
Neha Singh Galgotias University: ग्रेटर नोएडा स्थित ‘गलगोटिया यूनिवर्सिटी’ नई दिल्ली में आयोजित ‘ AI इम्पैक्ट समिट 2026’ को लेकर विवादों का शिकार बन गई है. विश्वविद्यालय ने सम्मेलन में चीन के रोबोटिक डॉग को अपनी ओर से डेवलप किया गया AI टेक्नोलॉजी बताया. इस समिट में यूनिवर्सिटी की ओर से आईं नेहा सिंह नाम की एक प्रोफेसर सुर्खियों में आई हैं. उन्होंने यूनिवर्सिटी की ओर से इंडीजीनस इनोवेशन के उदाहरण के रूप में कमर्शियल रोबोडॉग ‘ओरियन’ को पेश किया. उन्होंने दावा किया कि ये रोबोडॉग को उनकी यूनुवर्सिटी की ओर से बनाया गया, हालांकि बाद में खुलासा हुआ कि यह रोबोट चीन से इंपोर्ट किया गया था. इस पूरे विवाद के बीच अब इंटरनेट पर सवाल खड़े होने लगे हैं कि नेहा सिंह कौन हैं?
कौन हैं नेहा सिंह? ़
बता दें कि नेहा सिंह ‘गलगोटिया यूनिवर्सिटी’ में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं. उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक वह अगस्त साल 2023 से यूनिवर्सिटी में काम कर रही हैं, जहां वह AI इंटेलिजेंस औरक रोबोटिक्स से संबंधित प्रोजेक्ट्स पर काम करती हैं. वह अलग-अलग एकेडमिक और टेक्निकल फोरम्स में भी हिस्सा लेती रहती हैं. नेहा सिंह के करियर की शुरुआत बेंगलुरु के ‘प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी’ और COER रुड़की से हुई. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इसके अलावा नेहा सिंह ने साल 2020 में BITS पिलानी के हैदराबाद कैंपस से PHD पूरी की. नेहा सिंह ने ABV-IIITM, ग्वालियर से कंप्यूटर साइंस में M.Tech भी किया है.
क्या है विवाद?
AI इम्पैक्ट समिट 2026′ में विवाद तब शुरु हुआ जब यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने चीन से इंपोर्ट किए गए रोबोडॉग को ‘गलगोटिया यूनिवर्सिटी’ की ओर से डेवलप किए गए AI टेक्नोलॉजी बताया. उन्होंने 4 पैर वाले उस चीनी रोबोडॉग को ‘ओरियन’ नाम से पेश किया. नेहा सिंह ने बताया कि इस रोबोट को यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की ओर से बनाया गया है. उन्होंने इसे यूनिवर्सिटी के AI में 350 करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट से भी जोड़ा. वीडियो के वायरल होते ही टेक्निकल एक्सपर्ट्स और इंटरनेट यूजर्स ने इसके चीनी कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का Unitree Go2 रोबोट होने का खुलासा किया, जो इंटरनेट पर केवल 2-3 लाख रुपये में बिक रहा था.
यूनिवर्सिटी की रिएक्शन
इंटरनेट पर रोबोट को लेकर विवाद बढ़ने के बाद ‘गलगोटिया यूनिवर्सिटी’ ने अपनी ओर से सफाई पेश की है. यूनिवर्सिटी का कहना है कि उन्होंने कभी दावा नहीं किया कि यह रोबोट उनकी ओर से बनाया गया है. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसे छात्रों के सीखने का साधन बताया. उनका कहना है कि यह छात्रों के लिए क्लास में चलने वाला एक टूल है. नेहा सिंह ने रोबोट के चीनी होने का दावे पर कहा,’ हम इसे खुद बनाने का दावा नहीं कर सकते. मैंने सभी को बताया है कि हमने इस रोबोट को अपने छात्रों को दिखाने के लिए रखा था ताकि वे इसे देखकर इंस्पायर्ड हों और भविष्य में इससे भी बेहतर कुछ बना सकें. हमारा मकसद छात्रों को अल्ट्रा एडवांस टेक्नोलॉजी से इंट्रोडक्शन करवाना है.’




