भले ही इंटरनेशनल मार्केट में सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन कच्चे तेल की कीमतों में मामूली एक फीसदी से कम की बढ़ोतरी देखने को मिली हो, लेकिन एक हफ्ते में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 8 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है. जहां खाड़ी देशों का ब्रेंट क्रूड एक फीसदी से भी कम की गिरावट के साथ बंद होकर 80.57 डॉलर प्रति बैरल पर है. वहीं अमेरिकी क्रूड के दाम में करीब सवा फीसदी की तेजी देखने को मिली और दाम 77.54 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं.

वास्तव में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच सीजफायर पर सहमति बनने की वजह से सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. साथ ही ईरान और यूएस के बीच डील भी एक बड़ा कारण है. आने वाले दिनों में दुनिया में खासकर मीडिल ईस्ट में शांति बनी रहती है और ईरान का तेल मार्केट में आता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है.

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या भारत में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आएगी. मई के महीने में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमत में 7 से 8 फीसदी का इजाफा किया गया था. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें किस लेवल पर है. साथ ही देश के चार प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कितनी देखने को मिल रही हैं.

कच्चे तेल की कीमतें

सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में मामूली तेजी देखने को मिली. ब्रेंट क्रूड 90 फीसदी की तेजी के साथ 80.57 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. वैसे ब्रेंट के दाम में पिछले हफ्ते 8 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है. 12 जून को बाजार बंद होने के बाद कच्चे तेल की कीमत 87.33 डॉलर प्रति बैरल थी. तब से अब तक इसमें 6.76 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट देखने को मिल चुकी है.

जबकि अमेरिकी क्रूड की बात करें तो शुक्रवार को 1.23 फीसदी की गिरावट देखने को मिली और दाम 77.54 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुए. वैसे एक हफ्ते में डब्ल्यूटीआई में 8.65 फीसदी कीी गिरावट देखने को मिल चुकी है. 12 जून को अमेरिकी तेल के दाम 84.88 डॉलर प्रति बैरल थे. तब से अब तक इसमें 7.34 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट देखने को मिल चुकी है.

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हिजबुल्लाह और इजराइल सीजफायर

हिजबुल्लाह और इजराइल सीजफायर के लिए तैयार हो गए हैं. यही वजह थी कि शुक्रवार को समझौते के बाद खाड़ी उत्पादक निर्यात बढ़ाने की तैयारी कर रहे थे. मरीनट्रैफिक के आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल, तेल उत्पादों और एलपीजी से भरे कम से कम चार टैंकर शुक्रवार को इराकी खाड़ी बंदरगाहों की ओर जाते हुए होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश कर गए. हालांकि, ईरान ने जहाजरानी पर कड़ा कंट्रोल रखने का संकेत दिया है.

सरकारी टीवी ने बताया कि जहाजों को रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नौसेना के साथ समन्वय स्थापित करके ही आवागमन करना होगा. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटों में मैरीटाइम इंडस्ट्री को जारी एक अप्रकाशित सलाह में, स्ट्रेट अथॉरिटी ने कहा है कि पीजीएसए द्वारा जारी वैध मार्ग परमिट के बिना किसी भी जहाज को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति नहीं है.

एक हफ्ते में 8 फीसदी की गिरावट

‘कमोडिटी कॉन्टेक्स्ट’ न्यूजलेटर के फाउंडर रोरी जॉनस्टन ने कहा कि शुक्रवार को ईरान की ओर से स्ट्रेट के इस्तेमाल की शर्तों को लेकर चिंताएं बढ़ने से तेल की कीमतें ऊपर गईं. जॉनस्टन ने कहा कि बाजार एक डील और उसके आसानी से लागू होने की उम्मीद कर रहा था, लेकिन अब तक ऐसा होता नहीं दिख रहा है. शुक्रवार को बढ़त के बावजूद, ब्रेंट क्रूड की कीमत में हफ्तेदरहफ्ते आधार पर लगभग 8 फीसदी की गिरावट आई.

यह गिरावट युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिकाईरान डील के बाद सप्लाई से जुड़ी चिंताओं में आई बड़ी कमी को दिखाती है. प्राइस फ्यूचर्स ग्रुप के सीनियर एनालिस्ट फिल फ्लिन ने कहा कि हालांकि अभी उस स्तर पर नहीं पहुंची हैं जहां युद्ध शुरू होने से पहले थीं, लेकिन ऐसा लगता है कि हम उसी दिशा में बढ़ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में और सप्लाई आने की उम्मीद है. फ्लिन ने आगे कहा कि जहाजों का जमावड़ा कुछ लोगों की सोच से कहीं तेजी से हट सकता है और अगर ईरान और अमेरिका के बीच सहयोग हो, तो यह प्रोसेस काफी तेजी से आगे बढ़ सकती है.

