
हमारे शरीर में कई ऐसे रहस्य छिपे हैं, जिनका सही उपयोग करने से बिना दवा के भी कई समस्याओं से राहत पाई जा सकती है। आयुर्वेद और योग शास्त्र में सांस लेने की प्रक्रिया को बहुत महत्व दिया गया है। खासतौर पर नाक के दोनों नासिका छिद्र (स्वर) हमारे शरीर और मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
नाक के दो मुख्य हिस्से होते हैं — दायां स्वर और बायां स्वर। इन्हीं के माध्यम से हम सांस अंदर लेते और बाहर छोड़ते हैं। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। देखने में भले ही यह दोनों एक जैसे लगते हों, लेकिन इनका असर शरीर पर बिल्कुल अलग-अलग होता है, जिसे आप स्वयं महसूस भी कर सकते हैं।
दायां और बायां नासिका छिद्र का महत्व
आयुर्वेद के अनुसार,
- दायां नासिका छिद्र “सूर्य स्वर” कहलाता है। यह गर्म, सक्रिय और ऊर्जा प्रदान करने वाला होता है।
- बायां नासिका छिद्र “चन्द्र स्वर” कहलाता है। यह ठंडा, शांत और मन को शीतलता देने वाला माना जाता है।
दायां स्वर शरीर में गर्मी, सक्रियता और तेज़ी बढ़ाता है, जबकि बायां स्वर मन को शांत करता है, तनाव कम करता है और ठंडक पहुंचाता है। यही कारण है कि अलग-अलग समय पर हमारा सांस लेने का स्वर बदलता रहता है।
सिरदर्द में असरदार आयुर्वेदिक उपाय
अगर आपको सिरदर्द हो रहा है, तो बिना किसी दवा के यह सरल उपाय अपनाएं—
- आराम से बैठ जाएं या लेट जाएं।
- दाहिने नासिका छिद्र को उंगली से बंद करें।
- अब केवल बाएं नासिका छिद्र से धीरे-धीरे गहरी सांस लें और छोड़ें।
- ऐसा लगातार 5 मिनट तक करें।
कुछ ही मिनटों में आपको सिर में हल्कापन महसूस होने लगेगा और दर्द धीरे-धीरे कम होता चला जाएगा। यह उपाय विशेष रूप से तनाव, थकान या गर्मी से होने वाले सिरदर्द में बहुत प्रभावी माना जाता है।
यह तरीका क्यों करता है काम?
जब हम बाएं नासिका छिद्र से सांस लेते हैं, तो शरीर में चन्द्र स्वर सक्रिय होता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है, दिमाग शांत होता है और नसों पर पड़ने वाला दबाव घटता है। इसी कारण सिरदर्द में तेजी से राहत मिलती है।
नियमित अभ्यास से मिलते हैं और भी फायदे
इस श्वास अभ्यास को रोज कुछ मिनट करने से
- तनाव और बेचैनी कम होती है
- एकाग्रता बढ़ती है
- नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है
- मानसिक शांति बनी रहती है
यह एक सरल लेकिन बेहद प्रभावशाली आयुर्वेदिक तकनीक है, जिसे कोई भी व्यक्ति आसानी से अपना सकता है।




