डॉलर ढेर, रुपया शेर; 5 पैसे की बढ़त के साथ 90.67 पर पहुंचा, जानिए आम आदमी को कितना होगा फायदा?!


Rupee vs Dollar : 18 फरवरी यानी बुधवार को विदेशी फंड के आने और घरेलू इक्विटी मार्केट में पॉजिटिव रुख की वजह से रुपया US डॉलर के मुकाबले 5 पैसे बढ़कर 90.67 (प्रोविजनल) पर बंद हुआ है. हालांकि, फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मजबूत डॉलर ने लोकल यूनिट में तेज बढ़त को रोक दिया है. इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में रुपया US डॉलर के मुकाबले 90.60 पर खुला और 90.60-90.71 की छोटी रेंज में ट्रेड करने के बाद 90.67 (प्रोविजनल) पर बंद हुआ. ये पिछले बंद भाव के मुकाबले 5 पैसे ज्यादा था. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। मंगलवार यानी 17 फरवरी को रुपया US डॉलर के मुकाबले 2 पैसे बढ़कर 90.72 पर बंद हुआ था.

सुधार की गुंजाइश
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स LLP के ट्रेजरी हेड और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि RBI द्वारा डॉलर को प्रोटेक्ट किए जाने की वजह से रुपया रेंज-बाउंड रहा. भंसाली ने कहा कि डॉलर इंडेक्स थोड़ा ऊपर था और एनालिस्ट को उम्मीद है कि लंबी गिरावट के बाद जल्द ही इसमें सुधार की गुंजाइश है. मजबूत US ग्रोथ और विदेशी इन्वेस्टमेंट की दिलचस्पी ने डॉलर को सपोर्ट किया. ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स ट्रेड में 0.22 परसेंट बढ़कर USD 67.57 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था.

घरेलू इक्विटी मार्केट में सेंसेक्स 283.29 पॉइंट्स बढ़कर 83,734.25 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 93.95 पॉइंट्स बढ़कर 25,819.35 पर पहुंच गया था. एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, मंगलवार को विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने नेट बायर बनकर 995.21 करोड़ रुपये के इक्विटी खरीदे.

फॉरेक्स मार्केट में क्या होता है?
रुपया और डॉलर का रेट तय होने का भी एक मार्केट है. इसे फॉरेक्स मार्केट कहते हैं. इसमें बैंक, बड़ी कंपनियां और निवेशक डॉलर खरीदते‑बेचते हैं. बता दें जब डॉलर की डिमांड ज्‍यादा होती है और बाजार में डॉलर कम मिलते हैं, तो डॉलर महंगा और रुपया सस्ता हो जाता है.

आम आदमी पर क्या होता है असर?
देश पेट्रोल‑डीजल और रसोई के तेल से लेकर मोबाइल, टीवी, मशीनरी जैसे सभी जरूरी सामानों और भी चींजों का आयात करता है. अगर रुपया कमजोर होता है ही इन्हें खरीदने के लिए ज्यादा रुपये देने पड़ते हैं, इसलिए पेट्रोल‑डीजल, गैस, हवाई टिकट, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंपोर्टेड दवाएं और गाड़ियां महंगी होने लगती हैं.

इन सभी चींजो के दाम में इजाफा होने के बाद इसका सबसे बड़ा असर आम आदमी के जेब पर पड़ता है. जब ईंधन महंगा होता है तो ट्रांसपोर्ट से जुड़े सभी चींजो का किराया बढ़ता है और इसका सबसे ज्यादा असर सब्‍जी, अनाज, दूध, पैकेज्‍ड फूड जैसी रोजमर्रा की जरूरत वाली चीजों की कीमत पर भी पड़ता है. फिर महंगाई ऑटोमैटिक बढ़ती है. इतनी ही नहीं विदेश में पढ़ाई, इलाज या घूमने के लिए विदेश जाने वालों पर असर और साफ दिखता है. ट्यूशन फीस, हॉस्टल, टिकट सब डॉलर में तय होते हैं. रुपया गिरने पर सेम कोर्स की फीस, भारतीय परिवारों को लाखों रुपये ज्यादा लगती है.

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