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85 मिलियन बैरल तेल का रास्ता साफ

ईरान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि स्विट्जरलैंड में ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच शुक्रवार को होने वाली प्रस्तावित बैठक टाल दी गई है और आने वाले दिनों में बातचीत के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं. मंत्रालय ने कहा कि बैठक अब जरूरी नहीं रही क्योंकि दोनों पक्षों के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर एक समझौता ज्ञापन पर पहले ही डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए जा चुके हैं.

जानकारों को उम्मीद है कि इस डील से मध्य पूर्व की खाड़ी में फंसा 8.5 करोड़ बैरल से ज़्यादा तेल वैश्विक बाजार में आ सकेगा. इस समझौते में ईरानी तेल पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना भी शामिल है, जिससे सप्लाई और बढ़ेगी.

60 डॉलर पर आएगा कच्चा तेल

दुनिया भर में तेल और LNG की सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है, लेकिन अमेरिकाईरान डील के बाद सप्लाई और उत्पादन के सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं. सिटी ने कहा कि उसके ‘बेस केस’ के अनुसार, तेल के फ्लो में लगातार सामान्य स्थिति लौटेगी, तेल बाज़ार में सरप्लस की स्थिति बनेगी और कीमतें अगले 6 से 12 महीनों में गिरकर 2027 की पहली तिमाही तक लगभग 60 डॉलर से 65 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ जाएंगी.

कॉमर्जबैंक ने कहा कि तेल की आपूर्ति धीरेधीरे सुधरेगी, इसलिए उसने साल के अंत तक ब्रेंट क्रूड की कीमत का अनुमान 85 डॉलर से घटाकर 80 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, साथ ही यह भी उम्मीद जताई है कि आने वाले साल के ज़्यादातर समय कीमतें युद्ध से पहले के स्तर से ऊपर बनी रहेंगी.

तेल मंत्री बासिम मोहम्मद ने कहा कि इराक के तेल क्षेत्र उत्पादन फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं और उत्पादन धीरेधीरे सामान्य हो जाएगा तथा पुराने स्तर पर लौट आएगा. ओपेक ने अपने ‘2026 वर्ल्ड ऑयल आउटलुक’ में कहा कि मांग के मोर्चे पर, ग्लोबल डिमांड 2025 में 105.1 मिलियन बैरल प्रति दिन से बढ़कर 2030 में 113.3 मिलियन बैरल प्रति दिन हो जाएगी.

क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में गिरावट आएगी. उसका कारण भी है. जून के महीने में कच्चे तेल की कीमतों में एक जून के बाद से 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल चुकी है. इसका मतलब है कि ब्रेंट क्रूड के दाम में 14.41 डॉलर प्रति बैरल की कमी देखने को मिल चुकी है. जबकि मई के महीने में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7 से 8 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली थी. आखिरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम में 25 मई को इजाफा किया गया था.

जानकारों की मानें तो कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जरूर आई है, लेकिन पेट्रोलियम कंपनियों के नुकसान की भरपाई अभी तक नहीं हो सकी है. कच्चे तेल के दाम में इजाफा होने के कारण पेट्रोलियम कंपनियों को रोज 1000 से 1500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था. अनुमान लगाया गया था कि जब कच्चे तेल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल से तक नहीं आ जाते तब तक ये नुकसान कम नहीं होगा. कच्चे तेल के दाम इस लेवल पर आने से पेट्रोलियम कंपनियां नो प्रॉफिट और नो लॉस के लेवल पर आएंगी. कच्चे तेल के 75 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर आने से पेट्रोलियम कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है.

पेट्रोल और डीजल के दाम कितने?

वैसे देश के चारों महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है. आईओसीएल के आंकड़ों के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल के दाम 102.12 रुपए प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर हैं. जबकि कोलकाता में पेट्रोल के दाम 113.51 और डीजल की कीमत 99.02 रुपए प्रति लीटर देखने को मिल रही है. मुंबई में शनिवार को पेट्रोल के दाम 111.21 रुपण्ये और डीजल 97.83 रुपए प्रति लीटर देखने को मिल हैं. इसके अलावा चेन्नई में पेट्रोल के दाम 107.77 रुपए और डीजल 99.55 रुपए प्रति लीटर पर आ गए हैं.