दिल्ली में एच1एन1 इंफ्लुएंजा के बढ़ते मामलों ने लोगों और राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 24 घंटे में 166 नए केस सामने आए हैं. इस नए अपडेट के बाद इसके मरीजों की संख्या बढ़कर 2,612 हो गई है. इसके अलावा इन्फ्लूएंजाए के मामले भी सामने आ रहे हैं और इन्हें मिलाकर कुल केस करीब 3,300 तक पहुंच गए हैं. दिल्ली सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि राज्य के लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है. सरकार और हेल्थ डिपार्टमेंट पूरी तरह तैयार है. हॉस्पिटल्स में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन, दवाएं, ऑक्सीजन, बेड और टेस्टिंग सुविधाएं उपलब्ध रखी गई हैं.

एच1एन1 के मामले बढ़ने के बाद लोगों के मन में यह सवाल आना लाजमी है कि कहीं यह भी कोरोना की तरह पूरे देश में तो नहीं फैल रहा. फिलहाल दोनों की तुलना करना सही नहीं होगा. एच1एन1 नया वायरस नहीं है.

डॉक्टर ने क्या कहा?

यशोदा अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन विभाग में एसोसिएट डायरेक्टर डॉ विनय भट्ट ने बताया कि यह इन्फ्लुएंजा वायरस है और इसके मामले समयसमय पर बढ़ते रहे हैं. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। वे कहते हैं कि मामलों में बढ़ोतरी को सीधे कोरोना जैसी स्थिति मान लेना ठीक नहीं है. एच1एन1 एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से पहुंच सकता है, खासकर जब लोग लंबे समय तक एकदूसरे के करीब हों.

भीड़ वाली जगहों और बंद कमरों में इसका संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा रहता है. यही वजह है कि एक समय में किसी इलाके या शहर में इसके मामले बढ़ते हुए दिखाई दे सकते हैं.

इन लोगों में है ज्यादा खतरा

अधिकतर लोगों में एच1एन1 फ्लू की तरह ही रहता है और कुछ दिनों में आराम के साथ ठीक हो जाता है. लेकिन हर मरीज का जोखिम एक जैसा नहीं होता. बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से अस्थमा, सीओपीडी या दूसरी गंभीर बीमारी वाले मरीजों में संक्रमण ज्यादा गंभीर हो सकता है. ऐसे मरीजों में फेफड़ों तक संक्रमण पहुंचने और निमोनिया होने का खतरा रहता है.

अगर बुखार लगातार बना हुआ है, खांसी बढ़ रही है या मरीज को सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो इसे सामान्य फ्लू समझकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए. सांस फूलना, सीने में दर्द या ऑक्सीजन का स्तर गिरना खास तौर पर चिंता के संकेत हैं.

इन बातों का रखें ध्यान

एच1एन1 से बचाव में फ्लू वैक्सीनेशन भी अहम भूमिका निभा सकता है, खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हाईरिस्क मरीजों के लिए. समय पर टीकाकरण संक्रमण के गंभीर होने और उससे जुड़ी जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है और हाईरिस्क मरीजों में अस्पताल में भर्ती होने की संभावना भी कम हो सकती है.

फिलहाल एच1एन1 से बचने के लिए बहुत अलग कुछ करने की जरूरत नहीं है. बीमार हैं तो कुछ दिन घर पर रहें और दूसरों के संपर्क में आने से बचें. खांसते या छींकते समय मुंह ढकें और हाथ साफ रखें. खासकर घर में बुजुर्ग या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा व्यक्ति है, तो उसके पास जाते समय ज्यादा सावधानी रखें.

एच1एन1 के मामले बढ़ रहे हैं तो सावधानी जरूरी है, लेकिन इसे लेकर कोरोना जैसी स्थिति की आशंका से घबराने की जरूरत नहीं है. संक्रमण का फैलाव और उसकी गंभीरता लगातार निगरानी का विषय जरूर है.