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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। आरोप है कि एक 70 वर्षीय बुजुर्ग ने अपनी ही पत्नी और दिव्यांग बेटी की धारदार हथियार से हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने बेटी के शव को खेत में फेंक दिया, जबकि पत्नी का शव घर के अंदर ही छोड़ दिया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

बलिया के मुस्तफाबाद गांव में मिला मां-बेटी का शव

यह घटना रसड़ा कोतवाली क्षेत्र के सराय भारती के मुस्तफाबाद गांव की है। रिपोर्टों के अनुसार, 17 सितंबर की सुबह मां-बेटी की हत्या का मामला सामने आया। घर के अंदर 65 वर्षीय मानती देवी का शव मिला, जबकि उनकी दिव्यांग बेटी गौरी का शव घर के पीछे धान के खेत में पड़ा था। दोनों शव अलग-अलग जगह मिलने से पुलिस के सामने कई सवाल खड़े हो गए।

पुलिस को घटना की सूचना गांव के चौकीदार के जरिए मिली थी। इसके बाद पुलिस अधिकारी, फोरेंसिक टीम और अन्य जांच दल मौके पर पहुंचे। शुरुआती जांच में हत्या के बाद घटनास्थल पर खून के निशान साफ किए जाने की आशंका जताई गई थी।

पहले अज्ञात हमलावरों पर जताया शक, फिर पति तक पहुंची जांच

शुरुआत में मामला अज्ञात लोगों द्वारा हत्या किए जाने का बताया गया। लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस का शक परिवार के मुखिया रामचीज गुप्ता पर गया। आजतक की 19 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने आरोप लगाया कि रामचीज ने दो अन्य लोगों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी।

पुलिस के अनुसार, मामले की जांच में SWAT, सर्विलांस और रसड़ा पुलिस की संयुक्त टीमों को लगाया गया था। पूछताछ और घटनास्थल से मिले सुरागों के आधार पर जांच का रुख बदला और कथित साजिश की परतें सामने आने लगीं।

पत्नी और बेटी को लेकर क्या था पुलिस का दावा?

पुलिस के मुताबिक, मानती देवी मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं, जबकि बेटी गौरी दृष्टिबाधित थीं और दूसरों पर निर्भर थीं। जांच एजेंसियों ने दावा किया कि रामचीज सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर परेशान था और इसी वजह से उसने पत्नी और बेटी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। यह पुलिस की जांच में सामने आया कथित मकसद है, जिसे अदालत के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं प्रस्तुत किया जा सकता।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि गौरी को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ती थी। पुलिस ने इसी पारिवारिक परिस्थिति को कथित साजिश से जोड़कर जांच की।

दो अन्य लोगों को भी साजिश में शामिल करने का आरोप

आजतक और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने दावा किया कि रामचीज गुप्ता ने गांव के ही चंदन यादव और दिनेश गुप्ता को कथित तौर पर अपने साथ शामिल किया था। पुलिस के मुताबिक, तीनों ने मिलकर 16 सितंबर की शाम या रात वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई।

पुलिस के दावे के अनुसार, हत्या के बाद गौरी के शव को घर से निकालकर खेत में फेंका गया और घर में मौजूद खून के निशान साफ करने की कोशिश की गई। जांच में कथित तौर पर हत्या में इस्तेमाल हथियार और खून लगे कपड़ों की बरामदगी का भी उल्लेख किया गया है।

तीन आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा

19 और 20 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस ने रामचीज गुप्ता समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के बाद आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे भेजा गया। मामले में पुलिस की जांच, बरामदगी और आरोपियों की भूमिका से जुड़े विवरण आधिकारिक जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया के अधीन हैं।

परिवार के भीतर हुई इस वारदात ने खड़े किए गंभीर सवाल

बलिया की यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें एक ही परिवार की मां और बेटी की हत्या का आरोप परिवार के मुखिया पर लगा है। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। शुरुआती तौर पर अज्ञात हमलावरों की बात सामने आई, लेकिन पुलिस की जांच में कथित साजिश का एंगल सामने आया। अब मामले में हत्या की वास्तविक परिस्थितियों, आरोपियों की भूमिका और घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं का न्यायिक परीक्षण महत्वपूर्ण होगा।

डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और पुलिस के कथित बयानों पर आधारित है। आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत के फैसले से होगा।