
कैंची धाम में जाम का सामना करने वालों की परेशानी भले ही खत्म हो गई हो, मगर लगातार बढ़ती भीड़ एक नई आफत को बुला रही है. नैनीताल पर इसी साल मई में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स ने एक बड़ी रिसर्च की थी, जिसके नतीजे चौंकाने वाले हैं. इसके अलावा एक अन्य रिसर्च में बताया गया है कि जो हालत नैनीताल की है असल में हिमालय के सभी पहाड़ों का हाल वैसा ही है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। लगातार बढ़ती भीड़ की वजह से पहाड़ की कैरिंग कैपेसिटी घटती जा रही है जो आने वाले वक्त में बड़ी आपदा का कारण बन सकती है.
हनुमान अंश फिल्म की बंपर सफलता के बाद नीम करोली बाबा के कैंची धाम में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. खासकर वीकेंड के समय कैंची धाम में पैर रखना तक मुश्किल हो रहा है. बीता सप्ताह तो सबसे ज्यादा मुश्किल भरा रहा. दिल्ली-NCR से कैंचीधाम जाने वाले लोग घंटों जाम में फंसे रहे. इस जाम की वजह से अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जाने वाले आम लोग भी परेशान हुए. भीड़ इतनी बेकाबू थी जिसे संभालने में उत्तराखंड पुलिस के पसीने छूट गए. वीकेंड खत्म होने के बाद जाम की परेशानी से तो राहत मिल गई, मगर जिस तरह से पहाड़ पर भीड़ बढ़ रही है वह पहाड़ की कैरिंग कैपेसिटी के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है.
क्या होती है कैरिंग कैपेसिटी?
कैरिंग कैपेसिटी का मतलब किसी भी क्षेत्र की उस क्षमता से होता है जिससे उस इलाके के पर्यावरण और बुनियादी सुविधाओं को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे. हर क्षेत्र की अपनी कैपेसिटी होती है, मसलन वह कितने लोगों की भीड़ को संभाल सकता है. उदाहरण के तौर पर किसी पहाड़ी इलाके की क्षमता 10 हजार लोगों की है यानी इतने ही लोगों के लिए पानी, सड़क, पार्किंग या सीवेज का इंतजाम है, लेकिन वहां अचानक 20 हजार या उससे ज्यादा लोग पहुंचने लगें तो कैरिंग कैपेसिटी पर प्रभाव पड़ेगा और इसके दुष्परिणाम दिखाई देंगे.
नैनीताल में बोझ कैरिंग कैपेसिटी से कहीं ज्यादा
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स NIUA ने नैनीताल की कैरिंग कैपेसिटी पर एक बड़ी रिसर्च की थी. इसे इसी साल मई में स्प्रिंगर नेचर ने प्रकाशित किया है. रिसर्च में ये दावा किया है कि कागजों पर भले ही नैनीताल लाखों लोगों को संभालने की क्षमता रखता है, लेकिन पहाड़ पर भूस्खलन के खतरों और सीवेज सिस्टम तथा कचरा प्रबंधन के हिसाब से ये कैपेसिटी बेहद कम रह जाती है. रिपोर्ट को तीन हिस्सों में बांटा गया था.
नैनीताल की सैद्धांतिक कैरिंग कैपेसिटी 8.34 लाख व्यक्ति प्रतिदिन तक हो सकती है.
अगर इसमें पहाड़ की संवेदनशीलता, भूस्खलन, बारिश को जोड़ दें तो यह महज 1.49 लाख प्रतिदिन रह जाती है.
सीवेज, वेस्ट मैनेजमेंट, पानी की उपलब्धता, पार्किंग के लिहाज से नैनीताल के पास सिर्फ 8422 लोगों की ही क्षमता बचती है, जबकि हर रोज लाखों में है.
कैरिंग कैपेसिटी घटने से क्या होता है?
पहाड़ों की क्षमता कम होने की वजह से छोटी सी घटना ही बड़ी आपदा बन सकती है. मसलन ज्यादा बारिश, बादल फटने या भूकंप जैसी घटनाओं का असर कई गुना ज्यादा हो सकता है. भूस्खलन के मामले बढ़ सकते हैं.
पहाड़ पर पानी सीमित है. अगर मौजूदा क्षमता में कमी आएगी तो पानी व अन्य बुनियादी जरूरतों पर असर पड़ेगा. नैनीताल, मसूरी व शिमला जैसे शहरों में पेयजल संकट पहले भी देखा जा चुका है.
वेस्ट मैनेजमेंट प्रभावित होता है, प्रदूषण और गंदगी बढ़ती है. इससे जैव विविधता प्रभावित होती है और स्थानीय वन संपत्तियां व जीव जंतु भी प्रभावित होते हैं.
नई दिल्ली. नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर करिश्मा कर दिखाया है. फिल्म ने बंपर कमाई कर मेकर्स को भी हैरान कर दिया. महज 2 करोड़ रुपये की लागत से बनी हनुमान अंश अबतक देश और दुनिया में 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर चुकी है.
पहाड़ पर कितना बढ़ रहा बोझ
उत्तराखंड में प्रतिदिन लाखों वाहन जा रहे हैं. उत्तराखंड परिवहन विभाग के एएनपीआर कैमरों के आधार पर तैयार किए गए डाटा के मुताबिक 2 अक्टूबर को बॉर्डर और 10 चेक पोस्ट पर तकरीबन 1 लाख 1 हजार 840 बाहरी वाहन रिकॉर्ड किए गए. 3 अक्टूबर यह संख्या तकरीबन 94 हजार थी और 4 अक्टूबर को 90 हजार के आसपास. अगर स्थानीय वाहनों की संख्या भी शामिल कर ली जाए तो 2 अक्टूबर के दिन उत्तराखंड के बॉर्डर में एंट्री करने वाले वाहनों की संख्या तकरीबन 1 लाख 60 हजार से ज्यादा थी. 3 अक्टूबर को 1 लाख 57 हजार और 4 अक्टूबर को तकरीबन 1 लाख 47 हजार रही.
कैंची धाम में क्यों बढ़ रही भीड़
नीम करोली बाबा का आश्रम कैंची धाम नैनीताल में ही है. यहां देश विदेश से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. हाल ही हनुमानअंश फिल्म की बंपर सफलता ने इसकी लोकप्रियता में और बढ़ोतरी की है. यहां एक ही दिन में हजारों वाहन पहुंचते हैं जो सिर्फ जाम ही समस्या नहीं बनती, बल्कि पहाड़ों पर अतिरिक्त दबाव के हालात बन जाते हैं.
हिमालय की क्षमता क्यों घट रही?
PubMed में हिमालय की कैरिंग कैपेसिटी पर पिछले साल अक्टूबर में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक सिर्फ नैनीताल नहीं, बल्कि पूरे हिमालय की कैरिंग कैपिसटी घट रही. इसका कारण अनकंट्रोल टूरिज्म है. पहले पहाड़ पर जाने वाले लोगों की संख्या सीमित थी, अब इनकी संख्या लाखों में है. खासकर वीकेंड के दिनों में हालात और बिगड़ जाते हैं.



