
CG News: जशपुर। छत्तीसगढ़ जशपुर जिले के केरे गांव की दो नाबालिग बच्चियों के 28 किलोमीटर पैदल चलकर शाम के वक्त सरगुजा के बतौली पहुंचने की सनसनीखेज मामला सामने आया है। बदहवाश और चेहरे पर डर के साये के बीच पहुंची किशोरियों को जिसने भी देखा सहम से गए। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। चेहरे पर डर का भाव साफ दिखाई दे रहा था।
इस घटना ने मानव तस्करी और बाल श्रम के एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। इन बच्चियों को महज हजार रुपए प्रति महीने वेतन का लालच देकर जशपुर के बगीचा लाया गया था। जिस घर में उन्हें काम पर रखा गया, वहां का माहौल देखकर वे इतनी डर गई कि मंगलवार सुबह 9 बजे बिना किसी को बताए और अपना सारा सामान छोड़कर वहां से भाग निकलीं।
रास्ता भटकने के कारण वे अपने गांव केरे जाने के बजाय शाम 7 बजे बदहवाशी की हालत में बतौली पहुंच गई। बालगोविंद यादव ने दोनों बच्चियों को देखा तो वे आशंका हुई और तत्काल डायल 112 को सूचना, मौके पहुंची पुलिस की टीम ने रेस्क्यू किया।
डायल 112 के स्टाफ राजू तिर्की ने भूखी-प्यासी बच्चियों को सबसे पहले होटल ले जाकर नाश्ता कराया, फिर थाने लाए। रात 10 बजे उन्हें अंबिकापुर के चाइल्ड केयर (बालिका गृह) में शिफ्ट कर दिया गया। बालिका गृह पहुंचते ही बच्चियों के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिया गया है, जहां बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित है और उन्हें तत्काल मनोवैज्ञानिक और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। गरीबी के कारण ये बच्चियां स्कूल छोड़ चुकी थीं, जिसका फायदा उठाकर दलाल ने उनके दिहाड़ी मजदूर माता-पिता को पैसों का लालच दिया और उन्हें बाल श्रम के जाल में धकेल दिया।
डर लग रहा था, इसलिए बिना सामान लिए ही भागी
14-15 वर्ष आयु की एक पीड़ित बच्ची ने कहा कि गांव का ही एक जान-पहचान वाला लड़का, बगीचा में एक घर में काम करने के लिए महीने के 4 हजार मिलने की बात बताकर लाया था। उस घर में हमें कुछ ठीक नहीं लगा। डर लगा, हमें कहीं और भेज देंगे या हमारे साथ कुछ गलत होगा। इसलिए हम मंगलवार सुबह बिना अपना कपड़ा लिए ही चुपके से भाग निकले।
बगीचा मानव तस्करी का सबसे ट्रांजिट हब
पुलिस और बाल संरक्षण इकाई के रिकॉर्ड बताते हैं कि बगीचा मानव तस्करी का बड़ा ट्रांजिट हब बन चुका है। 6 से 12 महीनों में बतौली, बगीचा और अंबिकापुर क्षेत्र से 40 से अधिक नाबालिगों का रेस्क्यू हो चुका है। डेढ़ महीने पहले बतौली बस स्टैंड से 14 बच्चियां बरामद हुई थी। दलाल गांवों से बच्चियों को लाते हैं, उन्हें बगीचा में कुछ दिन रखकर ब्रेनवॉश के बाद ट्रेन से रायपुर होते हुए महानगरों में बेच दिया जाता है।
काउंसलिंग और पूरी जानकारी के बाद हमारी टीम जाएगी छोड़ने
विक्रांत सिंह, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, सरगुजा का कहना है, बच्चियों की काउंसलिंग की जा रही है। उन्हें बालिका गृह में रखा था। बच्चियां जशपुर की है। वे किस कारण से पैदल चलींऔर कहां की रहने वाली है। इसकी पूरी डिटेल ली जा रही है। फिर घर वालों को बुलाकर उनसे पूछताछ की जाएगी। हमारी टीम ही बच्चियों को उनके घर तक छोड़ने जाएगी। बच्चियां बगीचा से किसी दूसरी जगह जाने वाली थीं, ये बात सामने नहीं आई है। वे बगीचा में कहीं काम कर रही थी। पूरी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ पाएगी।


