्चर बनाए रखना, लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठना और विशेषज्ञ की सलाह से हल्की स्ट्रेचिंग करना बेहतर विकल्प है. नियमित रूप से गर्दन चटकाने की आदत हो तो इसके कारण की जांच कराना अधिक सुरक्षित है.

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