‘UGC समानता नियमों के खिलाफ’ भाजपा नेता ने खून से लिखा पीएम मोदी को पत्र, कानून वापस लेने की मांग की!


डिजिटल डेस्क। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के प्रस्तावित नए नियमों को सवर्ण समाज के लिए दमनकारी बताते हुए लोगों ने कड़ा विरोध जताया है। विरोध स्वरूप आगरा में प्रधानमंत्री से इस नियम को वापस लेने की मांग करते हुए खून से पत्र लिखा गया। इसके साथ ही सैकड़ों लोगों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा।

पूर्व पार्षद एवं भाजपा नेता जगदीश पचौरी ने कहा कि इस बिल में कई गंभीर त्रुटियां हैं, जो भविष्य में अत्यंत कष्टप्रद साबित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि नियमों के कुछ प्रावधान ऐसे हैं, जिनसे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। यह नियम सवर्ण समाज के उत्पीड़न और हताशा का प्रतीक है। इसलिए सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि उनके साथियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को खून से पत्र लिखकर आगाह किया गया है कि यह नियम समाज में जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देगा, जिसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। वहीं, क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने का निर्णय
यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। सवर्ण समाज इसे समाज को विभाजित करने वाला कदम बता रहा है। इसी क्रम में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (ब्रज प्रदेश) की प्रदेश कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण बैठक ताजगंज स्थित होटल ग्रांड अंपायर में आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से यूजीसी के नए नियमों का विरोध करते हुए निर्णय लिया गया कि 27 जनवरी को सुबह 11 बजे ब्रज प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा।

सामाजिक एकता की अपील
बैठक के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय महामंत्री रघुवंशी सिंह राजू ने कहा कि सामाजिक एकता के कमजोर होने के कारण ही कुछ ताकतें सवर्ण समाज के विरुद्ध ऐसे

नियम बनाने का साहस कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि क्षत्रिय महासभा के साथ-साथ सवर्ण समाज की सभी जातियां एक मंच पर आकर यूजीसी के इस नियम का पुरजोर विरोध करें। तभी सरकार को इसे वापस लेने के लिए मजबूर किया जा सकेगा। उन्होंने सवर्ण समाज के जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस नियम का विरोध करें, अन्यथा समाज की आने वाली पीढ़ियां उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी।

बरेली में विरोध की गूंज
गणतंत्र दिवस के अवसर पर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा यूजीसी कानून के विरोध में इस्तीफा दिए जाने से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई थी। इस्तीफे की सूचना मिलते ही बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम उनके आवास पहुंचे और उनसे इस्तीफे पर पुनर्विचार करने की अपील की। हालांकि शासन ने सिटी मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया है और पूरे मामले की जांच उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है।

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