IDFC Bank Scam Haryana: हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को हिलाकर रख देने वाले करोड़ों रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने बड़ी कार्रवाई की है. CBI ने हरियाणा सरकार के वरिष्ठ IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल को गिरफ्तार किया है. शुरुआत में कागजी हेरफेर दिखने वाला यह मामला अब एक बेहद शातिर आपराधिक साजिश के रूप में सामने आया है. इस हाईप्रोफाइल गिरफ्तारी के पीछे CBI के हाथ लगा एक बेहद गोपनीय और पुख्ता सबूत है ऑडियो रिकॉर्डिंग. इसी फोन रिकॉर्डिंग ने IAS पंकज अग्रवाल के सारे दावों की पोल खोलकर रख दी.

CBI सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी को IDFC फर्स्ट बैंक के मैनेजर और इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड रिभव ऋषि एवं IAS पंकज अग्रवाल के बीच हुई फोन बातचीत की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग हाथ लगी है. इस सीक्रेट ऑडियो रिकॉर्डिंग में रिभव ऋषि सीधे पंकज अग्रवाल से एक बिल्डर के खाते में सरकारी फंड से 10 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने की बात कह रहा है.

दावा किया जा रहा है कि इस बातचीत के दौरान पंकज अग्रवाल ने बैंक मैनेजर को अपनी सहमति दी थी. उनकी हरी झंडी मिलने के बाद 14 जनवरी 2026 को यह भारीभरकम राशि एक बिल्डर के खाते में ट्रांसफर कर दी गई. इस पुख्ता डिजिटल सबूत के सामने आते ही CBI ने IAS अधिकारी पर शिकंजा कस दिया और उन्हें हिरासत में ले लिया.

कैंसिल चेक से निकाले गए 10 करोड़ रुपये

CBI ने विशेष अदालत में पंकज अग्रवाल की रिमांड मांगते हुए कई चौंकाने वाली दलीलें पेश कीं. जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि 14 जनवरी 2026 को एक कैंसिल्ड चेक का दुरुपयोग करके ‘SRR प्लानिंग’ और ‘मन्नत कॉन्ट्रैक्टर्स’ के बैंक खातों में 10 करोड़ रुपये अवैध रूप से ट्रांसफर किए गए.

सीबीआई अब इस पूरी मनी ट्रेल को खंगालने में जुटी है. इसके अलावा, जांच एजेंसी का आरोप है कि अवैध रूप से बैंक खाते खोलने के बदले पंकज अग्रवाल को बड़ा आर्थिक लाभ और कमीशन मिला था, जिसकी कड़ियों को जोड़ना अभी बाकी है.

नियमों को ताक पर रखकर खोले गए खाते

CBI की जांच में सामने आया है कि जब पंकज अग्रवाल स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव के पद पर तैनात थे, तब उनके कार्यकाल के दौरान हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के बैंक खाते चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक में खोले गए थे. ये खाते हरियाणा सरकार के वित्त विभाग के मौजूदा नियमों का सीधा उल्लंघन करके खोले गए थे.

हैरानी की बात यह है कि जब विभाग के एक जूनियर अधिकारी ने फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए इस पर लिखित आपत्ति जताई थी, तब भी पंकज अग्रवाल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए और दबाव बनाकर ये खाते खुलवाए.

50 करोड़ की लिमिट थी, ट्रांसफर कराए 100 करोड़

वित्तीय नियमों के अनुसार, संबंधित सरकारी खाते में अधिकतम 50 करोड़ रुपये ही जमा या ट्रांसफर किए जा सकते थे. इसके बावजूद पंकज अग्रवाल ने बिना किसी कोटेशन, टेंडर या उचित सरकारी प्रक्रिया के कोटक महिंद्रा बैंक से सीधे 100 करोड़ रुपये निकालकर IDFC बैंक के नए खाते में ट्रांसफर करवा दिए. फर्जी लेनदेन के माध्यम से इन विभागों के फंड का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया, जिससे अकेले इन दो विभागों के कारण सरकार को 60.54 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ.

रडार पर 6 और IAS अधिकारी, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

इस महाघोटाले की आग सिर्फ पंकज अग्रवाल तक सीमित नहीं है. सीबीआई की रडार पर अभी हरियाणा के 6 और वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं, जिनकी भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है. सूत्रों के अनुसार, इनमें से दो अधिकारियों को सीबीआई सरकारी गवाह बना सकती है, जबकि अन्य चार के खिलाफ गिरफ्तारी की तैयारी चल रही है.

चर्चा है कि हरियाणा के एक बेहद सीनियर आईएएस अधिकारी, जो पहले मुख्यमंत्री कार्यालय में भी तैनात रह चुके हैं, उनसे हुई पूछताछ के बाद ही पंकज अग्रवाल को दबोचा गया है. मंगलवार को भी जांच टीम ने पंचायत विभाग में तैनात रह चुके दो अन्य आईएएस अधिकारियों से लंबी पूछताछ की है.

657 करोड़ का कुल गबन, 17 के खिलाफ चार्जशीट

CBI के प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा सरकार के अनुरोध पर स्टेट विजिलेंस और एंटीकरप्शन ब्यूरो से यह जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी गई थी. पूरे घोटाले की बात करें तो हरियाणा सरकार के 8 विभागों के कुल 504 करोड़ रुपये की रकम का गबन करके उसे शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया है, जबकि चंडीगढ़ प्रशासन के मामले में यह नुकसान 153 करोड़ रुपये का है. यानी कुल मिलाकर यह 657 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला है.

सीबीआई अब तक इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. इसमें IDFC फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के 6 बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 कर्मचारी, 2 निजी कंपनियां और 6 अन्य लोग शामिल हैं. इसी मामले में पंचकूला नगर निगम के फंड का गबन करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए एक अन्य वरिष्ठ IAS अधिकारी आरके सिंह को पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद पहले ही न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है. सीबीआई का कहना है कि पंकज अग्रवाल के रसूख को देखते हुए उनसे कड़ाई से पूछताछ जरूरी है ताकि बेनामी संपत्तियों और ज्वेलरी की रिकवरी की जा सके.