कनाडा और फ्रांस ने शुक्रवार को ग्रीनलैंड की राजधानी में अपने राजनयिक वाणिज्य दूतावास खोले।
यह कदम उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सहयोगी देश डेनमार्क और आर्कटिक द्वीप ग्रीनलैंड के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका अर्ध-स्वायत्त डेनिश क्षेत्र यानी ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने का प्रयास कर रहा है।
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने नुक में आधिकारिक रूप से देश के वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन किया। इस मौके पर कनाडा का ‘मैपल-लीफ’ झंडा फहराया गया और वहां मौजूद लोगों ने ‘‘ओ कनाडा’’ गीत गाया।
आनंद ने कहा, ‘‘आज इस झंडे को फहराने और औपचारिक रूप से वाणिज्यि दूतावास खोलने का महत्व यह है कि हम ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों के साथ कई मुद्दों पर एकजुट होकर खड़े रहेंगे।”
फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने बताया कि ज्यां-नोएल पोइरियर ने शुक्रवार को महावाणिज्य दूत के रूप में अपना कार्यभार संभाल लिया।
इससे फ्रांस ग्रीनलैंड में महावाणिज्य दूतावास स्थापित करने वाला यूरोपीय संघ का पहला देश बन गया है।
फ्रांस ने कहा कि यह निर्णय जून में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की यात्रा के दौरान लिया गया था।
कनाडा ने 2024 में ही ग्रीनलैंड में वाणिज्य दूतावास खोलने का वादा किया था, यानी ट्रंप के हालिया ‘‘अधिग्रहण’’ संबंधी बयानों से पहले। लेकिन खराब मौसम के कारण उद्घाटन टल गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वह डेनमार्क और उन सात अन्य देशों पर नए शुल्क लगाएंगे, जो ग्रीनलैंड पर कब्जे की उनकी मांग का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने अचानक यह धमकी वापस ले ली थी।


