‘Dear Wife पूजा, सल्फाश का सुझाव देने के लिए धन्यवाद…खत्म हो गई सौरभ की जीवनलीला, आखिरी चिट्ठी से नम हुईं आंखें!


मोतिहारी : मोतिहारी के सुगौली निवासी सौरभ मिश्रा की कहानी आज देश के उस कड़वे सच को उजागर करती है, जहां एक पढ़ा-लिखा, जिम्मेदार और सपने देखने वाला युवक वैवाहिक विवाद और कानूनी प्रक्रिया के दबाव में कैसे टूट गया. सौरभ मिश्रा मुंबई की एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत थे और पनवेल में अपने माता-पिता के साथ रहते थे. उनका विवाह 16 अप्रैल 2021 को पूजा से हुआ था. विवाह के बाद दोनों हनीमून के लिए गोआ भी गए, लेकिन शादी के महज दो महीने के भीतर ही पति-पत्नी के विवाद शुरू हो गया. विवाद बढ़ता गया और चार महीने के अंदर ही दोनों अलग हो गए. इसके बाद मामला कोर्ट तक पहुंच गया. अदालती कार्यवाही के दौरान सौरभ पर घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगे. कोर्ट-कचहरी के चक्कर, मानसिक दबाव और सामाजिक कलंक ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया.

‘Dear Wife पूजा…’
सौरभ के अनुसार, पत्नी द्वारा कानूनी प्रावधानों का पूरा उपयोग किया गया, जबकि पुरुष होने के कारण वे खुद को असहाय महसूस करने लगे. बताया जाता है कि सौरभ ने कई बार बातचीत से मामले को सुलझाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अपमानजनक जवाब मिले. इस निरंतर मानसिक उत्पीड़न ने उन्हें अवसाद के गहरे अंधेरे में धकेल दिया. अपने अंतिम संदेश में सौरभ मिश्रा ने अपनी पत्नी को संबोधित करते हुए लिखा- ‘Dear Wife पूजा, अब कहने के लिए मेरे पास कुछ भी नहीं बचा है. सल्फास का सुझाव देने के लिए धन्यवाद. मैं वैवाहिक विवाद के मामले में हो रहे कानूनी उत्पीड़न से तंग आ चुका हूं. इसलिए अपना जीवन समाप्त कर रहा हूं. मैं पूरी तरह निर्दोष हूं. मैंने कभी दहेज की मांग नहीं की और न ही किसी के साथ हिंसा की.’

परिवार की जिम्मेदारियां कंधों पर थीं
उन्होंने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि जिस उम्र में उन्हें माता-पिता की चिंता कम करनी चाहिए थी, उसी उम्र में वे उन्हें छोड़कर जा रहे हैं. साथ ही यह भी इच्छा जताई कि हालात सामान्य होने पर वे पूरी दुनिया घूमें. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। परिवार और बेटी के लिए अधूरे सपने सौरभ अपने परिवार का बड़ा बेटा था. माता-पिता, छोटे भाई और पूरे परिवार की जिम्मेदारियां उसके कंधों पर थीं. वे माता-पिता को दादा-दादी बनाने, उन्हें घूमाने और भाई के करियर को संवारने के सपने देखते थे, लेकिन ये सारे सपने अधूरे रह गए. तीन साल की बेटी नैना, जो जन्म से पहले ही उनसे अलग हो गई थी, उसके नाम लिखे अंतिम संदेश में सौरभ ने कहा- ‘प्रिय बेटी नैना, कोई तुमसे चाहे जो कुछ भी कहे, मैंने तुमसे हमेशा प्यार किया है और हमेशा करूंगा. खुश रहो.’

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