
Shashi Tharoor Rahul Gandhi- Mallikarjun Kharge Meeting: क्या कांग्रेस और शशि थरूर के बीच सब कुछ ठीक चल रहा है? यह सवाल पिछले कुछ अरसे से पार्टी में अक्सर उछल रहा था. इन कयासों पर विराम लगाने के लिए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने दोनों नेताओं को अपने स्टैंड से अवगत कराया और अपने बारे में फैली गलतफहमियां दूर करने की कोशिश की. थरूर ने इस मुलाकात का ब्योरा खुद अपने एक्स पोस्ट के जरिये पब्लिक को दिया.
हम सब एक ही मार्ग पर हैं- शशि थरूर
उन्होंने अपनी पोस्ट पर लिखा, ‘कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जी से आज मुलाकात की. यह मुलाकात गर्मजोशी से भरी रही. इस दौरान दोनों नेताओं से विभिन्न विषयों पर रचनात्मक चर्चा हुई.’ पार्टी के दोनों शीर्ष नेताओं को आश्वस्त करते हुए शशि थरूर ने आगे लिखा, ‘हम सब एक ही मार्ग पर हैं. हम भारत के लोगों की सेवा के लिए आगे बढ़ रहे हैं.’
क्या मिटने वाली हैं दूरियां?
राजनीतिक एक्सपर्टों के मुताबिक, इस मुलाकात के जरिए शशि थरूर ने उन अटकलबाजियों को शांत करने की कोशिश की है. जो उन्हें लेकर फैल रही थी. अपनी पोस्ट के साथ शशि थरूर ने खरगे और राहुल गांधी के साथ अपना फोटो भी पोस्ट किया. जो पार्टी में सब कुछ ठीक होने का संकेत था. हालांकि माना जा रहा है कि थरूर को लेकर पार्टी में फैली असहजता अभी जल्दी से दूर होने वाली नहीं है.
इसकी एक नहीं बल्कि कई वजहे हैं. असल में राहुल गांधी हाल में कोच्चि में पार्टी के एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए गए थे. वहां पर राहुल गांधी ने बैठे शशि थरूर को छोड़कर सभी 12 वरिष्ठ नेताओं का नाम लिया. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इससे शशि थरूर ने खुद को आहत और अपमानित महसूस किया. वह भी तब, जब वे केरल से कांग्रेस वर्किंग कमेटी के 3 सदस्यों में से एक हैं.
ऑपरेशन सिंदूर पर अलग रुख
इसके बाद पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार के ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन कर कांग्रेस को असहज किया. यही नहीं, उन्होंने भारतीय प्रतिनिधिमंडल नेता के रूप में विदेश का न्योता स्वीकार किया. कांग्रेस आलाकमान ने इस पर अपनी असहमति जताई लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया.
आग में घी का काम तब हुआ, जब शशि थरूर केरल असेंबली चुनाव के लिए दिल्ली में बुलाई गई पार्टी की 2 बैठकों में शामिल नहीं हुए. उन्होंने पार्टी नेतृत्व को बताया कि साहित्यिक उत्सव में भाग लेने के लिए पहले से ही प्रतिबद्ध थे और इसकी सूचना उन्होंने पहले से ही पार्टी नेतृत्व को दे दी थी. इसके बावजूद उनकी अनुपस्थिति को थरूर की कांग्रेस से बढ़ती दूरी के रूप में देखा गया.
थरूर को लेकर क्या करेगी कांग्रेस?
अब उन्होंने खरगे-राहुल से मिलकर भले ही गलतफहमियां दूर करने की कोशिश की हो. लेकिन माना जा रहा है कि अब दूरियां इतनी बढ़ चुकी हैं कि शायद पैच अप न हो पाए. फिलहाल इस मुद्दे पर दोनों पक्ष शांत हैं और थरूर को लेकर पार्टी नेतृत्व आगे क्या फैसला करेगा, यह देखने लायक बात होगी.





