रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक आम बैठक आज होनी है. इस बार यह सिर्फ एक औपचारिक कॉर्पोरेट कार्यक्रम नहीं, बल्कि निवेशकों की उम्मीदों और बाजार की धारणाओं की बड़ी परीक्षा बन गई है. कंपनी के शेयरों में पिछले एक साल के दौरान आई गिरावट से निवेशकों की करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति कम हो चुकी है. ऐसे में बाजार को उम्मीद है कि चेयरमैन मुकेश अंबानी कंपनी के भविष्य को लेकर कुछ बड़े और ठोस संकेत दे सकते हैं.

AGM में सबसे ज्यादा चर्चा रिलायंस जियो की प्रस्तावित लिस्टिंग को लेकर रहने की संभावना है. पिछले साल कंपनी ने संकेत दिया था कि जियो को 2026 की पहली छमाही में शेयर बाजार में उतारा जा सकता है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है. बाजार में उम्मीद है कि रिलायंस जल्द ही सेबी के पास IPO से जुड़े दस्तावेज दाखिल कर सकती है. करीब 4 अरब डॉलर के इस इश्यू के भारत का सबसे बड़ा IPO बनने की संभावना जताई जा रही है. विश्लेषकों का मानना है कि जियो की सफल लिस्टिंग रिलायंस के शेयरधारकों के लिए बड़ी वैल्यू अनलॉकिंग साबित हो सकती है.

AI बिजनेस से जुड़े रोडमैप पर नजर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिलायंस के लिए अगला बड़ा ग्रोथ इंजन माना जा रहा है. कंपनी पहले ही डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की घोषणा कर चुकी है. जामनगर में डेटा सेंटर प्रोजेक्ट और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप्स को लेकर बाजार में काफी उम्मीदें हैं. हालांकि निवेशक सिर्फ निवेश योजनाएं नहीं, बल्कि यह जानना चाहते हैं कि AI कारोबार से कमाई कब शुरू होगी और इसका बिजनेस मॉडल क्या होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस को AI क्षेत्र में अपनी कमर्शियल रणनीति स्पष्ट करनी होगी.

नई ऊर्जा कारोबार में बढ़ रही उम्मीदें

रिलायंस का न्यू एनर्जी बिजनेस भी अब महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है. कंपनी ने हाईएफिशिएंसी सोलर मॉड्यूल का कमर्शियल उत्पादन शुरू कर दिया है और बैटरी निर्माण परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है. इसके अलावा, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण इकाई भी अगले साल उत्पादन शुरू कर सकती है. ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि बाजार ने अभी तक रिलायंस के न्यू एनर्जी कारोबार की पूरी क्षमता को कीमतों में शामिल नहीं किया है. इसलिए निवेशक प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन और संभावित रिटर्न पर स्पष्ट जानकारी चाहते हैं.

रिटेल बिजनेस पर भी रहेंगी निगाहें

रिलायंस रिटेल पिछले कुछ वर्षों में कंपनी का सबसे बड़ा कंज्यूमर बिजनेस बनकर उभरा है. हालांकि फिलहाल इसके IPO की संभावना कम दिख रही है, लेकिन निवेशक विस्तार योजनाओं और संभावित लिस्टिंग के रोडमैप पर अपडेट की उम्मीद कर रहे हैं. रिटेल और टेलीकॉम कारोबार अब कंपनी की कमाई में बड़ी हिस्सेदारी निभा रहे हैं, जिससे पारंपरिक ऑयलटूकेमिकल्स बिजनेस पर निर्भरता कम हुई है.

कमाई मजबूत, लेकिन बाजार चाहता है वैल्यू अनलॉकिंग

वित्त वर्ष 202526 रिलायंस के लिए मजबूत वित्तीय प्रदर्शन वाला साल रहा. कंपनी का सालाना राजस्व 10% बढ़कर 11.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. EBITDA 13.4% बढ़कर 2.08 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 18% बढ़कर 95,754 करोड़ रुपये हो गया. मार्च तिमाही में भी जियो और रिटेल कारोबार ने मजबूत प्रदर्शन किया. इसके बावजूद शेयरों में अपेक्षित तेजी नहीं दिखी.

इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि निवेशक अब सिर्फ कमाई की वृद्धि नहीं, बल्कि बड़े निवेशों से मिलने वाले वास्तविक रिटर्न और वैल्यू अनलॉकिंग के संकेत चाहते हैं. AGM में मुकेश अंबानी के सामने सबसे बड़ी चुनौती निवेशकों का भरोसा मजबूत करना और यह साबित करना होगी कि जियो, AI, न्यू एनर्जी और रिटेल में किए गए अरबों डॉलर के निवेश आने वाले वर्षों में शेयरधारकों के लिए बेहतर रिटर्न और नई ग्रोथ की कहानी लिखेंगे.