
Board Of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कनाडा को भेजा गया गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण वापस ले लिया. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह निमंत्रण अब रद्द किया जा रहा है और इसे बोर्ड में शामिल होने के संबंध में कनाडा के लिए मान लिया जाए. ट्रंप का ये बयान विश्व आर्थिक मंच (WEF) में अपनी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल के तहत चार्टर पर हस्ताक्षर करने के ठीक बाद सामने आया. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। ट्रंप ने इसे वैश्विक संघर्ष समाधान की दिशा में बड़ा कदम बताया और कहा कि हम दुनिया में शांति स्थापित करने जा रहे हैं.
बता दें, गाजा शांति बोर्ड का गठन पश्चिम एशिया में संघर्ष को समाप्त करने और गाजा पट्टी में स्थिरता व पुनर्निर्माण की देखरेख के लिए किया गया था. ट्रंप ने पहले इसे अब तक का सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड बताया था. प्रशासन के अनुसार, लगभग 35 देशों ने इसमें शामिल होने की प्रतिबद्धता जताई है, जबकि 60 देशों को आमंत्रण भेजा गया था.
ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका देश अमेरिका के प्रति अधिक कृतज्ञ नहीं है. उन्होंने दावोस में कहा कि कनाडा को अमेरिका से बहुत सारी मुफ्त सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन वह पर्याप्त आभारी नहीं है. ट्रंप ने यह भी कहा कि गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली बनाने की योजना कनाडा की सुरक्षा में योगदान करेगी.
कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी ने WEF में अपने संबोधन में वैश्विक व्यवस्था में गंभीर विसंगति की चेतावनी दी थी और टैरिफ तथा भू-राजनीतिक दबाव के खिलाफ बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया. ट्रंप ने इस पर प्रतिक्रिया स्वरूप कनाडा के बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण रद्द कर दिया. उन्होंने कहा कि स्थिर, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का युग समाप्त हो चुका है और अब महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता से चिह्नित एक कठोर भू-राजनीतिक व्यवस्था का जन्म हो चुका है.
जानिए क्या है बोर्ड ऑफ पीस
बोर्ड ऑफ पीस (Board of Peace) में कई देश शामिल हैं, जिनमें मध्य पूर्व, एशिया और कुछ यूरोपीय व दक्षिण अमेरिकी देश प्रमुख हैं. इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि करने वाले देशों में अल्बानिया, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, बुल्गारिया, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, कुवैत, मंगोलिया, मोरक्को, पाकिस्तान, पैराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं.
वहीं भारत, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम जैसे प्रमुख देशों को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने अभी तक शामिल होने की पुष्टि नहीं की है या शामिल होने से इनकार कर दिया. शुरुआत में इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी और पुनर्निर्माण का समन्वय करना था लेकिन बाद में इसका दायरा व्यापक अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने के लिए बढ़ा दिया गया है.




