चंद्रमा पर कहां छिपा है खजाना, भारत को नक्शे पर मिली सटीक जगह; ISRO ने कर दिया कमाल!


Mission Chandrayaan 4: जरा सोचिए, अगर हमारे इसरो के वैज्ञानिक चांद पर खजाना खोजने की कोशिश कर रहे हो और वास्तव में उन्हें वह जगह मिल जाए, को कैसा अनुभव होगा. कुछ ऐसा ही हुआ है हमारे वैज्ञानिकों के साथ, इसरों के साइंटिस्ट्स ने चांद की सतह पर एक ऐसी जगह खोजी है, जो किसी खजाने से कम नहीं है. वैज्ञानिकों ने चांद के दक्षिणी ध्रुव के ठीक पास मॉन्स माउटन क्षेत्र में एमएम-4 नामक एक विशेष स्थान की पहचान की है. भारत का अगला बड़ा अंतरिक्ष मिशन, चंद्रयान-4 इस स्थान पर लैंड करेगा. इस मिशन के 2028 में पूरा होने की उम्मीद है. वैज्ञानिकों ने जो काम किया है वह ठीक वैसा ही है, जैसे किसी अनजान शाहर में हम अपना घर खोज सकें.

अभी तक की मिली जानकारी के अनुसार, मॉन्स माउटन (एमएम) चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास एक पर्वत जैसा ऊंचा स्थान है. यह जगह इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि इस क्षेत्र में बर्फीली बर्फ और भविष्य के मिशनों के लिए सुरक्षित भूभाग हो सकता है. ऐसे में सवाल है कि चंद्रयान 4 हमारे लिए इतना खास क्यों है और यह पिछले किसी ऐसे मिशन से अलग कैसे है? दरअसल, चंद्रयान 4 भारत का पहला मिशन है जो सचमुच चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानों के टुकड़े इकट्ठा करके पृथ्वी पर लाएगा. इससे पहले के मिशन ने केवल तस्वीरों को भेजा है, जिससे हमें जानकारियां मिली हैं. जानकारी के अनुसार, यह अंतरिक्ष यान के पांच विशेष हिस्से एक साथ काम करेंगे, पहले यह चंद्रमा पर जाएगा, फिर नमूने इकट्ठा करेगा, फिर वापस लौटेगा और अंत में सुरक्षित घर वापस आएगा. ऐसे में सभी स्टेप का ऑपरेशन बिना किसी गलती के होना चाहिए.

लोगों के मन में सवाल है कि हमारे वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के MM-4 स्थान को क्यों चुना? इसका सीधा जवाब है कि यह हिस्सा सभी को प्रभावित करता है. यह एक ऐसी जगह है तो हमेशा छाया में रहती है. इस इलाका अधिकांश इलाका काफी ठंडा है और यहां पानी की बर्फ जमी हुई है. आपको यह पानी सामान्य जमी हुई बर्फ लग सकती है, लेकिन वास्तव में यह एक खजाना है. बताया जाता है कि अगर वैज्ञानिक इसको पर्याप्त मात्रा में खोज लें , तो धरती पर लोगों के लिए पीने का पानी, उससे सांस लेने के लिए ऑक्सीजन और यहां तक की रॉकेट के लिए ईंधन भी बना सकते हैं. तो है न यह एक खजाना.

मिशन चंद्रयान 4 के लिए वैज्ञानिकों ने भले ही, जगह ढूंढ ली हो लेकिन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरना आसान नहीं है. यह पूरा इलाका बेहद उबड़ खाबड़ है. इसमें पहाड़, गड्ढे और विशाल चट्टानें हर जगह बिखरी हुई हैं, मानो कोई बाधा दौड़ हो. वहीं, अगर थोड़ी भी गलत लैंडिंग होती है, तो इससे तबाही मच सकती है. अंतरिक्ष यान दुर्घनाग्रस्त हो सकता है या फिर टूटने की भी संभावना है. चंद्रयान 4 को लैंड कराने के लिए इसरो को एक ऐसी जगह ढूंढनी थी, जो समतल और चिकनी हो. जहां सौर ऊर्जा के संचालन के लिए पर्याप्त धूप मिलती हो, खतरनाक चट्टानों से मुक्त हो और पृथ्वी से अच्छा संचार संपर्क हो. चंद्रयान 2 अंतरिक्ष यान पर लगे एक विशेष कैमरे का उपयोग करते हुए एक उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें ली गई थीं. यह यान अभी भी चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है. वैज्ञानिकों ने एमएम-1, एमएम-3, एमएम-4 और एमएम-5 जैसे चार संभावित स्थलों का अध्ययन किया.

इसरो के वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर भारत का चंद्रयान-4 इस स्थान पर उतरता है, तो नमूने एकत्र करने के लिए मिशन का सफलतापूर्वक उतरना आवश्यक है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इसके अलावा दक्षिण ध्रुव के निकट स्थित पहाड़ी क्षेत्र से प्राप्त नमूनों से हमें चंद्रमा के प्राचीन इतिहास, उसकी चट्टानों और क्या सच में वहां पर जल बर्फ मौजूद है. अगर वैज्ञानिक इस क्षेत्र में जल बर्फ की उपस्थिति की पुष्टि कर लेते हैं, तो इससे भारत को चंद्रमा पर लंबे समय तक रहने या भविष्य में वहां एक बेस बनाने की योजना बनाने में मदद मिलेगी.

अन्य देश भी इस क्षेत्र पर नजर रखे हुए हैं, चीन के मिशन चंद्रमा के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं. हैरान करने वाली बात है कि अमेरिका भी बर्फ खोजने के लिए यहां पर एक रोवल भेजना चाहता है. माना जाता है कि दक्षिणी ध्रुव संसाधनों के भंडार के कारण एक ऐसा हॉटस्पॉट बन गया है जहां हर कोई खोजबीन करना चाहता है. अगर चंद्रयान 4 पूरी तरीके से सफल होता है, तो न केवल चंद्रमा के टुकड़े हमारी प्रयोगशालाओं तक लाएगी, बल्कि अनगिनत लोगों को प्रेरित करेगी और उन खोजों के द्वार खोलेगी जिनकी हम आज कल्पना भी नहीं कर सकते.

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