डकैतों ने 15 की उम्र मेंˈ किया था अगवा, मिठनी 63 साल बाद लौटीं घर, यूपी की यह कहानी बड़ी फिल्मी!

Kidnapped by bandits at the age of 15, Mithani returns home after 63 years

UP Kidnapping Case: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से ऐसी भावुक करने वाली दास्तान सामने आई है, जो किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगती। यह कहानी 80 वर्षीय मिठनी की है, जो 15 साल की उम्र में डकैतों द्वारा अगवा कर ली गई थीं। अब 63 साल बाद अपने मायके की मिट्टी की खुशबू पहचानते हुए वापस लौटी हैं। जब वह अपने गांव टोलवा आट पहुंचीं तो पूरे इलाके की आंखें नम हो गईं।

बात वर्ष 1961-62 की है, जब हरदोई के बेहटा गोकुल इलाके में डकैतों का आतंक हुआ करता था। बलदेव नाम के किसान के घर डकैतों ने धावा बोला। लूटपाट के दौरान विरोध करने पर बलदेव और उनके बेटे शिवलाल को लहूलुहान कर दिया गया। जाते-जाते डकैत घर की 15 वर्षीय बेटी मिठनी को उठा ले गए। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। उस वक्त मिठनी की शादी हो चुकी थी और अगले ही महीने उनका गौना होना था, लेकिन उस एक रात ने उनके जीवन की दिशा हमेशा के लिए बदल दी।

अलीगढ़ में मिली नई जिंदगी

डकैतों के चंगुल से निकलकर मिठनी का सफर अलीगढ़ तक जा पहुंचा। बताया जाता है कि वहां के एक पहलवान सोहनलाल यादव ने साहस दिखाते हुए उन्हें डकैतों से छुड़ाया और बाद में उनसे विवाह कर लिया। मिठनी ने वहां एक नया संसार बसाया, उनके आठ बच्चे हुए, लेकिन उनके दिल के किसी कोने में हरदोई का वह शिव मंदिर और अपने भाइयों- शिवलाल और सूबेदार की यादें हमेशा जिंदा रहीं।

बेटी ने पूरा किया मां का अधूरा सपना

मिठनी की सबसे छोटी बेटी सीमा, जो नोएडा में रहती हैं, अपनी मां की आंखों में मायके की तड़प को समझती थीं। 80 साल की उम्र में जब मिठनी की याददाश्त धुंधली होने लगी, तब सीमा उन्हें लेकर हरदोई निकल पड़ीं। उन्हें बस इतना याद था कि उनका घर एक बड़े शिव मंदिर के पास है। शुक्रवार को जब मां-बेटी सकाहा के प्रसिद्ध शिव मंदिर पहुंचीं, तो मिठनी की स्मृतियां जाग उठीं। उन्होंने गलियों और रास्तों को पहचान लिया। जब वह अपने भाई के घर पहुंचीं, तो पता चला कि उनके दोनों भाई अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके परिवार आज भी वहीं रहते हैं।

रिश्तों की जीत

छह दशक बाद जब ननद और भौजाई का मिलन हुआ, तो पूरा गांव इस ऐतिहासिक पल का गवाह बना। मिठनी ने घर के कोने-कोने को छूकर अपनी जड़ों को महसूस किया। उनकी बेटी सीमा के लिए यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि अपनी मां की अंतिम इच्छा को पूरा करने जैसा था। यह कहानी साबित करती है कि समय चाहे कितना भी बीत जाए, अपनों की याद और घर की दहलीज का खिंचाव कभी खत्म नहीं होता।

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