Infertility In India: नि:संतानता या बांझपन को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां हैं। भारतीय समाज में समय पर बच्चे पैदा करने का दबाव होता है और अंततः समाज हमेशा महिलाओं को गर्भ धारण करने में असमर्थता के लिए दोषी ठहराता है।

Infertility Problem: भारत में 23% पुरुष हैं बांझपन की समस्या से परेशान, ये आदतें हो सकती हैं जिम्मेदार​
Infertility Problem: भारत में 23% पुरुष हैं बांझपन की समस्या से परेशान, ये आदतें हो सकती हैं जिम्मेदार​

जबकि, डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों की मानें तो सामान्य आबादी में बांझपन की मौजूदगी 15 से 20 प्रतिशत है, जिसमें मेल इंफर्टिलिटी या पुरुष बांझपन के कारणों का योगदान 20 से 40 प्रतिशत है। शोधकर्ताओं के अनुसार, पुरुष बांझपन की दर लगभग 23 फीसदी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में पिछले कुछ वर्षों से पुरुष बांझपन कि समस्या बढ़ती जा रही है।

पुरुष बांझपन के कारण

पुरुष बांझपन

पुरुष बांझपन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि, शुक्राणुओं में कमी, शुक्राणु का कम उत्पादन, शुक्राणु के असामान्य कार्य में रुकावट या डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ स्पर्म में समस्या, जननांग पथ की चोट या इंफेक्शन के कारण ऐसी कई समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा खराब लाइफ स्टाइल भी इसका एक कारण हो सकता है, जैसे धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, जंक फूड का सेवन, व्यायाम न करना, मोटापा, तनाव और कुछ रसायनों या कीटनाशकों के संपर्क में आना। बीमारियां, चोटें, पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं और बदलती जीवनशैली पुरुष बांझपन की समस्याओं की वजह हो सकती है।

पुरुष बांझपन के लक्षण

जब लक्षण का पता चलता हैं, तो भारतीय के कारण भी सही समय पर इलाज नहीं हो पाता है। कुछ मामलों में पुरुष समाज में गलतफहमी या शर्मिंदगी के डर से अपने स्वयं के इन्फर्टिलिटी टेस्ट से गुजरने से हिचकिचाते हैं। जब कि समाज में स्वस्थ व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुरुषों और महिलाओं को अपने रीप्रोडक्टिव हेल्थ के प्रति समान रूप से सजग रहने की जरूरत है। संबंधी समस्याओं का इलाज कराने में संकोच नहीं करना चाहिए।

  • वीर्य स्खलन में कठिनाई
  • स्खलन द्रव की कम मात्रा
  • यौन इच्छा में कमी या इरेक्शन बनाए रखने में कठिनाई पुरुष बांझपन का कारण बन सकते हैं।

इसके अलावा भी कई कारण हो सकते हैं

  • धूम्रपान और शराब पीने जैसी आदतें भी प्रजनन क्षमता पर हानिकारक प्रभाव डालती हैं। स्मोकिंग से पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या में कमी और महिलाओं में गर्भपात की समस्या हो सकती है।
  • शराब शुक्राणु के लिए विषाक्त है। यह शुक्राणुओं की संख्या को कम करता है और यौन में बाधा डाल सकता है। हार्मोन संतुलन को बाधित कर के गर्भपात के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।
  • फिजिकल एक्टिविटी व्यक्ति की प्रजनन क्षमता को बढ़ा सकती है, लेकिन बहुत अधिक व्यायाम महिलाओं में मासिक धर्म की समस्या पैदा कर सकता है और पुरुषों में अंडकोष के आसपास की गर्मी को बढ़ा सकता है, जिससे शुक्राणु उत्पादन पर असर होता है।
  • प्रोटीन से भरपूर डाइट और लगातार व्यायाम के माध्यम से सेहत बनाए रखनी चाहिए। हार्मोन असंतुलन की संभावना को कम करने के लिए अपने शरीर का वजन ज्यादा बढ़ने नहीं देना चाहिए। मोटापे के कारण पुरुषों में गर्मी बढ़ जाती है और शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है और महिलाओं में यह ओव्यूलेशन पर दबाव डालता है जो बांझपन का कारण होता है।
  • कुछ दवाइयां या हर्बल उपचार भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं। ऐसी दवाइयों के इस्तेमाल से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से चर्चा की जानी चाहिए।
  • पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थों और कीटनाशकों, जहरीले रसायनों और आयनकारी विकिरण जैसे खतरों से भी बचना चाहिए।
  • तनाव और नींद की कमी भी इंफर्टिलिटी का बड़ा कारण हो सकता है। ध्यान, योग, डीप ब्रीदिंग और अन्य तकनीकों को अपनाकर तनाव को कम किया जा सकता है।