
अयोध्या के राम मंदिर में सोने की चोरी को लेकर उठे सवालों के बीच अब वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भी सोने को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं. यह मामला सामने आने के बाद से मंदिर प्रबंधन में हड़कंप की स्थिति है. वकील नित्यानंद राय का दावा है कि मंदिर के शिखर, गुंबद और दूसरे हिस्सों में जहां पहले सोना दिखाई देता था, वहां अब पेंट नजर आ रहा है. एडवोकेट नित्यानंद राय की मानें तो उन्होंने मंदिर में सात से आठ प्रमुख जगहों पर सोना गायब पाया है.
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इस मामले में वकील ने प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, मंदिर प्रशासन, कमिश्नर और जिला प्रशासन, सत्यम मिश्रा समेत कई जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायत भेजी है. राय के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के शिकायत पोर्टल आईआरएस पर भी उनकी शिकायत दर्ज हुई है, लेकिन शुरुआती जांच से वह संतुष्ट नहीं हैं.
अब सवाल उठ रहा है कि क्या मंदिर में सोने की स्थिति को लेकर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र और विस्तृत जांच होगी? क्या मंदिर प्रशासन सार्वजनिक तौर पर बताएगा कि मंदिर के शिखर और गुंबद पर कितना सोना लगाया गया था, उसकी मौजूदा स्थिति क्या है और कहीं सोना हटाया गया है तो उसकी वजह क्या है?
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राम मंदिर से जुड़े सोने के विवाद के संदर्भ में काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर उठे ये सवाल धार्मिक स्थलों की संपत्ति के रखरखाव और पारदर्शिता पर भी ध्यान खींचते हैं. हालांकि, काशी विश्वनाथ मंदिर से सोना चोरी होने की बात अभी आरोप है, जिसकी स्वतंत्र जांच बाकी है.
कैसे हुआ मामले का खुलासा?
वकील नित्यानंद राय के मुताबिक, वह सावन के महीने में नियमित रूप से बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने जाते हैं. इसी दौरान एक रात करीब 10 से 11 बजे के बीच उनकी नजर मंदिर के उत्तर-पश्चिमी हिस्से पर पड़ी. उनका दावा है कि वहां एक जगह सोना दिखाई नहीं दे रहा था और उस हिस्से पर पेंट किया हुआ नजर आ रहा था.
राय के मुताबिक, पहली बार यह देखने के बाद उन्हें हैरानी हुई. उन्हें लगा कि जिस जगह पर सोना होना चाहिए, वहां पेंट कैसे दिखाई दे रहा है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। इस संदेह को दूर करने के लिए वह अगली सुबह करीब चार बजे दोबारा मंदिर पहुंचे. उन्होंने दावा किया कि उस समय भी संबंधित जगह पर सोना दिखाई नहीं दिया और वहां पेंट नजर आया.
इसके बाद एक दिन कहचरी की छुट्टी कर वहां सुबह चार बजे पहुंच गया. उन्होंने मंदिर के दूसरे हिस्सों को भी ध्यान से देखना शुरू किया. राय का कहना है कि एक-दो नहीं, बल्कि सात से आठ प्रमुख जगहों पर उन्हें सोना दिखाई नहीं दिया. उनके अनुसार, इन जगहों पर सोने के बजाय पेंट नजर आ रहा था. उन्होंने मंदिर के गोलाकार गुंबद वाले हिस्से पर भी सवाल उठाए हैं.
कब भेजी थी शिकायत?
एडवोकेट नित्यानंद राय के अनुसार, मंदिर में सोने की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ने के बाद उन्होंने 23 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, काशी विश्वनाथ मंदिर के ट्रस्टियों, वाराणसी के जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और अन्य जिम्मेदार लोगों को रजिस्टर्ड डाक के जरिए शिकायत भेजी.
उन्होंने मंदिर से जुड़े प्रमुख लोगों को भी लिखित रूप में इसकी जानकारी देने का दावा किया है. राय के मुताबिक, शिकायत भेजने के बाद 20 से 25 दिन बीत गए, लेकिन उन्हें संबंधित अधिकारियों या मंदिर प्रबंधन की ओर से ऐसा कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला, जिससे उनकी चिंता दूर हो सके.
राय का कहना है कि मामला मंदिर की संपत्ति और सोने की सुरक्षा से जुड़ा है. इसलिए इसे केवल सामान्य शिकायत मानकर निपटाने के बजाय तथ्यों के आधार पर जांच की जानी चाहिए.
PMO की कार्रवाई से संतुष्ट क्यों नहीं?
एडवोकेट के मुताबिक, उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय के शिकायत पोर्टल पर भी इस मामले को दर्ज कराया था. उनके अनुसार, शिकायत पर संज्ञान लिया गया और उनसे मामले के संबंध में जानकारी मांगी गई. राय का दावा है कि उन्हें यह भी बताया गया कि शुरुआती जांच में शिकायत के अनुरूप कुछ सामने नहीं आया.
हालांकि, वह इस शुरुआती कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं. उनका आरोप है कि मामले का निपटारा जिस तरह किया गया, वह पर्याप्त नहीं है. राय के मुताबिक, इतने महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर सोने की स्थिति से जुड़े सवालों की जांच केवल औपचारिकता के तौर पर नहीं की जा सकती.
वह चाहते हैं कि केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन मिलकर मामले की विस्तृत जांच कराएं. साथ ही, शिकायत में उठाए गए सवालों पर उन्हें स्पष्ट जवाब दिया जाए.
