भारत से 14,000 किमी दूर एक देश की संसद में हिंदी को लेकर हिंदी में ही सांसद भिड़ गए। यह देश वेनेजुएला का पड़ोसी है और खुद भी तेल के भंडार पर बैठा है। 2024 में पीएम मोदी इस देश की यात्रा पर भी गए थे। दरअसल जिस देश की हम बात कर रहे हैं वह गयाना है। गयाना एक कैरेबियन देश है जिसके पड़ोस में ब्राजील और वेनेजुएला हैं। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इसी गयाना की संसद में एक मंत्री ने मेज पीटते हुए एक दूसरे सांसद को हिंदी में चैलेंज दे दिया। जानकारी के लिए बता दें कि गयाना में भारतीय समुदाय सबसे बड़ा जातीय समूह है जो कुल जनसंख्या का लगभग 40 से 50% है। गयाना की आधिकारिक भाषा तो अंग्रेजी है मगर हिंदी भी यहां पर खूब बोली जाती है। यहां के लोग गिरमिटिया परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। जिन्हें आज से करीब 200 साल पहले अंग्रेज यहां पर ले आए थे।
गयाना में हिंदी के साथ-साथ भोजपुरी भाषा भी बोली जाती है। यहां पर भारतीय संस्कृति का प्रभाव आज भी मौजूद है। अब इसी गयाना की संसद में हिंदी को लेकर सांसद और कृषि राज्य मंत्री विकास राम किशन ने तहलका मचा दिया। दरअसल देश की संसद में बजट सत्र पर बहस चल रही थी। इसी दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहसबाजी शुरू हो गई। इसी दौरान हिंदी बोलने का मुद्दा भी उठा दिया गया। विपक्षी पार्टी के कुछ सांसदों ने कृषि राज्य मंत्री विकास राम किशनून की हिंदी बोलने की क्षमताओं पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। विपक्षी नेता दावा करने लगे कि विकास राम किशनून अपनी संस्कृति या हिंदी भाषा का ज्ञान नहीं रखते। इतना सुनते ही विकास रामकिशन खड़े हुए और विपक्षी सांसदों को हिंदी में ही चैलेंज दे दिया।
विकास रामकिशन ने विपक्षी सांसद को खुलेआम चुनौती देते हुए कहा कि मैं माननीय सांसद विष्णु पांडे जी से यह बोलना चाहता हूं कि आप विषय तो तय कीजिए। जिस विषय पर बहस करना चाहते हैं हम उनसे बहस करने को तैयार हैं। बिना कोई कागज देखे मैं हिंदी में बहस करने के लिए तैयार हूं। गयाना की संसद में हिंदी पर हुए इस बवाल का वीडियो जबरदस्त वायरल हो गया। आप पहले विकास रामकिशन का हिंदी वाला बयान सुनिए। उसके बाद आपको दिखाएंगे कि गयाना में पीएम मोदी ऐसा क्या कर आए थे जिसके मीम आज भी बन रहे हैं। आदरणीय सदस्य माननीय विष्णु पांडे मैं अभी इसी वक्त उनको चुनौती देता हूं कि किसी भी स्तर पर किसी भी जगह पर जाकर के विषय वो तय करेंगे। विषय वह तय करेंगे और मैं जितने ही जितनी डिबेट में करना चाहते हैं, बहस करना चाहते हैं वो तय करेंगे जी और मैं जाकर के डिबेट करूंगा बिना कागज दे के।





