गुरुग्राम के बार में 3 घंटे पार्टी, फिर ड्राइविंग; नोएडा इंजीनियर की मौत से पहले!


नोएडा। नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत से पहले का वीडियो सामने आया है। वीडियो में वो एक बार में पार्टी करते हुए दिखाई देते हैं। जानकारी के मुताबिक, उन्होंने गुरुग्राम के एक बार में करीब 3 घंटे तक पार्टी की थी। इसके बाद नोएडा तक कार चलाकर ले गए। इस बीच उनकी कार पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी और वह सड़क हादसे का शिकार हो गए।

बार में 3 घंटे पार्टी, फिर की ड्राइविंग
सामने आई वीडियो में उन्हें मेज के कोने में बैठा देखा जा सकता है। आस-पास की कुर्सियों पर लोग मौजूद हैं। उन्हें एक दूसरे के साथ खाते-पीते देखा जा सकता है। बताया जा रहा है कि बार में एंट्री एग्जिट से लेकर बिल के फोटो वीडियो भी सामने आ गए हैं। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। शेयर की जा रही जानकारी के मुताबिक, उन्होंने बार में करीब 3 घंटे तक सबके साथ पार्टी की, इसके बाद वो अपने घर (नोएडा) निकल गए।

17 जनवरी को इंजीनियर की हुई थी मौत
गौरतलब है कि 17 जनवरी को कोहरे के कारण सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन स्थल पर खोदे गए करीब 20 फीट गहरे और पानी से भरे गड्ढे में युवराज मेहता की कार गिर गई थी। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची राहत टीम ने घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद युवराज को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

सीएम ने गठित की SIT, 5 दिन में सौंपे रिपोर्ट
इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी में मेरठ मंडलायुक्त, एडीजी जोन मेरठ और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को शामिल किया गया है। टीम को पांच दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

नोएडा प्राधिकरण से CEO हटाए गए
योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में युवराज मेहता के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर नॉलेज पार्क थाना में दो बिल्डरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। साथ ही आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुये नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लोकेश एम को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। इ

कांग्रेस ने हत्या करार दिया
कांग्रेस ने इस हत्या करार देते हुए कहा कि यह हत्या भाजपा सरकार की व्यवस्था के कारण हुई है। उसका कहना है कि भाजपा के सड़े-गले सिस्टम ने, युवराज की हत्या की है। सवाल है कि क्या फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ के पास ऐसे उपकरण ही नहीं थे, जिससे युवराज को पानी से निकाला जा सकता था।

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