मंदिर प्रशासन से क्या मांग है?
नित्यानंद राय ने मंदिर प्रबंधन से सोने की स्थिति पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है. वह चाहते हैं कि मंदिर प्रशासन एक श्वेत पत्र जारी करे और संबंधित जानकारी मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर भी प्रकाशित करे. उनके मुताबिक, सार्वजनिक तौर पर इन सवालों के जवाब दिए जाने चाहिए:
- मंदिर के शिखर, गुंबद और अन्य हिस्सों पर कुल कितना सोना लगाया गया था?
- सोना किन-किन स्थानों पर लगाया गया था और उसकी मौजूदा स्थिति क्या है?
- जिन जगहों पर अब सोना दिखाई नहीं दे रहा, वहां क्या सोना हटाया गया है या किसी अन्य वजह से वह क्षतिग्रस्त हुआ है?
- अगर सोना हटाया गया है, तो इसकी अनुमति किसने दी और उसका आधिकारिक रिकॉर्ड कहां है?
- यदि सोना बंदरों या किसी अन्य कारण से क्षतिग्रस्त हुआ है, तो प्रभावित सोने को कहां सुरक्षित रखा गया है?
- -क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कब होगी और वहां दोबारा सोना लगाने की समयसीमा क्या है?
राय का कहना है कि मंदिर में सोने की स्थिति को लेकर उठे सवालों का जवाब केवल मौखिक आश्वासन से नहीं दिया जा सकता. इसके लिए रिकॉर्ड, निरीक्षण और आधिकारिक जानकारी जनता के सामने रखनी होगी.
पेंट से ढकने पर क्यों उठे सवाल?
वकील का आरोप है कि जिन जगहों पर सोना दिखाई नहीं दे रहा, वहां पेंट कर दिया गया है. वह चाहते हैं कि मंदिर प्रशासन ऐसी जगहों पर पेंट करके मामले को ढकने के बजाय पहले यह स्पष्ट करे कि वहां सोने की स्थिति क्या है.
उनके मुताबिक, यदि सोना बंदरों द्वारा नोचे जाने या किसी अन्य कारण से क्षतिग्रस्त हुआ है, तो मंदिर प्रबंधन को यह जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए. क्षतिग्रस्त सोने को सुरक्षित रखने और मरम्मत की व्यवस्था के बारे में भी बताया जाना चाहिए.
राय ने मंदिर के गोलाकार गुंबद वाले हिस्से को लेकर भी चिंता जताई है. उनका दावा है कि वहां एक जगह करीब तीन इंच व्यास का खाली हिस्सा दिखाई दिया था, जो उत्तर दिशा की ओर बढ़ता नजर आ रहा था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 23 सितंबर को शिकायत भेजने के बाद से कुछ हिस्सों में स्थिति और बिगड़ती दिखाई दे रही है. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है.
राम मंदिर के मामले से क्या जुड़ता है?
अयोध्या के राम मंदिर में सोने की चोरी से जुड़े मामले या विवाद के संदर्भ में काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर उठे आरोप एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं— क्या बड़े धार्मिक स्थलों पर कीमती धातुओं की सुरक्षा, नियमित निरीक्षण और संपत्ति का रिकॉर्ड पर्याप्त रूप से पारदर्शी है?
दोनों मंदिरों के मामलों को एक जैसा मान लेना अभी उचित नहीं होगा. काशी विश्वनाथ मंदिर के संबंध में नित्यानंद राय ने सोना गायब होने का आरोप लगाया है, लेकिन यह साबित नहीं हुआ है कि वहां चोरी हुई है. इसलिए यह भी कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों जगह एक जैसी घटना हुई है.
फिर भी, यदि किसी मंदिर में सोना लगाए जाने, उसके रखरखाव या उसके गायब होने को लेकर सवाल उठते हैं, तो प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वह रिकॉर्ड और जांच के आधार पर स्थिति स्पष्ट करे. केवल शुरुआती जांच में कुछ सामने नहीं आने की जानकारी से सभी सवाल अपने आप खत्म नहीं हो जाते. यह जरूरी है कि संबंधित प्रशासन बताए कि निरीक्षण कैसे किया गया, किन अभिलेखों की जांच हुई और शिकायतकर्ता के दावों का सत्यापन किस आधार पर किया गया.
अब जांच और जवाब का इंतजार
नित्यानंद राय का कहना है कि वह किसी पर बिना प्रमाण आरोप नहीं लगाना चाहते, लेकिन मंदिर में सोने की स्थिति को लेकर उठे सवालों को नजरअंदाज भी नहीं किया जाना चाहिए. उनके मुताबिक, यदि सोना बंदरों या किसी अन्य कारण से क्षतिग्रस्त हुआ है, तो उसकी जानकारी दी जाए और मरम्मत कराई जाए. यदि सोना हटाया गया है, तो उसका रिकॉर्ड सामने रखा जाए. और यदि किसी व्यक्ति की लापरवाही या भूमिका सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाए.
अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन विस्तृत निरीक्षण कराकर निष्कर्ष सार्वजनिक करेंगे? क्या मंदिर की वेबसाइट पर सोने से जुड़ा रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाएगा? और क्या शिकायत में उठाए गए सवालों का बिंदुवार जवाब दिया जाएगा?
काशी विश्वनाथ मंदिर से सोना गायब होने के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है. लेकिन मंदिर की संपत्ति को लेकर उठी इस चिंता का पारदर्शी और तथ्य-आधारित जवाब देना जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं के सामने स्थिति स्पष्ट हो सके.



